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अक़ल्लीयती मालीयाती कारपोरेशन की कारकर्दगी पर वाईट पेपर जारी करने का मुतालिबा

हैदराबाद ।२६। जुलाई : ( प्रैस नोट ) : अक़ल्लीयती फ़ीनानस कारपोरेशन में स्कालरशिप की मंज़ूरी के तरीका-ए-कार में तबदीलीयों के मनमानी तरीक़ा से तलबा-ए-तालिबात को सख़्त दुशवारीयों का सामना करना पड़ रहा है । सदर अंबेडकर नैशनल कांग्रेस न

हैदराबाद ।२६। जुलाई : ( प्रैस नोट ) : अक़ल्लीयती फ़ीनानस कारपोरेशन में स्कालरशिप की मंज़ूरी के तरीका-ए-कार में तबदीलीयों के मनमानी तरीक़ा से तलबा-ए-तालिबात को सख़्त दुशवारीयों का सामना करना पड़ रहा है । सदर अंबेडकर नैशनल कांग्रेस नवाब मुहम्मद काज़िम अली ख़ां ने अक़ल्लीयती मालीयाती कारपोरेशन की कारकर्दगी के ताल्लुक़से एक वाईट पेपर जारी करने का मुतालिबा किया है ।

उन्हों ने कहा कि इन को ये शिकायात मिली हैं कि बेशतर तलबा तालिबात को मर्कज़ी स्कालरशिप दो दो साल से अदा नहीं किए गए हैं जब कि इन उम्मीदवारों ने तमाम ज़रूरी कार्यवाईयों की तकमील भी करदी है । जिस में इन को कई तकालीफ़ का सामना करना पड़ रहा है ।

उन्हों ने कहा कि फ़ीनानस कारपोरेशन ने सिस्टम में बाक़ायदगी के नाम पर जो तरीका-ए-कार इख़तियार किया है वो तलबा-ए-तालिबात के लिए सूदमंद नहीं है और ऐसा महसूस होता है कि स्कालरशिप की स्कीम को बतदरीज ख़तन करने या कमज़ोर करने के लिए मौजूदा तरीका-ए-कार इख़तियार किया गया है । अगर हुकूमत वाक़ई इस मुआमला में संजीदा है तो इस को स्कालरशिप स्कीम की अमल आवरी का वक्ता फ़ौक़ता जायज़ा लेते हुए सिस्टम की ख़राबियों को दूर करना चाहिए ना कि इस्लाह के नाम पर दुशवारीयों में और भी इज़ाफ़ा किया जाय ।

नवाब मुहम्मद काज़िम अली ख़ां ने कहा कि माज़ी में स्कालरशिप की मंज़ूरी और इजराई का जो तरीका-ए-कार था वो उम्मीदवारों के लिए सूदमंद साबित हो रहा था लेकिन जब से ऑनलाइन दरख़ास्तें वसूल की जा रही हैं तो मुश्किलात में इज़ाफ़ा होगया है । फ़ार्म की हार्ड कापी दाख़िल करने के बाद उस की रसीद जारी नहीं की जाती और टोकन नंबर को ही काफ़ी क़रार दिया जाता है । हज़ारों उम्मीदवारों के फ़ार्म बाद में दस्तयाब नहीं होते और ना ही उन की ऐन्ट्री कम्पयूटर में होती है । इन तमाम हालात में उम्मीदवारों को ही मुश्किलात हो रही हैं ।”

उन्हों ने कहा कि ऑनलाइन रक़म की मुंतक़ली के लिए तमाम उम्मीदवारों का नैशनल बैंकों में खाता खोलना ज़रूरी है जिस के लिए तलबा-ए-ख़सूसन तालिबात को नाक़ाबिल ब्यान दुशवारीयों का सामना करना पड़ रहा है । इन हालात में ये ज़रूरी है कि जहां तलबा नैशनल बैंकों में खाते ना खोल सकें तो उन के लिए चैक जारी करने का तरीक़ा बहाल किया जाय ।

उन्हों ने मज़ीद कहा कि ख़ुद रोज़गार स्कीम के तहत क़र्ज़ जारी करने के लिए भी पुराने तरीका-ए-कार को बहाल किया जाय और सफ़ैद राशन कार्ड रखने वालों को रास्त एक लाख रुपय क़र्ज़ जारी किए जाएं क्यों कि बैंक कारपोरेशन की स्कीमों पर क़र्ज़ जारी करने के लिए हरगिज़ तैय्यार नहीं हैं और ऐसा नहीं है कि ये बात कारपोरेशन के ज़िम्मेदारों और हुकूमत को नहीं मालूम , बल्कि उन को ख़ुद बहुत अच्छी तरह बैंकों के ग़ैर हमदर्दाना रवैय्या का अच्छी तरह इलम है ।

ख़ुद चीफ़ मिनिस्टर ने भी बारहा बैंकरज़ की मीटिंगों में अक़ल्लीयतों के ताल्लुक़ से बैंकों के रवैय्या पर अफ़सोस का इज़हार किया था और अक़ल्लीयतों को क़र्ज़ जारी करने की हिदायत दी थी । ज़रूरत है कि मर्कज़ी वज़ारत फिनान्स को इस सिलसिला में रहनुमा उसूल जारी करे ।।

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