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अखिलेश की बल्ले—बल्ले, मुलायम टाय—टाय फिस

लखनऊ: काफी दिनों से समाजवादी पार्टी में चल रहे बाप—बेटे की रस्साकसी के बाद आज चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुना दिया।

चुनाव आयोग ने सोमवार को अपने तारीखी फैसले में समाजवादी पार्टी का कमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
के हाथों में सौंपने का सुना दिया।

यानि अब पार्टी का सबसे बड़ा दबंग अखिलेश यादव है। चुनाव आयोग ने फैसला लेने से पहले दिन इस मामले पर विचार—विमर्श किया। चुनाव आयोग ने फैसला लेने से पहले चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ को फ्रीज करने के कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया।

लेकिन ‘साइकिल’ को फ्रीज करने में सबसे बड़ा कानूनी मामला ये था कि समाजवादी पार्टी में अब तक टूट नहीं थी। अब तक जितनी भी बार चुनाव आयोग ने चुनाव चिन्ह फ्रीज किया है उन—उन मामलों में पार्टी में बटवारा हो चुका था।

लेकिन समाजवादी पार्टी का ये मामला कुछ अलग था। क्योंकि इसमें पार्टी का बटवारा नहीं हुआ था, बल्कि अखिलेश और मुलायम दोनों खेमें समाजवादी पार्टी पर अपना—अपना दावा जता रहे थे।

सपा में अपने दावों को मजबूत करने की लिए एक ओर जहां मुलायम संविधान की दुहाई दे रहे थे, तो अखिलेश पार्टी में बहुमत होने की ताकत दिखा रहे
थे।

चुनाव आयोग को अखिलेश का पलड़ा ज्यादा भारी नजर आया और उसने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अखिलेश के नाम पर अपनी मुहर लगा दिया।

आयोग को इसका जल्द निर्णय लेना इसलिए भी जरूरी हो गया था क्योंकि मंगलवार को पहले चरण के मतदान की नोटिफिकेशन जारी होने वाला है। सपा पिछले चुनाव की सबसे बड़ी पार्टी थी और वही अपने निशान को लेकर दुविधा में थी। चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद अब पिछले कई दिनों से चल रही कशमकश खत्म हो चुकी है।

मुलायम और अखिलेश ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था, कि वे चुनाव आयोग के फैसले को मानेंगे और फैसले खिलाफ अदालत नहीं जाएंगे।

जो भी हो लेकिन फैसला आने के अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में नायक की भूमिका में नज़र आने वाले है।

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