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अफगानिस्तान और हथियार के सौदे के लिए भारत पहुंचा अमेरिकी रक्षा मंत्री

अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस दो दिन के भारत दौरे पर हैं. समझा जाता है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे अधिकारियों से मुलाकात में मैटिस अफगानिस्तान में सुरक्षा और भारत-अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों पर बातचीत करेंगे. इनमें सैन्य तकनीकों और लड़ाकू विमानों के लिए सौदे पर भी बातचीत हो सकती है. अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद कैबिनेट स्तर के अधिकारी की यह पहली भारत यात्रा है.

बीते सप्ताह अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिका भारत को एक अहम और प्रभावशाली साझेदार मानता है, जिसमें आपसी दिलचस्पियों को दक्षिण एशिया से आगे ले जाने की मंशा है. दोनों देशों के बीच बातचीत में अफगानिस्तान में सहयोग बढ़ाने और अमेरिका से लड़ाकू विमानों की खरीद पर चर्चा होगी.

पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत से आग्रह किया था कि वह अफगानिस्तान में सुरक्षा के प्रयासों में अपना सहयोग बढ़ाये. अमेरिका खुद भी अफगानिस्तान में आगे बढ़ रहे तालिबान लड़ाकों के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने जा रहा है.

अब तक भारत ने जंग से तबाह अफगानिस्तान में सड़क निर्माण, बिजली की सप्लाई लाइन और बांध बनाने के साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए करीब तीन अरब अमेरिकी डॉलर का सहयोग किया है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मंगलवार की बातचीत में दोनों देश उन तौर तरीकों पर बातचीत करेंगे, जिनके जरिये अफगानिस्तान में भारत सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने में सहयोग कर सकता है. दिल्ली के कुछ अधिकारियों का कहना है कि भारत अफगानिस्तान के सैनिकों को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षण दे सकता है. मैटिस कुछ रक्षा समझौतों को भी आगे बढ़ाने पर भारत से बातचीत कर सकते हैं.

भारत इस वक्त दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है और ड्रोन, लड़ाकू विमान, पनडुब्बी के लिए दुनिया भर के हथियार बेचने वालों से बातचीत कर रहा है. भारत अमेरिका पर हथियार बेचने के साथ ही उन्हें बनाने की तकनीक देने के लिए भी दबाव बना रहा है. हालांकि अमेरिका भारत को एफ16 लड़ाकू विमान बेचने की फिराक में है.
अमेरिकी कंपनी बोइंग ने एफ ए18 लड़ाकू विमान भारत में बनाने की इच्छा जतायी है लेकिन इसके लिए भारतीय नौसेना को बोइंग से लड़ाकू विमान खरीदने होंगे.
दोनों देश हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने पर भी बातचीत करेंगे. अमेरिका इस इलाके में चीन के आक्रामक रुख से थोड़ा चिंतित है.

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