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अकबर ओवैसी को धक्का, हाइकोर्ट में दरख़ास्त मुस्तर्द

हैदराबाद 20 जुलाई: मजलिस के फ़्लोर लीडर अकबर ओवैसी को आज ज़बरदस्त धक्का लगा जब आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट ने उनकी मुबय्यना इश्तिआल अंगेज़-ओ-नफ़रतअंगेज़ तक़रीर पर मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर मुक़द्दमात दर्ज ना करने के लिए उनकी एक दरख़ास्त को मुस

हैदराबाद 20 जुलाई: मजलिस के फ़्लोर लीडर अकबर ओवैसी को आज ज़बरदस्त धक्का लगा जब आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट ने उनकी मुबय्यना इश्तिआल अंगेज़-ओ-नफ़रतअंगेज़ तक़रीर पर मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर मुक़द्दमात दर्ज ना करने के लिए उनकी एक दरख़ास्त को मुस्तरद कर दिया।

अदालत ने ये वाज़िह कर दिया कि अगरचे मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर उनके ख़िलाफ़ अलग अलग एफ़ आई आर दर्ज किए गए हैं लेकिन एक ही तहक़ीक़ाती एजेंसी ही अकबर ओवैसी की मुबय्यना नफ़रतअंगेज़ तक़ारीर की तहक़ीक़ात करेंगी।

अदालत ने रियास्ती पुलिस को हिदायत की है के वो तमाम मुक़द्दमात को यकजा करते हुए सी आई डी के ज़रिये तहक़ीक़ात करवाए। वाज़िह रहे कि दिसम्बर 2012 के दौरान अकबर ओवैसी ने आदिलाबाद में मुबय्यना तौर पर दुसरे मज़ाहिब के ख़िलाफ़ नफ़रत पर मबनी तक़रीर के ज़रिये इश्तिआल अंगेज़ी को हवा दी थी, जिस के ख़िलाफ़ मुख़्तलिफ़ शिकायतों की बुनियाद पर उन्हें 8 जनवरी को गिरफ़्तार करते हुए निर्मल जेल में रखा गया था और 16 फरवरी को 5 बजे शाम रिहाई अमल में आई थी।

अकबर ओवैसी के ख़िलाफ़ अवाम के मुख़्तलिफ़ तबक़ात के दरमियान मुनाफ़िरत फैलाने और हत्ताके मुल्क के ख़िलाफ़ जंग छेड़ देने, बग़ावत-ओ-सरकशी की फ़ौजदारी दफ़आत के तहत मुक़द्दमात दर्ज हैं।

जस्टिस रमेश रंगनाथन ने अकबर ओवैसी की दरख़ास्त मुस्तरद करते हुए कहा कि अदालत को इस बात का जायज़ा लेना होगा कि आया दरख़ास्त गुज़ार के ख़िलाफ़ दर्ज तमाम एफ आई आर यकसाँ होने की तमानियत(भरोसा) है यह नहीं और इस के बाद ही दस्तूर की दफ़ा 226 यह हिन्दुस्तान फ़ौजदारी क़वानीन के ताज़ीरी ज़ाबता की दफ़ा 482 के तहत राहत पहूँचाने के लिए वो (अदालत ) अपने इख़्तयारात के इस्तेमाल पर ग़ौर कर सकती है।

अदालत के लिए ये नामुनासिब होगा कि इन (अकबर ओवैसी ) के ख़िलाफ़ कोई मुक़द्दमा दर्ज ना करने के लिए पुलिस को क़तई हुक्म दे दिया जाये।

जज ने अकबर ओवैसी की दरख़ास्त मुतनाज़ा एम एफ हुसैन मरहूम के अलावा टामिल , तेलुगू और मलयाली फिल्मों की अदाकारा ख़ुशबू के मुक़द्दमात का हवाला दिया और कहा कि एक ही वाक़िये पर कई एफ आई आर से निमटने के लिए फ़ौजदार ताज़ीरी ज़ाबता में गुंजाइश का फ़ुक़दान(कमी) है।

इस ज़िमन में कई दूसरों को भी एम एफ हुसैन और ख़ुशबू जैसे हालात का सामना होसकता है। अदालत ने इस तास्सुर का इज़हार किया। इस ज़िमन में मुक़न्निना को चाहीए कि वो मुल्ज़िम के ख़िलाफ़ एफ आई आर में दर्ज करदा तमाम इल्ज़ामात की वाहिद तहक़ीक़ाती इदारा के ज़रीये तहकीकात को यक़ीनी बनाएं।

यहां ये बात काबिल-ए-ज़िकर है के अकबर ओवैसी को आदिलाबाद की निर्मल जेल में तकरीबन 40 रोज़ा हिरासत के बाद अदालत के अहकाम पर 16 फरवरी को मशरूत ज़मानत पर रहा किया गया था।

उन्हें पासपोर्ट हवाले करने की हिदायत की गई थी ताहम अकबर ओवैसी ने बादअज़ां अदालत से रुजू होते हुए इस्तिदा-ए-की थी कि उन्हें ईलाज के लिए बैरून मुल्क के सफ़र की सहूलत फ़राहम की जाये और इस मक़सद के लिए इन का पासपोर्ट वापिस किया जाये । इस दरख़ास्त कुबूल करते हुए अदालत ने अकबर ओवैसी का पासपोर्ट हवाले करने का हुक्म जारी किया था।

अदालत से ये राहत के मिलने पर अकबर ओवैसी हाल ही में बैरूनी मुल्क का सफ़र करचुके हैं और चंद हफ़्ते पहले ही हैदराबाद वापिस हुए हैं।

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