Tuesday , February 21 2017
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Literature

युवाओं में बढ़ती क़व्वाली की लोकप्रियता

ग़ुलाम हुसैन। मौसीकि और रंगो साज़ के इस दौर में क़व्वाली आज भी अपनी रुहानि ताक़त के दम पर युवाओं को अपनी ओर खिंचतीं है। पोप और रैप के इस दौर में भी क़व्वाली योवाओं के दिल में धड़के यह क़व्वाली के प्रसंगिकता को दर्शाता है। इसका ताज़ा उदाहरण दिल्ली …

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मंदिर मस्जिद की राजनीति, देश के विकास में बाधा: शत्रुघ्न सिन्हा

कोलकाता: (सियासत उर्दू) अपनी बेबाकी के लिए मशहूर फिल्म अभिनेता और भाजपा सांसद शत्रुघन सिन्हा ने कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में आयोजित साहित्य महोत्सव में मस्जिद मंदिर की राजनीति करने वालों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि हम मानव हैं और इसके लिए काम करना हमारी नैतिक और सामाजिक …

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तस्लीमा नसरीन को अगले साल से जयपुर साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने पर बैन

जयपुर: मंगलवार को जयपुर साहित्यिक मेले के आयोजकों ने कहा की अगले साल से बांग्लादेश की विवादस्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन को मेले में आमन्त्रित नहीं किया जायेगा। सोमवार को तस्लीमा ने मेले में प्रवासी नाम के एक सेशन में भाग लिया था। उस सेशन में तस्लीमा ने सामान आचार सहिंता …

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बुक फ़ेयर में इस्लामिक सेंटर, पाएं मुफ़्त क़ुरआन और इस्लामिक साहित्य

नई दिल्ली। दिल्ली के प्रगति मैदान में वर्ल्ड बुक फेयर की शुरुआत हो चुकी है जहां इस्लामिक इन्फॉरमेशन सेंटर ने भी दस्तक दे दी है. यह सेंटर इस्लाम से जुड़ी तमाम अहम किताबें और क़ुरआन मुफ़्त में बांटता है. पिछले 2 बुक फेयर से यह सेंटर यहां लगातार आ रहा …

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उर्दू में कम होती दिलचस्पी से विश्व पुस्तक मेले में कम होते स्टाल

हबीब-उर-रहमान नई दिल्ली: विश्व पुस्तक मेले की शुरूआत शनिवार को दिल्ली के प्रगति मैदान में हो गया। इस बार मेले में तकरीबन ढ़ाई हजार के अधिक देशी और विदेशी बुक स्टाल लगाए गए है। इस बार भी अलग-अलग भाषाओं के स्टाल मौजूद है और कई नामचीन लेखकों की अदबी संग्रह …

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यूपी के लोग अगर इस किताब को पढ़ लेंगे तो भाजपा को कभी वोट नहीं करेंगे

किताब खरीदने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें If people of U.P. read this book, they will never vote for BJP. “R.S.S.-Desh ka sabse bada Aatankwadi Sangathan (Hindi)” http://www.amazon.in/dp/8172210876/

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जन्मदिन विशेष: उर्दू के विकास में नवल किशोर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता

नई दिल्ली: मुंशी नवल किशोर(3 जनवरी1836-19 फ़रवरी1895) का जन्म अलीगढ़ के एक कुलीन ब्राह्मण परिवार में सन् 3 जनवरी 1836 में हुआ था. अंग्रेजी शासन के समय के भारत के उद्यमी, पत्रकार एवं साहित्यकार थे. इनकी जिन्दगी का सफर कामयाबियों की दास्तान हैं. शिक्षा, साहित्य से लेकर उद्योग के क्षेत्र …

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नहीं आती तो याद उनकी महीनों तक नहीं आती…

भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं इलाही तर्के-उल्फत पर वो क्योंकर याद आते हैं   न छेड़ ऐ हमनशीं कैफियते–सहबा के अफसाने शराबे–बेखुदी के मुझको सागर याद आते हैं   रहा करते हैं कैदें-होश में ऐ बाए नाकामी वो दश्ते-खुद-फरामोशी के चक्कर याद आते हैं   नहीं आती …

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ग़ालिब के वो ख़त जो उन्हें अपने दौर का सबसे ज़हीन इंसान बनाता है

सौं उससे पेश-ए-आब-ए से बेदरी है (मैं झूठ बोलूं तो प्यासा मर जाऊं), शायरी को मैंने नहीं इख़्तियाया (अपनाया). शायरी ने मजबूर किया मैं उसे अपना फ़न क़रार दूं॥ यह शेर गालिब का नहीं है लेकिन ऐसा है मानो सिर्फ़ और सिर्फ़ उनके लिए ही बना हो. उन्हें याद करो …

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अनुपम मिश्र की शख्सियत: एक ताज़ियत-नामा

  आज अनुपम मिश्र जी की 69वीं की सालगिरह है. अनुपम जी साधरण जीवन जीने वाले ख़ास व्यक्ति थे, जो आज से तीन रोज़ पहले हमारे बीच से चले गए. अनुपम जी “अनुपम” थे, इसके बावजूद अक्सर हम लोग उन्हें पानी, पर्यावरण या गांधीवाद की खिड़कियों से जानने की कोशिश …

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कविता: ये बसरा के बच्चे जिन फुटपाथों पर चल रहे हैं

ये बसरा के बच्चे जिन फुटपाथों पर चल रहे हैं वहां तक खबर नहीं जाती और अगर कोई खबर चलती भी है, तो उसका मतलब सिर्फ जंग ठहरता है इन बच्चों की रेत सी पथरीली आँखों में चाँद गुम है ये, एक जंग से दूसरी जंग तक एक सरकार से …

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मोदी सरकार मे मुसलमानों के साथ एक और भेदभाव, PMO की वेबसाइट पर उर्दू में नहीं है जानकारी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया था कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट, www.pmindia.gov.in को बहुभाषी बनाया जाना चाहिए। पीएमओ वेबसाइट पर उह जानकारी पहले केवल हिंदी और अंग्रेजी में ही उपलब्ध थी । विदेश मंत्री, सुषमा …

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मौलाना आज़ाद की चाय नोशी: …….हाय कम्बख़्त, तू ने पी ही नहीं!

अब्दुल क़ादिर सिद्दीक़ी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने चाय पी और ख़ूब पी। उनकी चाय नोशी का ज़ौक़ और शौक़ लतीफ़ नहीं निहायत लतीफ़ था। चाय से उन्हें रग़बत ही नहीं इश्क़ था। जिसका वालहाना और दिलबराना अंदाज़ में इज़हार उन्होंने अपनी तहरीरों में जा-ब-जा किया है। चाय हम-आप रोज़ पीते हैं और पिलाते भी हैं। लेकिन हमारे नज़दीक चाय के बेहतर-से-बेहतर …

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राहत इन्दौरी की ग़ज़ल: “मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ”

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ मैने देखा है ज़माने को शराबें पी कर दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ दिल का …

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जन्म-दिन विशेष: देश का “क़ौमी तराना” लिखने वाले अल्लामा इक़बाल थे आधुनिक युग के महान शाइर

अल्लामा मोहम्मद इक़बाल का जन्म आज ही की तारीख़ यानी 9 नवम्बर 1877 को हुआ था. इक़बाल को हिन्दुस्तान के सबसे मशहूर शाइरों में शुमार किया जाता है. आधुनिक उर्दू शाइरी के निर्माता के तौर पर भी लोग उन्हें जानते हैं. “अविभाजित भारत” क उर्दू और फ़ारसी में इनकी शायरी …

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निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ल: “मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये”

जब किसी से कोई गिला रखना सामने अपने आईना रखना यूँ उजालों से वास्ता रखना शम्मा के पास ही हवा रखना घर की तामीर चाहे जैसी हो इस में रोने की जगह रखना मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना मिलना जुलना जहाँ ज़रूरी हो मिलने-जुलने …

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साहिर की ग़ज़ल: “ख़ुद्दारियों के ख़ून को अर्ज़ां ना कर सके”

ख़ुद्दारियों के ख़ून को अर्ज़ां ना कर सके हम अपने जौहरों को नुमायाँ ना कर सके होकर ख़राब-ए-मै तेरे ग़म तो भुला दिए लेकिन ग़म-ए-हयात को दरमाँ ना कर सके टूटा तिलिस्म-ए-अहद-ए-मोहब्बत कुछ इस तरह फिर आरज़ू की शम्म’आ फ़रोज़ाँ ना कर सके हर शै क़रीब आके कशिश अपनी खो …

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मोदी को मुसलमानों की फरयाद सुनाई नहीं देती: मुनव्वर राना

वाराणसी: मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध बनाने की वकालत करते हुए कहा कि भारत को संगीत, साहित्य और कला के आदान प्रदान के लिए दरवाजे खुले रखने चाहिए. उर्दू और फारसी के विशेषज्ञ स्वर्गीय डॉ अमृत लाल इशरत मधुक की 86 वीं जयंती पर वाराणसी …

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बशीर बद्र की ग़ज़ल: “आ चाँदनी भी मेरी तरह जाग रही है”

आ चाँदनी भी मेरी तरह जाग रही है पलकों पे सितारों को लिये रात खड़ी है ये बात कि सूरत के भले दिल के बुरे हों अल्लाह करे झूठ हो बहुतों से सुनी है वो माथे का मतला हो कि होंठों के दो मिसरे बचपन की ग़ज़ल ही मेरी महबूब …

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इरफ़ान सत्तार की ग़ज़ल: “ख़ुश-मिज़ाजी मुझ पे मेरी बे-दिली का जब्र है”

ख़ुश-मिज़ाजी मुझ पे मेरी बे-दिली का जब्र है शौक़-ए-बज़्म-आराई भी तेरी कमी का जब्र है कौन बनता है किसी की ख़ुद-सताई का सबब अक्स तो बस आईने पर रौशनी का जब्र है ख़्वाब ख़्वाहिश का अदम इस बात का ग़म विसाल का ज़िंदगी में जो भी कुछ है सब किसी …

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