Friday , September 22 2017
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अबू सीन मासूम है उसे आज़ाद किया जाए

ये चौंकाने वाला नहीं है कि सऊदी टीनएजर “अबू सीन” ने कई न्यूज़ में सुर्ख़ियाँ बटोरी हैं, ख़ासतौर से उसके गिरफ़्तार होने के कुछ दिन बाद से.. सिर्फ़ कुछ लोग ही मगर जानते हैं कि आख़िर ऐसी कौन सी बात उसने कर दी है जो ग़ैर-क़ानूनी है.
अगर आप कहानी के बारे में नहीं जानते हैं, तो कुछ जानकारियाँ: एक चंचल और शानदार नौजवान सऊदी जिसको अपने घर के नाम “अबू सीन” से जाना जाता है को 21 साल के अमरीकी वीलोगर क्रिस्टीना क्रोच्केट से ऑनलाइन विडियो एक्सचेंज में “अन-एथिकल बिहेवियर” के इलज़ाम में गिरफ़्तार कर लिया गया.
पुलिस का दावा है कि वीडियो में “नकारात्मक भावना” को पूरी दुनिया में बढ़ावा देने की कोशिश की गयी है. दोनों लोगों के बीच हुए इस बातचीत में भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषा की रुकावटों के बावजूद बातचीत करने की कोशिश को मज़ाक़िया लहजे में बढ़ावा देने की कोशिश की गयी है. क्लिप्स को सोशल मीडिया “you now” पे लाइव दिखाया गया और अब वो अलग अलग न्यूज़ पे और यू ट्यूब पे मौजूद है.
एक बातचीत के दौरान अबू सीन एक मज़ाक़िया डांस करता है जिससे उसके दोस्त हंसने लगते हैं जबकि दूसरे में वो पारम्परिक सऊदी पगड़ी पहेनता है और एक प्यार का गाना गाता है जिसमें वो मज़ाक़ में या सच में लेकिन वो उससे शादी के लिए कहता है.
कर्नल फ़वाज़ अल मेमन जो रियाद पुलिस के तर्जुमान हैं ने कहा कि अबू सीन को “अनएथिकल बिहेवियर” के इलज़ाम में गिरफ़्तार किया गया है.
“उसके विडियो पे बहुत सारे कमेंट आये हैं और कई कमेंट करने वालों ने उसको सज़ा देने की वक़ालत की है”, उन्होंने सऊदी गज़ट से बात करते हुए कहा.
ये बिला किसी शुबा के कहा जा सकता है कि पूरी दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जो अबू सीन के ऊपर हुई कार्यवाही से चौंक गए हैं क्यूँकि जो उसने किया उसको ज़्यादातर लोग मासूमियत मानते हैं और ये सिर्फ़ दो नौजवानों के बीच मज़ाक़ की बात थी.
इस बीच, इस मुक़दमे के बारे में किंगडम के अन्दर ही काफ़ी चर्चा है. इस बारे में सामाजिक तौर पर बहस जारी है कि अबू सीन को किसी तरह की सज़ा मिलनी चाहिए या नहीं जबकि उसने जो किया उसमें बचपना था और उससे लोगों को अपने ही ऊपर हँसना पडा.
बिलकुल, सब तो ये नहीं मानेंगे कि अबू सीन ने जो किया वो बेवकूफ़ी थी और अगर थी भी तो क्या “बेवक़ूफ़” होना कोई गुनाह है क्या?
इसके इलावा, दुःख की बात ये है कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सोचते हैं कि अच्छा हुआ कि अबू सीन सलाख़ों के पीछे है, इन लोगों का कहना है कि उसके लिए सबसे सुरक्षित जगह जेल ही है क्यूंकि जिस तरह का रूढ़िवादी समाज है उससे उसका बाहर आना उसी को ख़तरे में डाल देगा क्यूंकि रूढ़िवादी क़ानून को अपने हाथ में ले सकते हैं.
इससे बुरा कोई तर्क हो ही नहीं सकता. जो इस तरह के विचार रखते हैं उनको ये सही से याद रखना चाहिए कि वो ऐसा बिलकुल ग़लत सोचते हैं कि किंगडम बिना क़ानून के चल रही है जहां गुण्डे और बदमाश का शासन चल रहा है और उनकी इज़्ज़त होती है…ऐसा बिलकुल सच नहीं है और पूरे तौर पर ये झूठ है.

हाँ, सऊदी अरब में कुछ मीडिया को लेकर क़ानून हैं जो किसी भी तरह की पब्लिक उत्तेजना और अश्लीलता के ख़िलाफ़ है और सबके लिए क़ानून बराबर है और सबको क़ानून का पालन करना चाहिए. फिर भी अथॉरिटीज को इस तरह के केस में ये समझने की ज़रुरत है कि यहाँ आतंकवाद को बढ़ावा या कोई क्राइम को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा था.. यहाँ कोई किसी को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहा था.

दुर्भाग्य से अबू सीन कम्युनिकेशन तकनीक के उस जाल में फँस गया है जिसमें कुछ कमियाँ हैं. एक तरह से देखा जाए तो ये एक आम पोस्ट की तरह है जिसमें किसी को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश नहीं की जाती. इस मामले में सऊदी अरब कोई अकेला देश नहीं है, ऐसे मामले अमरीका और इंग्लैंड जैसे देशों में भी सामने आये हैं. अब किसी को मुक़दमा करने से रोका तो नहीं जा सकता लेकिन ज़रूरी नहीं कि उस बात को सुना ही जाए या कोई ज़रूरी नहीं कि जिस पर इलज़ाम लगा है वो दोषी ही हो.
फिर भी, एक जो सबसे ज़्यादा चौंकाने वाली है वो है कर्नल अल मेमन का वो बयान जो सऊदी गज़ट में छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि अबू सीन की गिरफ़्तारी की वजह पब्लिक का मत है. अगर यही बात है तो ये जो विचार जारी हो रहे हैं उसमें ये बात है कि अबू सीन को छोड़ा जाए और उसे उसका टेलीविज़न शो दिया जाए.

(ये एडिटोरियल अरब न्यूज़ में प्रकाशित हुआ है जिसे हिंदी में सिआसत ने अनुवाद किया है)

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