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अक़लीयती मालीयाती कारपोरेशन के 55.47 करोड़ रूपयों का क्या हुआ ?

गुज़िश्ता साल अक्टूबर में ही अक़लीयती मालीयाती कारपोरेशन की जानिब से गरीब अक़लीयती तलबा की स्कॉलरशिप्स के लिए विजया बैंक की मुख़्तलिफ़ ब्रांचों में जमा कसीर रक़म में से ओहदेदारों की साज़बाज़ और जालसाज़ी के ज़रीए 55.47 करोड़ रुपय

गुज़िश्ता साल अक्टूबर में ही अक़लीयती मालीयाती कारपोरेशन की जानिब से गरीब अक़लीयती तलबा की स्कॉलरशिप्स के लिए विजया बैंक की मुख़्तलिफ़ ब्रांचों में जमा कसीर रक़म में से ओहदेदारों की साज़बाज़ और जालसाज़ी के ज़रीए 55.47 करोड़ रुपये निकाल लिए गए थे और इस स्क़ैम ने सारे हिंदुस्तान में एक हल-चल सी पैदा कर दी थी।

मीडिया ने सब से पहले इस स्क़ैम का पर्दा फ़ाश करते हुए गरीब तलबाकी स्कॉलरशिप्स के लिए मुख़तस रक़म हड़पने वाले धोकेबाज़ों की नींद हराम कर दी थी और सी बी सी आई डी तहकीकात के साथ ही चार मुल्ज़िमीन बाशमोल वन कार्ड सर्विस के मैनेजिंग डायरेक्टर चन्दोरी वेंकट कोटि साई कुमार नंदौरी वी नक्टा रमन , बोन्डाडा केवा राव और विजया बैंक के एक ओहदेदार विजए सागर को गिरफ़्तार कर लिया था जब कि इस स्क़ैम के मंज़रे आम पर आने के साथ ही उस वक़्त के मैनेजिंग डायरेक्टर रियासती अक़लीयती फ़ाइनेन्स कारपोरेशन इलियास रिज़वी ने ज़मानत क़ब्ल अज़ गिरफ़्तारी हासिल करली।

दूसरी जानिब हुकूमत ने इस धोका दही और रक़म के ख़िर्द बुर्द पर इलियास रिज़वी , लियाकत अली जेनरल मैनेजर और शेख अहमद अली अकाउंट ऑफीसर को मुअत्तल कर दिया था। दिलचस्पी की बात ये है कि उस वक़्त के महकमा अक़लीयती बहबूद के सेक्रेट्री दाना किशोर की दरख़ास्त पर शुरू कर्दा सी बी सी आई डी ने इलियास रिज़वी पर विजया बैंक की ब्रांचेस में 80 करोड़ रुपये सरकारी रक़म फिक्स्ड डिपाज़िट करवाते हुए 80 लाख रुपये का कमीशन हासिल करने का इल्ज़ाम आइद किया।

अब पता चला है कि तमाम मुल्ज़िमीन आज़ादी से घूम फिर रहे हैं हद तो ये है कि इलियास रिज़वी , लियाकत अली और शेख अहमद अली मुअत्तल रहते हुए भी 75 फ़ीसद तनख़्वाह हासिल कर रहे हैं जब कि उन लोगों ने अपनी मुअत्तली के 6 माह तक हर माह 50 फ़ीसद तनख़्वाह हासिल की है । जनाब एम ए वहीद को जब अक़लीयती फ़ाइनेन्स कारपोरेशन का मैनेजिंग डायरेक्टर मुक़र्रर किया गया।

अब देखना ये है कि अहमद नदीम इस मुआमला में क्या इक़दामात करते हैं और सी आई डी किस क़दर संजीदा तहकीकात के ज़रीए मुल्ज़िमीन को कैफ़ुर किरदार तक पहुंचाती है । अब हुकूमत की ज़िम्मेदारी है कि तमाम हक़ायक़ अवाम के सामने लाते हुए मुल्ज़िमीन को चाहे वो कितने ही बाअसर क्यों ना हों इबरतनाक सज़ाएं दे ताकि दुबारा कोई ओहदेदार और जल्द अरबपति बनने के ख़ाहां अनासिर अक़लीयतों के लिए मुख़तस रक़म हड़पने की हिम्मत ना कर सकें।

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