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अक़ल्लीयतों के लिए मुख़तस 87 करोड़ रुपये फंड्स मर्कज़ को वापस

पार्लीमेंट की स्टैंडिंग कमेटी बराए समाजी इंसाफ़‍ ओ‍ बा इख्तेयारी ने अपनी बारहवीं रिपोर्ट में वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर पर सख़्त तन्क़ीद की है कि इस ने ग़ीरमसतामला रकमें मालियती ज़ाइद अज़ 587 करोड़ रुपये मर्कज़ को वापस कर दी हैं। इतनी कसीर

पार्लीमेंट की स्टैंडिंग कमेटी बराए समाजी इंसाफ़‍ ओ‍ बा इख्तेयारी ने अपनी बारहवीं रिपोर्ट में वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर पर सख़्त तन्क़ीद की है कि इस ने ग़ीरमसतामला रकमें मालियती ज़ाइद अज़ 587 करोड़ रुपये मर्कज़ को वापस कर दी हैं। इतनी कसीर मिक़दार में रकमें माज़ी में कभी ग़ीरमसतामला रक़म के तौर पर वापस नहीं की गई थीं।

2008-09 और 2009-10 मैं अली उल-तरतीब 33.63 करोड़ और 31.50 करोड़ रुपये वापस किए गए थे हालाँकि कमेटी ने कहा कि वज़ारत चार नई स्कीमों पर भी रक़म ख़र्च नहीं कर सकी क्योंकि इन स्कीमों का आग़ाज़ नहीं किया जा सका लेकिन इसने कहा कि जारीया स्कीमों पर रक़म ख़र्च क्यों नहीं की गई।

कई जारीया स्कीमों जैसे कसीर तबक़ाती तरक़्क़ीयाती प्रोग्राम बराए अक़ल्लीयतें जो बाअज़ अज़ला में मृतकज़ हैं, जिनके लिए 462.26 करोड़ रुपये मुख़तस किए गए थे, वापस कर दिए गए हैं। इलावा अज़ीं 28 करोड़ रुपये से ज़्यादा रक़म माबाद मैट्रिक स्कालरशिप्स स्कीम के लिए और 9.3 करोड़ रुपये वक़्फ़ बोर्ड के कमप्यूट्राइजेशन के लिए मुख़तस की गई थीं। 33 करोड़ रुपय से ज़्यादा रक़म माक़ब्ल मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के लिए और 26 करोड़ रुपये की रक़म मेरिट और वसाइल स्कीम के लिए मुख़तस किए गए थे, जिन्हें इस्तेमाल नहीं किया गया।

वज़ारत ने वज़ाहत पेश करने की कोशिश करते हुए कहा कि इन चंद स्कीमों में काफ़ी तजावीज़ रियास्तों और मर्कज़ी ज़ेर‍ ए‍ इंतेज़ाम इलाक़ों बिशमोल शुमाल मशरिक़ी इलाक़ा की जानिब से पेश नहीं की गई थीं। ताहम कमेटी ने बे इत्मीनानी ज़ाहिर करते हुए इस जवाब पर रद्द-ए-अमल ज़ाहिर किया और ज़ोर दिया कि रियास्तों के साथ बेहतर रब्त-ओ-तआवुन पैदा किया जाना चाहीए था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सिफ़ारिश की थी कि वज़ारत को चाहीए कि रियास्तों को इन स्कीमों की एहमीयत का एहसास दिलाने मयस्सर इक़दामात करे ताकि रक़ूमात के 100 फ़ीसद इस्तेमाल को यक़ीनी बनाया जा सके।

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा कि सच्चर कमेटी रिपोर्ट की तमाम सिफ़ारिशात पर संजीदगी से अमल आवरी नहीं की जा रही है। कमेटी ने कहा कि हालाँकि स्कालरशिप्स स्कीम और ग्रांट ऐन ऐड स्कीम नाफ़िज़ की जा रही है, लेकिन वज़ारत मसला की तहा तक नहीं पहुंच सके, जो कि सच्चर कमेटी रिपोर्ट में ज़ाहिर किया गया था। पारलीमानी कमेटी ने सिफ़ारिश की कि वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर को सच्चर कमेटी रिपोर्ट की तमाम सिफ़ारिशात पर ताय्युन मुद्दत के साथ अमल आवरी करनी चाहीए।

रिपोर्ट में कमेटी ने कहा कि ये इस का नुक़्ता-ए-नज़र ये है कि सच्चर कमेटी रिपोर्ट ज़्यादा परज़ोर अंदाज़ में नाफ़िज़ की जा सकती थी अगर सिफ़ारिशात के पसेपर्दा क़ानूनी ताक़त होती। कमेटी ने कहा कि उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की हीका हुकूमत को पार्लीमेंट में क़ानूनसाज़ी के लिए मुनासिब इक़दामात करने चाहिऐं ताकि कमीशन को मुसावी मौक़े मुख़तस किए जा सकें। मुसावी मौक़े कमीशन का क़ियाम भी सच्चर कमेटी की सिफ़ारिशात में शामिल था।

कमेटी ने सिफ़ारिश की कि वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर को बा क़ायदा इजलास रियासत और मर्कज़ी ज़ेर‍ ए‍ इंतेज़ाम इलाक़ा की सतह पर मुनाक़िद करने चाहिऐं ताकि मुम्किना हद तक बेहतरीन अंदाज़ में वज़ीर-ए-आज़म के नया 15 नकाती प्रोग्राम बराए अक़ल्लीयती बहबूद पर अमल आवरी की जा सके। पारलीमानी कमेटी ने वज़ारत में मख़लवा जायदादों की तादाद में मुसलसल इज़ाफ़ा का भी संजीदगी से नोट लिया और कहा कि वज़ारत को फ़ौरी तौर पर इस मसला पर ग़ौर करना चाहीए ताकि अमला की कमी की वजह से काम मुतास्सिर ना होने देने को यक़ीनी बनाया जा सके।

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