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अखिलेश के बुंदेलखंड से चुनाव लड़ने की इच्छा, पहले भी हार-जीत चुके हैं यहां मुख्यमंत्री

फैसल फरीद, लखनऊ: किसी भी राज्य के राजनीति में मुख्यमंत्री जहां से चुनाव लड़ता है वो क्षेत्र वीआईपी माना जाता हैं। माना जाता है कि मुख्यमंत्री प्रत्यासी जिस क्षेत्र का प्रतिनिधितिव करता है उसका विकास होना सुनिश्चित माना जाता हैं। उत्तर प्रदेश में इस तरह के कई उदहारण हैं।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बुंदेलखंड से चुनाव लड़ने इच्छा ज़ाहिर करने के बाद यह क्षेत्र एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। पहली बात तो यह कि बुंदेलखंड की आवाज़ लखनऊ तक नहीं पहुंचती। इसका सीधा कारण है कि लोकतंत्र में संख्या बल बहुत माएने रखता है। बुंदेलखंड क्षेत्र में सात जिले आते हैं और यहां से 19 विधायक चुनकर आते हैं। इतना विधायक तो लखनऊ मंडल से ही चुन कर आते हैं। ज़ाहिर सी बात है कि आखिर कोई दल इसको इतना महत्व क्यों दे। वर्तमान में बुंदेलखंड से समाजवादी पार्टी और बसपा के सात-सात विधायक हैं। और चार विधायक कांग्रेस के और एक भाजपा का है।

ऐसा नहीं है कि बुंदेलखंड से कभी किसी मुख्यमंत्री ने चुनाव नहीं लड़ा। 1958 के आसपास चंद्रभानु गुप्ता ने मौदहा सीट से चुनाव लड़ा था पर वो हार गए थे। उनको राजेंद्र कुमारी ने चुनाव हराया था। लेकिन 1 9 80 में तिंदवारी सीट से पूर्व मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह चुनाव लड़े थे। यह सीट तब कांग्रेस विधायक शिव प्रताप सिंह ने उनके लिए खाली की थी। उसी तरह 2012 के चुनाव में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती चरखारी विधान सभा से जीती थीं। लेकिन बाद में उन्होंने उस सीट से इस्तीफा दे दिया था।

बुंदेलखंड से अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने की बात तब चली जब चार दिन पहले मुख्यमंत्री हमीरपुर में एक कार्यक्रम में गए थे। स्थानीय समाजवादी पार्टी के नेता और विधायकों ने उनसे लिखित अनुरोध किया था कि वो बुंदेलखंड से चुनाव लड़ें। इसके बाद अखिलेश ने एक कार्यक्रम में इस प्रकार का इशारा भी किया और सब कुछ राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव पर छोड़ दिया। इससे पहले अखिलेश यादव की तिर्वा विधान सभा सीट कन्नौज में लड़ने की बात चली थी।

बुंदेलखंड में कांग्रेस विधायक विवेक सिंह भी अखिलेश के लिए सीट छोड़ने को तैयार हैं। इसमें कोई नई बात नहीं हैं। जब राजनाथ सिंह भाजपा से मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने बाराबंकी जनपद की हैदरगढ़ सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी और तत्कालीन कांग्रेस विधायक सुरेन्द्र नाथ अवस्थी पुत्तु भैया ने इस्तीफा दे दिया था।

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