Friday , June 23 2017
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अभिसार शर्मा का ब्लॉग- ‘सैनिक- सैनिक में फर्क क्यों मोदी जी’

“जनरल वीके सिंह तमाम विवादों के बावजूद न सिर्फ सांसद हैं , बल्कि मंत्री भी. बतौर मंत्री जनरल साहब ने पत्रकारों को प्रोस्टिट्यूट यानि वेश्या से प्रेरित होकर प्रेस्टिट्यूट शब्द से नवाज़ा था. आप पर तो पूरी इबारत लिखी जा सकती है “अनुशासनप्रिय” होने की.”

सैनिक- सैनिक मे फर्क क्यों सरकार ? तेजबहादुर यादव जिसने खाने की क्वालिटी पर सवाल उठाए थे , उसे नमस्ते कर दिया, बगैर इस बात की जांच किये कि क्या वाकई सेना या पैरामिलिट्री फोर्सेस मे खाने को लेकर कोई गड़बड़झाला होता है या नहीं ? मोदीजी ने जहां तेजबहादुर के आरोपों पर जांच का आदेश ज़रूर दिया मगर सैनिको को दिये जा रहे खाने पर या उसकी गुणवत्ता पर अदालत मे एक पीआईएल ही दाखिल हुई. सरकार की तरफ से कुछ नहीं. मगर अब एक दूसरे सैनिक के साथ बीजेपी के रवैये पर गौर करें . जनरल वीके सिंह पर तो पूरी दास्तान लिखी जा सकती है अनुशासनहीनता की ? भूल गए हों तो गौर फरमाएं.

धरती पर अवतरित होने की तारीख पर विवाद के अलावा , ये पहले सेना प्रमुख थे जो पद पर रहते हुए सरकार को अदालत तक ले गए. प्रतिशोधात्मक कार्रवाई मे इन्होने सेना प्रमुख का पद छोड़ते हुए, जनरल दलबीर सुहाग पर अनुशास्नात्मक और विजिलेंस प्रमोशन बैन की सिफारिश की. नतीजा ये हुआ कि सेना के इतिहास मे पहली बार एक सेना प्रमुख ने , यानि दलबीर सुहाग ने ,सुप्रीम कोर्ट मे हलफनामा दाखिल किया कि बतौर चीफ आफ आर्मी स्टाफ , जनरल वीके सिंह ने उन्हे प्रताड़ित किया . मंत्री रहते हुए दलितो की अप्रत्यक्ष तौर पर एक जानवर से तुलना और यही नहीं, जिस सेना मे आप जीवन भर रहे , उसमे फैले तथाकथित करप्शन पर ट्वीट करके उसे बाद मे डिलीट कर देना, ये महोदय की अनुशासन प्रिय छवि के कुछ और नमूने हैं.

जनरल वीके सिंह तमाम विवादों के बावजूद न सिर्फ सांसद हैं , बल्कि मंत्री भी. बतौर मंत्री जनरल साहब ने पत्रकारों को प्रोस्टिट्यूट यानि वेश्या से प्रेरित होकर प्रेस्टिट्यूट शब्द से नवाज़ा था. आप पर तो पूरी इबारत लिखी जा सकती है “अनुशासनप्रिय” होने की .

हो सकता है तेजबहादुर यादव ने जो किया वो अनुशासनहीनता हो, उनके पास इसके खिलाफ अपील करने के लिए तीन महीने बाकी हैं , मगर क्या इस बात से इंकार किया जा सकता है कि सैनिकों को दिए जाने वाला खाना अच्छी क्वालिटी का नहीं होता है ? क्या विरोध का तरीका , हकीकत पर पर्दा डालने की वजह हो सकता है ? तो फिर जनरल वीके सिंह के तरीकों का क्या ? जिन्होने बार बार अनुशासन की बखिया उधेड़ी, अब भी उधेड़ रहे हैं. ये कैसे अजूबा सैनिक है जिसकी हर हरकत को माफकिया जाता है और सरमाथे चढ़ाया जाता हैं.

और ये कैसे महान समर्थक हैं इस राष्ट्रवादी पार्टी के जो देश भक्त सरकार से सवाल नहीं कर रही है ? क्या पूछा
आपने जो तेजबहादुर यादव ने किया वो देशद्रोह है ? अगर वो मानसिक तौर पर असंतुलित था तो ऐसी संवेदनशील पोस्टिंग क्यों दी गई? क्या ये मामूली सवाल तक नहीं उठा सकते आप? या मोदी प्रेम का धतूरा सब चीजों पर भारी है?

सबसे ज्यादा अफसोसजनक है वो संवाद जो तेजबहादुर के मुद्दे पर हो रहा है. बकौल मोदी भक्त, अरे इसे तो आम आदमी पार्टी या कांग्रेस से टिकट मिल जाएगा. ये तो पागल था. अनुशासन से ज्यादा है कुछ भला? ये बात अलग है कि पार्टी के हाई प्रोफाइल सैनिक की हरकतों को न सिर्फ नज़रअंदाज़ किया जा रहा है , बल्कि रोज़ नई मिसालें कायम की जा रही हैं.

जय हो .

लेखक- अभिसार शर्मा जाने माने टीवी पत्रकार हैं, यह उनके अपने विचार है

  • satyawadi

    Sarkar ne jaab se tukde fekne bandh kiye hai taab se ye apneapko patrakar kahelanewale tukdoko taras rahehai or Modi pe barasrahe hai.

  • फैन नहीं मतदाता बनिए

    well said , atleast we have some journalist ; jinhone apna iman becha nahi hain

  • indian rishi

    abhisar is certified #pressitutes, what’s wrong in calling chor, a chor

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