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अंसारी परिवार जिसको सभी सेक्यूलर पार्टियों ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया

एम.ए.अंसारी परिवार जिसने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था और देश की आजादी में अपना अहम योगदान दिया था. मुख्तार अंसारी उसी परिवार से आते है और अपनी दबंगई के कारण पूर्वांचल में राविन हुड के अंदाज में मशहूर है. पूर्वांचल में पहले उनका परिवार कम्यूनिस्ट पार्टी को स्थापित किया और विधानस सभा की गाजीपुर सीट कम्युनिस्टों की झोली में डाल दिया.

ये एक ऐतिहसिक दौर की शुरुआत थी सवर्णों के खिलाफ पिछड़ी जातियों के गोलबंदी की और पिछड़ों सामाजिक लड़ाई की. दौर बदला पूरे देश में मंडल और कमंडल की राजनीति शुरु हुई, बाबरी मस्जिद गिरा दी गई पूरे देश में साम्प्रदायिक हिंसा आग में झोंक दिया गया लेकिन गाजीपुर-बनारस मंडल मे अंसारी परिवार के वर्चस्व का नतीजा था ये शहर इससे अछूता रहा.

वक्त की नजाकत और मुस्लिम वोट को लामबंद करने के लिए नेताजी मुलायम सिंह ने पूरे प्रदेश में समाजवादी आंदोलन की शुरुआत की, मुसलमानों को उनकी हिफाजत और अधिकार दिलाने का भरोसा देकर गांव-गांव साईकिल से घूमें. अंसारी परिवार ने नेताजी की छवि और उनके साफ नियत से प्रभावित होकर समाजवादी पार्टी को पूर्वांचल मे स्थापित करवानें में अहम योगदान दिया. फिर आम चुनावों में गाजीपुर की संसदीय सीट सपा की झोली में गई और विधानसभा की गाजीपुर, बलिया, बनारस, मऊ, चंदौली जिलों की दो दर्जन सीटों को पर समाजवादियों का कब्जा हो गया. मुख्तार अंसारी ने सवर्ण दबंगई और संघ के साम्प्रदायिक खेल का खात्मा कर दिया और ये अराजक तत्व अल्पमत में आ गये.

सियासत बदली और जमाना तेजी बदला अंसारी भाईयों पर मऊ दंगे का इलजाम लगा कर जेल में डाल दिया गया अफजाल अंसारी बरी हो गए और मुख्तार अंसारी पर कई आपराधिक मुकदमें होने की वजह से जमानत नहीं मिल पाई. नेताजी ने अपने हाथ अंसारी बंधुओं से खीच लिए जिसकी वजह से सपा के सांसद होते हुए भी पार्टी व्हीप के खिलाफ जाकर संसद मे अफजाल अंसारी ने भारत-अमेरिका परमाणु करार पर क्रास वोटिंग किया. अंसारी परिवार के सभी लोगों को अमर सिंह के दबाव में नेताजी ने पार्टी से बाहर कर दिया.

2009 के आम चुनावों में बसपा ने मुख्तार अंसारी को बनारस संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया और जैसा कि आप सब लोग जानते है कि जेल मे रह कर ही इस दबंग ने मुरली मनोहर जोशी की हालत खराब कर दी और वो हारते-हारते बचे. बहन जी ने भी इसके बाद किनारा कर लिया और अंसारी भाईयों ने कौमी एकता दल बना कर 2012 चुनाव मे मऊ सदर और गाजीपुर की मुहम्मदाबाद सीट पर विरोधियों की जमानत जब्त करवा दिया.

लगभग एक दर्जन सीटों पर कौमी एकता दल के उम्मीदवारों ने दमदारी से चुनाव लड़ा जिसका अंदाजा सपा-बसपा को गया और मौजूदा चुनाव में नेताजी ने अंसारी परिवार को अपने पाले में लाने कवायद शुरु किया. अखिलेश यादव के ब्रहाम्णवादी मैनेजमेंट ने इसको सफल नहीं होने दिया लिहाजा बहन जी ने इस मौके का फायदा उठाकर अंसारी परिवार को तीन सीटों पर दावेदारी दे दिया.
बीता हुआ वक्त गवाह है कि कैसे राजनैतिक पार्टियों ने अंसारी परिवार का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया और सरकार में कोई पद भी कभी नहीं दिया. आगे देखिये राजनिति का ऊंट किस करवट बैठता है और पूर्वांचल की राजनिति मे इस परिवार का कहां तक असर होता है
अली ज़ाकिर
ये लेखक के अपने विचार है, जरुरी नहीं है सियासत इस लेख के विचारों से सहमत हों

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