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अपने ही घर में किरायेदार बनकर रह रहे सात साल से लापता बेटे को माँ ने पहचान ही लिया

अपने ही घर में किरायेदार बन कर रह रहे जिगर के टुकड़े को आखिरकार माँ ने पहचान ही लिया। सात साल के बाद बेटा अपनी माँ से मिला तो दृश्य हर किसी को भावुक कर देने वाला था। मां और बेटे का यह मिलन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।
बिहार के बेगुसराय जिले के फुलबड़िया थाना के गंज टोले की शबाना परवीन का बेटा जून 2009 में उस समय बिछुड़ गया था जब वह अपने पड़ोसी के एक बच्चे के मुंडन संस्कार में गया था। काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका पता नही चला तब फलवड़िया थान में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया गया। राजू की तलाश करती रही उसकी मां अजमेर से मुबंई के हाजी दरगाह कई जगह मन्नतें मांगती रही, लेकिन वो नहीं मिला। और अब मिला भी तो सात साल बाद अपने खुद के ही घर में।

परवीन के किराएदार ऑटो चालक मोहम्मद अरमान को राजू बरौनी में भटकते मिला और उसे काम देने की मांग की थी। काम मिलने के बाद वह उसके साथ उसके घर में रहने लगा। अचानक एक दिन परवीन ने चाय पीने के दौरान राजू को देखा तो वह उसे पहचान गई, लेकिन राजू अपनी मां को पहचान नहीं पाया. परवीन ने उसे फोटो एलबम दिखाया और बचपन के दोस्तों को दिखाया तब जाकर उसे याद आया और उसने अपनी मां को पहचान लिया।

राजू ने बताया कि उसे मुडन के दौरान कुछ लोग जबरन उठाकर ले गए और उसे दवा देकर रखा जाता था। अपहरण करने वाला उसे अपना बेटा बताता था। राजू धीरे धीरे सब कुछ भुल गया। चार साल के बाद जब बाहर खेल रहा था तभी उसे एक दोस्त ने बताया कि उसके मां-बाप झूंठ बोलते हैं, उसे कहीं से लाया गया है। इसके बाद राजू वहां से भाग गया। उसे सिर्फ इतना याद था कि उसका घर रेलवे स्टेशन के पास है। तीन साल से वह रेलवे स्टेशन के आस पास गांव को खोजता रहा।
एक दिन वह बरौनी पहुंचा और अरमान से मिला और उसके यहां 50 रुपये के रोज पर काम करने लगा। राजू अपने मां के घर ही किराएदार के यहां रह रहा था, लेकिन वहां घर और मोहल्ले की बनावट बदल जाने से पहचान नहीं पा रहा था। मिलने के बाद जब परवीन ने उसे दो दिनों तक फोटो एलबम से दिखाकर उसे याद दिलाया। अब दोनो मिलकर काफी खुश हैं।

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