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अक़वाम-ए-मुत्तहिदा व यूरोपी यूनीयन पर सऊदी अरब का ज़ोर

सऊदी अरब ने अक़वाम-ए-मुत्तहिदा, सलामती कौंसल और यूरोपी यूनीयन के वुज़रा पर ज़ोर दिया है कि शाम में होने वाले क़त्ल-ए-आम का फ़ौरी नोट लिया जाये।

सऊदी अरब ने अक़वाम-ए-मुत्तहिदा, सलामती कौंसल और यूरोपी यूनीयन के वुज़रा पर ज़ोर दिया है कि शाम में होने वाले क़त्ल-ए-आम का फ़ौरी नोट लिया जाये।

इस क़तल-ए-आम में बताया जाता है कि 1300 से ज़ाइद अफ़राद जांबाहक़ हुए हैं। कीमीयाई हमलों में मरने वालों की तादाद में इज़ाफ़ा होसकता है। वज़ीर-ए-ख़ारजा सऊदी अरब शहज़ादा सऊद अल-फ़ैसल ने कहा कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सलामती कौंसल के लिए वक़्त आ गया है कि वो अपनी ज़िम्मेदारियां बरुए कार लाए।

इंसानियत के सानिहा को ख़त्म करने के लिए अक़वाम-ए-मुत्तहिदा का फ़ौरी और इस्तकदामी असर के साथ फ़ैसला करना ज़रूरी होगया है। सऊद अल-फ़ैसल ने मज़ीद कहा कि हम यूरोपी यूनीयन के वुज़राए ख़ारिजा पर भी ज़ोर देते हैं कि वो ब्रसल्स में फ़ौरी इजलास तलब करें ताकि मिस्र के बोहरान पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ किया जा सके।

अपनी मुज़ाकेरात का असल उनवान इंसानियत को दरपेश सानिहात होना चाहीए। दमिशक़ के मुज़ाफ़ात में आज किए गए कीमीयाई हमलों में सैंकड़ों अफ़राद की हलाकत की इत्तिला है। शहज़ादा सऊद अल-फ़ैसल ने इस हमले की इत्तिला पर अपने सदमा का इज़हार किया और कहा कि ये होलनाक क़त्ल-ए-आम है। बैन-उल-अक़वामी तौर पर ममनूआ कीमीयाई हथियारों को इस्तिमाल करते हुए इंसानी सानिहा पैदा किया गया है।

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