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अन्धकार मे भविष्य ! इसरायली बच्चो में अरबो के खिलाफ बोये जा रहे हैं नफरत के बीज

छोटे बच्चे स्पंज की तरह होते जो कुछ भी सीखे वे पूरी तरह सोक लेते हैं। एक ऐसे विश्व की कल्पना करें जहां किशोरावस्था से बच्चो का दिमाग राजनैतिक रूप से भ्रष्ट किया गया हो। दुर्भाग्य रूप से, कुछ किशोरों के दिमाग में झूठ और भ्रम के विचार डाले जाते हैं और ऐसी मान्यताएं पीढ़ी दर पीढ़ी गहरी हो रही है।

“लोग वास्तव में नहीं जानते कि उनके बच्चे पाठ्यपुस्तकों में क्या पढ़ रहे हैं” । एक सवाल जो कई लोगों को परेशान करता है, वो यह है कि आप इजरायली सैनिकों के फिलीस्तीनियों के प्रति क्रूर व्यवहार को कैसे उचित सिद्ध करें। लोग पूछते हैं कि एक अच्छा यहूदी लड़का या लड़की वर्दी पहनते ही कैसे भक्षक बन जाता है। मुझे लगता है कि इसका मुख्य कारण शिक्षा है। इसलिए मैं देखना चाहती थी कि स्कूल की किताबें फिलीस्तीनियों का प्रतिनिधित्व कैसे करती हैं “- पेलड-एलहानान

पेलड-एलहानन, हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरुसलम में भाषा और शिक्षा के प्रोफेसर हैं। उन्होंने पांच साल के लिए इजरायल की स्कूल की किताबों का अध्ययन किया, जिसमें उन्होंने केवल ‘नस्लवाद’ पाया।

उनकी पुस्तक ‘इजरायली स्कूल बुक्स में फिलिस्तीन: विचारधारा और प्रचार शिक्षा’ जिसे यूके में प्रकाशित किया गया है उसमे बताया गया है की कैसे राष्ट्र अपने युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा के लिए तैयार कर रहा है।


फिलीस्तीनी-इजरायल का संघर्ष संक्षिप्त में:

यरूशलेम को विशेष दर्जा दिया गया था और इसे 1947 के संयुक्त राष्ट्र विभाजन योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता के तहत रखा गया था। इसके तहत यहूदी और अरब राज्यों के बीच फिलिस्तीन को विभाजित किया जाना था। यह विशेष स्थिति यरूशलेम की तीन धार्मिक महत्वो पर आधारित थी।

फिलिस्तीन को विभाजित करने की संयुक्त राष्ट्र की सिफारिश के बाद, 1948 में युद्ध शुरू हो गया जिसमें ज़्योनिस्ट ताकतों ने शहर के पश्चिमी छोर पर कब्ज़ा कर लिया था और अपने राज्य का क्षेत्रीय हिस्सा घोषित कर दिया था।

1967 में एक युद्ध के परिणामस्वरूप इज़राइल ने यरूशलेम के पूर्वी भाग पर कब्जा कर लिया, जो उस समय जॉर्डन के नियंत्रण में था जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया गया था।

1980 में इसराइल ने “यरूशलेम कानून” पारित किया गया था, जिसमें कहा गया कि “यरूशलेम, पूर्ण और एकजुट, इजरायल की राजधानी है”।

आज भी इजरायल की क्रूरता जारी है और यह तब तक चलती रहेगी जब तक उन्ही के समाज मे से कोई उठ कर इन अवैध स्थितियों का सामना कर उन्हें समाप्त नहीं करेगा।

लेख – सना सिकंदर

संवाददाता – सियासत डेली

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