Tuesday , April 25 2017
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Literature

‘दिल्ली को कभी ‘उर्दू’ कहते थे, इस भाषा में मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं’

‘उर्दू संयुक्त भारतीय सभ्यता की वाहक है’, ‘उर्दू की मिठास लोगों को आशिक बना देती है’, ‘दुख दर्द को बेहतर तरीके से पेश करने का ज़रिया है उर्दू भाषा’ और सबसे बड़ी बात यह कि दिल्ली को कभी उर्दू कहते थे। यह बातें शुक्रवार शाम दिल्ली में आयोजित ‘जश्ने बहार’ …

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मुशायरे में बोले मशहूर शायर-भारत-पाक के बीच तनाव का असर कलाकारों के दौरों पर नहीं पड़ना चाहिए

नई दिल्ली- कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा दिए जाने के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बड़ गया है। भारत सरकार पर पाकिस्तान के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। लेकिन देश के शायर चाहते हैं कि राजनीति के दायरे से हटकर दोनों देशों …

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Exclusive Interview: मेरी शायरी मज़लूमों की आवाज़ है- इमरान प्रतापगढ़ी

“मैं हर रात यह सोच कर नजीब पर नज़्म पढ़ता हूं कि ये मेरी नजीब पर पढ़ी गई आखिरी नज़्म होगी और सुबह तक नजीब लौट आयेगा। लेकिन फिर सुबह उठकर अपने आंसूओं को पोछता हूं और एक बार फिर इस उम्मीद के साथ पढ़ना शुरू करता हूं कि नजीब …

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हाशिए पर पड़े लोगों के दर्द बयान करती किताब ‘आवाज़_ए_मूलनिवासी’

मौजूदा समय में 20 साल की गुरमेहर कौर को बोलने की वजह से मिल रही धमकियों के बीच 19 साल भावना मीना ने एक किताब लिखी है। आवाज़_ए_मूलनिवासी। यूँ तो अपने नाम से ही ये किताब अपने वजूद में आने का मतलब बयां कर दे रही है लेकिन फिर अभी …

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राहत इंदौरी ने पाकिस्तान दिवस पर कराची मुशायरे में शामिल होने का न्योता ठुकराया

इंदौर। हिंदुस्तान के मशहूर शायर राहत इंदौरी ने पाकिस्तान दिवस पर कराची मुशायरे में शामिल होने का न्योता ठुकरा दिया है।  ये मुशायरा  22 मार्च को आयोजित होना है ।  हालांकि  राहत इंदौरी ने अपनी मसरूफियत का हवाला देते हुए पाकिस्तान के इस कार्यक्रम में शिरकत से मना  किया है, लेकिन उनका मानना है …

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ज़िन्दगी में उतार-चढ़ाव के साथ भाषा के बैरिकेड को तोड़ कौसर बानू ने संस्कृत में जीते 2 गोल्ड मैडल

संस्कृत में 80.50 प्रतिशत अंक हासिल करने के वाली कौसर बानू को डॉ. ऐ डी शास्त्री मैडल और श्रीमद् भगवत रंगवधूत नरेश्वर मैडल से नवाज़ा गया है। एक स्कूल में पढ़ाने वाली कौसर को बीते कल वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी के कन्वोकेशन समारोह में सम्मानित किया गया। कौसर बानो …

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24 लेखक साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

दिल्ली : 24 लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया है. इन सभी को वार्षिक फेस्टिवल ऑफ लेटर्स प्रदान किए गए हैं. विजेताओं को उनकी उल्लेखनीय साहित्यिक कृतियों के लिए एक-एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया. पुरस्कार देते हुये अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि …

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युवाओं में बढ़ती क़व्वाली की लोकप्रियता

ग़ुलाम हुसैन। मौसीकि और रंगो साज़ के इस दौर में क़व्वाली आज भी अपनी रुहानि ताक़त के दम पर युवाओं को अपनी ओर खिंचतीं है। पोप और रैप के इस दौर में भी क़व्वाली योवाओं के दिल में धड़के यह क़व्वाली के प्रसंगिकता को दर्शाता है। इसका ताज़ा उदाहरण दिल्ली …

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मंदिर मस्जिद की राजनीति, देश के विकास में बाधा: शत्रुघ्न सिन्हा

कोलकाता: (सियासत उर्दू) अपनी बेबाकी के लिए मशहूर फिल्म अभिनेता और भाजपा सांसद शत्रुघन सिन्हा ने कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में आयोजित साहित्य महोत्सव में मस्जिद मंदिर की राजनीति करने वालों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि हम मानव हैं और इसके लिए काम करना हमारी नैतिक और सामाजिक …

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तस्लीमा नसरीन को अगले साल से जयपुर साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने पर बैन

जयपुर: मंगलवार को जयपुर साहित्यिक मेले के आयोजकों ने कहा की अगले साल से बांग्लादेश की विवादस्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन को मेले में आमन्त्रित नहीं किया जायेगा। सोमवार को तस्लीमा ने मेले में प्रवासी नाम के एक सेशन में भाग लिया था। उस सेशन में तस्लीमा ने सामान आचार सहिंता …

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बुक फ़ेयर में इस्लामिक सेंटर, पाएं मुफ़्त क़ुरआन और इस्लामिक साहित्य

नई दिल्ली। दिल्ली के प्रगति मैदान में वर्ल्ड बुक फेयर की शुरुआत हो चुकी है जहां इस्लामिक इन्फॉरमेशन सेंटर ने भी दस्तक दे दी है. यह सेंटर इस्लाम से जुड़ी तमाम अहम किताबें और क़ुरआन मुफ़्त में बांटता है. पिछले 2 बुक फेयर से यह सेंटर यहां लगातार आ रहा …

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उर्दू में कम होती दिलचस्पी से विश्व पुस्तक मेले में कम होते स्टाल

हबीब-उर-रहमान नई दिल्ली: विश्व पुस्तक मेले की शुरूआत शनिवार को दिल्ली के प्रगति मैदान में हो गया। इस बार मेले में तकरीबन ढ़ाई हजार के अधिक देशी और विदेशी बुक स्टाल लगाए गए है। इस बार भी अलग-अलग भाषाओं के स्टाल मौजूद है और कई नामचीन लेखकों की अदबी संग्रह …

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यूपी के लोग अगर इस किताब को पढ़ लेंगे तो भाजपा को कभी वोट नहीं करेंगे

किताब खरीदने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें If people of U.P. read this book, they will never vote for BJP. “R.S.S.-Desh ka sabse bada Aatankwadi Sangathan (Hindi)” http://www.amazon.in/dp/8172210876/

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जन्मदिन विशेष: उर्दू के विकास में नवल किशोर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता

नई दिल्ली: मुंशी नवल किशोर(3 जनवरी1836-19 फ़रवरी1895) का जन्म अलीगढ़ के एक कुलीन ब्राह्मण परिवार में सन् 3 जनवरी 1836 में हुआ था. अंग्रेजी शासन के समय के भारत के उद्यमी, पत्रकार एवं साहित्यकार थे. इनकी जिन्दगी का सफर कामयाबियों की दास्तान हैं. शिक्षा, साहित्य से लेकर उद्योग के क्षेत्र …

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नहीं आती तो याद उनकी महीनों तक नहीं आती…

भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं इलाही तर्के-उल्फत पर वो क्योंकर याद आते हैं   न छेड़ ऐ हमनशीं कैफियते–सहबा के अफसाने शराबे–बेखुदी के मुझको सागर याद आते हैं   रहा करते हैं कैदें-होश में ऐ बाए नाकामी वो दश्ते-खुद-फरामोशी के चक्कर याद आते हैं   नहीं आती …

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ग़ालिब के वो ख़त जो उन्हें अपने दौर का सबसे ज़हीन इंसान बनाता है

सौं उससे पेश-ए-आब-ए से बेदरी है (मैं झूठ बोलूं तो प्यासा मर जाऊं), शायरी को मैंने नहीं इख़्तियाया (अपनाया). शायरी ने मजबूर किया मैं उसे अपना फ़न क़रार दूं॥ यह शेर गालिब का नहीं है लेकिन ऐसा है मानो सिर्फ़ और सिर्फ़ उनके लिए ही बना हो. उन्हें याद करो …

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अनुपम मिश्र की शख्सियत: एक ताज़ियत-नामा

  आज अनुपम मिश्र जी की 69वीं की सालगिरह है. अनुपम जी साधरण जीवन जीने वाले ख़ास व्यक्ति थे, जो आज से तीन रोज़ पहले हमारे बीच से चले गए. अनुपम जी “अनुपम” थे, इसके बावजूद अक्सर हम लोग उन्हें पानी, पर्यावरण या गांधीवाद की खिड़कियों से जानने की कोशिश …

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कविता: ये बसरा के बच्चे जिन फुटपाथों पर चल रहे हैं

ये बसरा के बच्चे जिन फुटपाथों पर चल रहे हैं वहां तक खबर नहीं जाती और अगर कोई खबर चलती भी है, तो उसका मतलब सिर्फ जंग ठहरता है इन बच्चों की रेत सी पथरीली आँखों में चाँद गुम है ये, एक जंग से दूसरी जंग तक एक सरकार से …

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मोदी सरकार मे मुसलमानों के साथ एक और भेदभाव, PMO की वेबसाइट पर उर्दू में नहीं है जानकारी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया था कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट, www.pmindia.gov.in को बहुभाषी बनाया जाना चाहिए। पीएमओ वेबसाइट पर उह जानकारी पहले केवल हिंदी और अंग्रेजी में ही उपलब्ध थी । विदेश मंत्री, सुषमा …

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मौलाना आज़ाद की चाय नोशी: …….हाय कम्बख़्त, तू ने पी ही नहीं!

अब्दुल क़ादिर सिद्दीक़ी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने चाय पी और ख़ूब पी। उनकी चाय नोशी का ज़ौक़ और शौक़ लतीफ़ नहीं निहायत लतीफ़ था। चाय से उन्हें रग़बत ही नहीं इश्क़ था। जिसका वालहाना और दिलबराना अंदाज़ में इज़हार उन्होंने अपनी तहरीरों में जा-ब-जा किया है। चाय हम-आप रोज़ पीते हैं और पिलाते भी हैं। लेकिन हमारे नज़दीक चाय के बेहतर-से-बेहतर …

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