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अकड़ न दिखाए भारत, वर्ना किसी और को दे देंगे गैस फील्ड : ईरान

तेहरान : ईरान ने भारत को घुड़की देते हुए कहा है कि वो फरजाद बी गैस फील्ड में काम किसी और देश की कंपनी को दे देगा, इसलिए भारत उसके सामने अकड़ न दिखाए। वो पहले से ही भारतीय रुपए में लेन-देन करके घाटा झेल रहा है। दरअसल, कुछ दिन पहले भारत ने ईरान को चेतावनी भी दी थी, साथ ही उससे क्रूड ऑयलखरीदने में कमी करने की धमकी थी। हालांकि बाद में भारत ने ईरान से बिगड़े मामले को सुलझाने के लिए 11 बिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट का प्रस्ताव भी दिया है, पर अब ईरान ने अकड़ दिखाते हुए कहा है कि जिस गैस फील्डको ईरान और भारत सरकार की कंपनी ने मिलकर खोजा है, उसमें से गैस निकालने के काम वो दूसरे देश को दे सकता है। उसने कहा कि ईरान भारत के साथ ही गैस फील्ड में काम करने के लिए बाध्य नहीं है। इसके साथ ही मई में ईरान ने गैस निकालने के लिए रूसी कंपनी से समझौता भी कर लिया।

ये मामला ईरान के फरजाद-बी गैस फील्ड का है। इस गैस फील्ड की खोज भारतीय कंपनियों ने की थी। इसपर उन्होंने रिसर्च भी किया। अब ईरान कह रहा है कि वो इस गैस फील्ड में भारत के साथ काम करने को लेकर मजबूर नहीं है। इसके पीछे ईरान का तर्क है कि भारतीय सरकारी कंपनियों के साथ समझौता गैस फील्ड की खोज, रिसर्च के लिए था, जो अब पूरा हो चुका है। इस समझौते में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि वो भारतीय कंपनियां ही इस गैस फील्ड का विकास करके गैस निकालने का काम करेंगी। इसके साथ ही उसने रूसी गेजप्रोम ऑयल कंपनी के साथ शुरुआती समझौता भी कर लिया। जबकि भारत सरकार ने ईरान के सामने 11 बिलियन डॉलर का निवेश कर फरजाद-बी गैस फील्ड के डेवलपमेंट का भी प्रस्ताव रखा था।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति हसन रौहानी के बीच पिछले साल इस गैस फील्ड को लेकर बातचीत भी हुई थी। पर दोनों ही देश इस डील को लेकर आगे नहीं बढ़ पाए। ईरान के मजलिस एनर्जी कमीशन के प्रवक्ता असदोल्लाह घरेखानी ने कहा कि पहले जो समझौता हुआ, वो फरजाद-बी गैस फील्ड में रिसर्च का समझौता था, जो अब पूरा हो चुका है। उस समझौते में ये कहीं नहीं था कि गैस निकालने का कॉन्ट्रैक्ट भी भारत को दिया जाएगा। हम अपने फायदे के मुताबिक दूसरा साथी भी ढूंढ सकते हैं।

ईरान के पार्लियामेंट्री एनर्जी कमीशन के प्रमुख ने कहा कि ईरान किसी और ग्राहक को गैस-फील्ड से गैस निकालने के लिए ढूंढ लेगा, जिससे उसके हितों की रक्षा होगी। हालांकि भारत हमेशा से ईरान के साथ खड़ा रहा है। वो अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद द्विपक्षीय संबंधों को ईरान के साथ बढ़ाता रहा है। इसके बावजूद ईरान का बदला रवैया भारत को हैरान करने वाला है।

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