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अकबर ओवैसी हमला केस: असलाह गोला बारूद दूकान के मालिक पर जरह

हैदराबाद 18 अगस्त: अकबरुद्दीन ओवैसी हमला केस की समाअत के दौरान असलाह-ओ-गोला बारूद दुकान के प्रोप्रिएटोर पर वकील दिफ़ा ने जरह किया जिसमें ये बात का इन्किशाफ़ हुआ कि असलाह-ओ-गोला बारूद से मुताल्लिक़ असली रजिस्टर पुलिस के हवाले नहीं किया गया। आर्मरी के प्रोप्रिएटोर ग़ुलाम अबदुलक़ादिर जो इस केस के गवाह नंबर 25 हैं ने साबिक़ में अपना बयान सातवें एडिशनल मेट्रोपोलिटन सेशन जज के मीटिंग पर कलमबंद करवाया था जिसके नतीजे में वुकला दिफ़ा एडवोकेट जी गुरु मूर्ती , एडवोकेट राज वर्धन रेड्डी और एडवोकेट अहमद अली ने उन पर जरह किया।

समाअत के दौरान एडवोकेट गुरु मूर्ती ने गवाह से सवाल किया कि अबदुल्लाह बिन यूनुस याफ़ई जो इस केस के मुल्ज़िम नंबर 3 हैं ने उनकी दूकान से असलाह ख़रीदा था जिसका एक रजिस्टर मौजूद होता है, जिसमें असलाह ख़रीदने वाले की दस्तख़त मौजूद होती है। क्या इस रजिस्टर की असली कापी पुलिस के हवाले की गई।

गवाह ने बताया कि उन्होंने सिर्फ रजिस्टर की नक़ल पुलिस के हवाले की है और असली रजिस्टर उनके क़बज़े में मौजूद है। वकील दिफ़ा ने ये सवाल किया कि हमले के बाद किस ने उनका बयान कलमबंद किया था जिसके जवाब में गवाह ने बताया कि सादा लिबास में मलबूस बाज़ पुलिस ओहदेदारों ने उनका बयान कलमबंद किया था और इस दौरान पुलिस ने उनसे असली रजिस्टर हवाले करने के लिए नहीं कहा।

गवाह ने जरह के दौरान ये भी बताया कि असलाह के हथियारों से मुताल्लिक़ उन्हें कुछ ख़ास तजुर्बा नहीं है चूँकि उन्होंने सिर्फ बी काम की डिग्री हासिल की है। वकील दिफ़ा ने गवाह से ये दावा किया कि वो अदालत में झूटा बयान दे रहे हैं और असली रिकार्ड पुलिस के हवाले ना करने का कोई ठोस जवाब मौजूद नहीं है। समाअत के मौके पर मुहम्मद बिन उम्र याफ़ई अल-मारूफ़ मुहम्मद पहलवान और उनके दुसरे अरकाने ख़ानदान को सख़्त सेक्यूरिटी के बीच नामपल्ली क्रीमिनल कोर्ट लाया गया और इस केस की अगली समाअत 19 अप्रैल को मुक़र्रर की गई है।

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