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अदालत ने पुछे सवाल, मर्दों को झूठे केस से बचाने के लिए कहां है कानून?

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नई दिल्ली। रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि यौन हिंसा के झूठे आरोपों में फसे मर्दों को इससे बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने का वक्त आ गया है।

खातून की जानिब से रेप की झूठी शिकायत दर्ज कराने के बाद अदालत ने आरोपी वकील को विकल्प देते हुए कहा कि पीड़ित वकील आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ केस दर्ज कर सकता है। इससे पहले खातून वकील ने एक मर्द वकील पर इल्जाम लगाया था कि साल 2010 से 2012 के दौरान जब वो वकील के दफ्तर में बतौर कलर्क काम करती थी उसी दौरान वकील ने उसे धमकाकर कई बार उसके साथ रेप किया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निवेदिता अनिल शर्मा ने अपने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि इस बात को नकारार नहीं जा सकता है कि पीड़ित वकील ने इस केस के दौरान सामाजिक अपमान, दुख और शर्मिंदगी का सामना किया है।

अदालत ने ये भी कहा कि वकील के पक्ष में फैसला आने के बाद भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को अब भी सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ेगा क्योंकि समाज के ऐसे मामलों में फैसला ज्यादा मायने नहीं रखता बल्कि इल्जाम लगना ज्यादा मायने रखता है अदालत ने ये भी कहा कि आने वाले वक्त में भी पीड़ित को समाज में रेप केस के आरोपी के तौर पर ही देखा जाएगा।

मर्दों के खिलाफ रेप केस बढ़ रहे झूठे मामलों पर चिंता करते हुए अदालत ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि मर्दों के खिलाफ इस तरह के झूठे मामलों से उन्हें बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाए।

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