Wednesday , October 18 2017
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अकलियती तक़र्रुरात-ओ-दाख़िले मज़ीद अहकाम ज़रूरी

आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट ने आज ये वाज़िह कर दिया कि अक़लीयतों केलिए 4.5 फीसद ज़ेली कोटा के तहत सरकारी ख़िदमात में किसी भी तक़र्रुरात यह मर्कज़ी तालीमी इदारों में दाख़िले केलिए मज़ीद अहकाम अहम शर्त होंगे । चीफ जस्टिस मदन बी लोकूर और

आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट ने आज ये वाज़िह कर दिया कि अक़लीयतों केलिए 4.5 फीसद ज़ेली कोटा के तहत सरकारी ख़िदमात में किसी भी तक़र्रुरात यह मर्कज़ी तालीमी इदारों में दाख़िले केलिए मज़ीद अहकाम अहम शर्त होंगे । चीफ जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस पी वे संजय कुमार ने पसमांदा तबक़ात के एक लीडर आर करशनया की तरफ़ से इस मसला पर चैलेंज करते हुए पेश करदा दरख़ास्त पर समाअत के दौरान ये रोलिंग दी जिस में दीगर पसमांदा तबक़ात के कोटा के तहत मुस्लमानों को 4.5 फीसद तहफ़्फुज़ात दीए गए थे ।

इस दौरान हाईकोर्ट ने शहर के एक नेट वर्क तजज़िया निगार की दरख़ास्त को मुस्तर्द कर दिया जिस में इस ने फेसबुक के इस्तिमाल कुनन्दिगान की शख़्सी तफ़सीलात को राज़दारी में रखने केलिए इस इदारा ( फेसबुक ) से अपने मेकानिज़म का ऐलान करने की अपील की थी। चीफ जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस पी वी संजय कुमार पर मुश्तमिल बंच ने दरख़ास्त गुज़ार प्रदीप कुमार मानव कुंडा से दरयाफ़त किया कि ,

आया उन्हों ने इस ज़िमन में फेसबुक इंतिज़ामीया से अपनी शिकायात पर नुमाइंदगी की थी और जब दरख़ास्त गुज़ार ने नफ़ी में जवाब दिया तो बंच ने इस दरख़ास्त को इस बुनियाद पर मुस्तर्द कर दिया कि अगर फेसबुक से कोई नुमाइंदगी ही नहीं की गई तो इस को किस तरह हिदायत की जा सकती है ।

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