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अक़लीयती बहबूद में नया तनाज़ा, डायरेक्टर के अख़्तियारात में कटौती?

हुकूमत का कोई भी महकमा मुक़र्ररा क़वाइद और ज़वाबत के तहत चलता है लेकिन महकमा अक़लीयती बहबूद में सिर्फ आला ओहदेदारों की मर्ज़ी चलती है और उन्हें क़वाइद और ज़वाबत की कोई परवाह नहीं।

महकमा अक़लीयती बहबूद के तहत कई फ़लाही और तरक़्क़ीयाती स्कीमात रूबा-ए-अमल लाई जाती हैं जिसकी निगरानी के लिए 1993 में अलाहिदा अक़लीयती कमिशनेरीएट क़ायम किया गया जिसकी ज़िम्मेदारी तमाम अक़लीयती इदारों की स्कीमात पर अमल आवरी का जायज़ा लेना और ज़रूरत के मुताबिक़ बजट की इजराई है। बाद में कमिशनेरीएट को डायरेक्टोरेट में तबदील कर दिया गया लेकिन फ़राइज़ और ज़िम्मेदारियाँ वही बरक़रार रखी गईं।

लेकिन अफ़सोस कि अक़लीयती बहबूद के डायरेक्टर के अख़्तियारात को कम करने के लिए सेक्रेट्री अक़लीयती बहबूद ने बाक़ायदा मेमो जारी कर दिया। मेमो की इजराई तमाम अक़लीयती इदारों के लिए हैरत का बाइस रही क्योंकि ये अहकामात 1993 और 1996 के सरकारी अहकामात की ख़िलाफ़वर्ज़ी थी।

बताया जाता है कि डायरेक्टर अक़लीयती बहबूद एम जे अकबर ने मुख़्तलिफ़ स्कीमात पर मोअस्सर अमल आवरी के लिए ख़ुसूसी दिलचस्पी लेते हुए अक़लीयती इदारों से वक़्तन फ़वक़्तन बजट के ख़र्च के बारे में रिपोर्ट तलब की जो उनके फ़राइज़ में शामिल हैं।

उन्होंने अक़लीयती फ़ीनानस कारपोरेशन में बजट के ख़र्च और बाअज़ दीगर फ़ैसलों के बारे में वज़ाहत तलब की जिससे मुबैयना तौर पर नाराज़ हो कर सेक्रेट्री अक़लीयती बहबूद ने 18 जनवरी को मेमो जारी कर दिया जिसमें कहा गया कि अक़लीयती फ़ीनानस कारपोरेशन ख़ुदमुख़्तार इदारा है और वो आज़ादाना तौर पर ख़िदमात अंजाम देगा।

इस मकतूब के ज़रीए सेक्रेट्री ने डायरेक्टर अक़लीयती बहबूद को अक़लीयती फ़ीनानस कारपोरेशन के मुआमलात में मुदाख़िलत से रोक दिया। सेक्रेट्री के अहकामात के जवाब में डायरेक्टर अक़लीयती बहबूद का मकतूब ना सिर्फ अक़लीयती बहबूद बल्कि चीफ़ मिनिस्टर के दफ़्तर तक हलचल पैदा कर चुका है।

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