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अंधा कानून !! बालूमाथ मामले में कोर्ट ने बिना गवाहों के ब्यान सुने दी सभी आरोपियों को जमानत

झारखंड: 18 मार्च, 2016 को झारखंड के लातेहार जिले में हुए दो मुस्लिम पशु व्यापारी हत्याकांड से जुड़े 8 आरोपियों को झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है और सभी आरोपी जेल से बाहर आ चुके हैं। आपको बता दें कि यह घटना लातेहार जिले झावर गांव में हुई थी जहां दोनों व्यापारियों की हत्या कर उनका शव पेड़ से लटका दिया गया था। आरोपियों के जेल से बहार आ जाने पर पीड़ित परिवारों में डर का माहौल बन गया है। मारे गए मजलूम अंसारी के भाई का कहना है कि कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिमों को न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा करने के मामले में कमी साफ़ नजर आती है। इस फैसले का उनके परिवार पर बहुत ही गहरा असर पड़ा है जिस वजह से उनका पूरा परिवार सदमे में है। हमें लगता था की मामले की कार्रवाई के दौरान गवाहों को कोर्ट में पेश होने के लिए बुलाया जाएगा जबकि कोर्ट ने ऐसा बिलकुल नहीं किया और सभी आरोपी सीधा जेल से बाहर आ गए। उनका कहना है कि मैं इस मामले में मुख्य गवाह हूँ। इसलिए परिवार वाले डरे हुए हैं कि ये लोग किसी न किसी तरह से मुझे भी नुकसान पहुंचा सकते है।

इस मामले में आरोपियों के वकील अरविंद नाथ शहदेव के मुताबिक़ इस केस में शुरू से ही कोई दम नहीं था। इन आरोपियों को इस लिए जमानत मिली है क्योंकि पुलिस उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत या गवाह अदालत के सामने पेश नहीं कर पाई। इस मामले के कोई भी चश्मदीद गवाह न होने के कारण पुलिस ने मेरे मुवक्किलों को हिरासत में लेकर और अपने हिसाब से मनगड़ंत बयान दिलवा लिया जोकि कोर्ट में नहीं चल सकता था। वहीँ एक स्थानीय वकील मोहन सिंह का मानना है कि यह केस बालुमाथ पुलिस के कारण बिगड़ा है। मोहन सिंह कहते हैं, ‘अदालत ने सभी आरोपियों को जमानत दी है क्योंकि पुलिस के द्वारा इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया. पुलिस ने इस मामले को इतना कमजोर कर दिया था इसलिए ऐसा होना स्वाभाविक था।

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