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अब आम आदमी भी पार्लीमेंट में बैठ सकता है : केजरीवाल

नई दिल्ली, २७ नवंबर (पीटीआई) अरविंद केजरीवाल ने बिलआख़िर अपनी सयासी जमात आम आदमी पार्टी (AAP) तशकील दे दी । उन्होंने कहा कि अब रसा कुशी सियासतदानों और आम आदमी के दरमयान होगी जो आज़ादी के बाद से गुज़शता 65 सालों से इस्तेहसाल का शिकार है ।

नई दिल्ली, २७ नवंबर (पीटीआई) अरविंद केजरीवाल ने बिलआख़िर अपनी सयासी जमात आम आदमी पार्टी (AAP) तशकील दे दी । उन्होंने कहा कि अब रसा कुशी सियासतदानों और आम आदमी के दरमयान होगी जो आज़ादी के बाद से गुज़शता 65 सालों से इस्तेहसाल का शिकार है ।

पार्लीमेंट स्ट्रीट में एक जलसे से ख़िताब करते हुए उन्हों ने कहा कि नई पार्टी दरअसल बदउनवानीयों के ख़िलाफ़ जद्द-ओ-जहद का नतीजा है । जलसे में मौजूद अवाम का ज़म्म-ए-ग़फ़ीर भारत माता की जय के नारे लगाते हुए तिरंगे परचमों को लहरा रहा था ।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने पार्टी का नाम आम आदमी पार्टी रखा है और तवक़्क़ो है कि उन्हें आम आदमी से मुकम्मल तआवुन हासिल रहेगा । पार्टी की तशकील और ऐलान से क़ब्ल केजरीवाल और उनके हामीयों ने राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर कुछ वक़्त गुज़ारा और इसके इलावा सिविल लाईन्स ही में वाक़े ( स्थित) बी आर अंबेडकर मेमोरियल पर भी उन लोगों ने हाज़िरी दी ।

केजरीवाल ने कहा कि 26 नवंबर की तारीख़ का इंतेख़ाब इसलिए किया गया है क्योंकि 1949 में उस तारीख़ को मुल्क का दस्तूर भी तैयार किया गया था । लॉंचिंग प्रोग्राम में उन्होंने इन शहीद NSG कमांडोज़ को भी ज़बरदस्त ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की जिन्होंने आज से चार साल क़ब्ल 26 नवंबर को हुए दहशतगर्द हमलों में अपनी क़ीमती जानें न्योछावर कर दी थीं।

इस मौक़ा पर एक साबिक़ NSG कमांडर सुरेंद्र सिंह जिसने दावा किया था कि उसे आज तक हुकूमत की जानिब से कोई माली इम्दाद या वज़ीफ़ा नहीं मिला है । उसे ऐडमिरल( रिटायर्ड) एल राम दास की जानिब से तहनियत पेश की गई । अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब नेता और आम आदमी के दरमयान टक्कर दिलचस्पी का बाइस होगी । आम आदमी भी अब पार्लीमेंट में बैठ सकता है ।

जब उन से पूछा गया कि उन के पास सयासी तजुर्बा नहीं है तो केजरीवाल ने कहा कि बेशक उन के पास दीगर सियासतदानों के जैसा मुजरिमाना और बदउनवानी का कोई रिकार्ड नहीं है और ना ही वो रिकार्ड रखने के ख़ाहां हैं । उन्होंने कहा कि इफ़रात-ए-ज़र दरअसल बढ़ती हुई बदउनवानीयों की देन है और अगर बदउनवानीयों पर क़ाबू पा लिया गया तो बढ़ती हुई क़ीमतों पर भी क़ाबू पाया जा सकता है।

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