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अनोखी मिसाल: 34 प्राचीन मंदिरों की संरक्षण के लिए चार दशक से संघर्षरत है ‘यासीन पठान’

कोलकाता: मोहम्मद यासीन पठान जो एक स्कूल सेवानिवृत्त चपरासी है, हिन्दू-मुस्लिम भाई चारे की एक ऐसी अनोखी मिसाल पेश की है जो सच मुच अद्भुत है, मोहम्मद यासीन पठान पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले में कनसाई नदी के पास स्थित 34 प्राचीन मंदिरों की संरक्षण के लिए चार दशकों से भी अधिक समय से न केवल कोशिश कर रहे हैं बल्कि उन्हें कई मोर्चों पर विरोधों का सामना भी करना पड़ रहा है।

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प्रदेश 18 के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर के हथियालका गाँव के रहने वाले 64 वर्षीय मोहम्मद यासीन पठान ने 1976 में इन मंदिरों के संरक्षण अभियान की शुरुआत की थी. 1994 में राष्ट्रपति ने सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए कबीर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.
पठान के अनुसार, जब मंदिरों का निर्माण किया गया था हम संगठित थे हम ने हिन्दू भाइयों की मदद की. इन मंदिरों के संरक्षण के लिए हमने समिति गठित की. हमें पता है कि यह मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और अन्य धार्मिक स्थल सब राष्ट्रीय खजाना हैं. भूतकाल की यादों को उन की अज़मत ज़िंदा रखने के लिए इन मंदिरों की संरक्षण जरूरी है.

मोहम्मद यासीन ने कहा कि 16 जुलाई 2003 को भारत सरकार ने 34 मंदिरों के संरक्षण के लिए अधिसूचना जारी कया था. अब आरज्योलोजीकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 19 मंदिरों को सुरक्षित कर लिया है और 15 का काम बाकी है।
मोहम्मद यासीन के कामों से स्थानीय हिंदू और मुसलमान दोनों खुश हैं . इसी गाँव के निवासी तारक नाथ हलदार ने कहा कि यह मंदिरें काफी प्राचीन हैं, हम अपने बचपन से ही इन मंदिरों के संरक्षण के लिए प्रयास कर रहे हैं. महमद यासीन पठान मुसलमान होने के बावजूद मंदिरों के सुरक्षा के लिए कोशिश कर रहे हैं. यह उन की महानता है.

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