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अमराज़ कुहना के ईलाज में कैरोप्रक्टिक कारआमद

हैदराबाद 30 मार्च: कैरोप्रक्टिक को अमरीका के अलावा मग़रिबी मुल्कों में ज़बरदस्त शौहरत हासिल है क्योंके एल्लू पथिक के ईलाज की वजह से साईड एफ़कट होरहा है जिस की वजह से मग़रिबी मुल्क की अवाम कैरोप्रक्टिक की तरफ़ राग़िब होरहे हैं इन ख़्यालात

हैदराबाद 30 मार्च: कैरोप्रक्टिक को अमरीका के अलावा मग़रिबी मुल्कों में ज़बरदस्त शौहरत हासिल है क्योंके एल्लू पथिक के ईलाज की वजह से साईड एफ़कट होरहा है जिस की वजह से मग़रिबी मुल्क की अवाम कैरोप्रक्टिक की तरफ़ राग़िब होरहे हैं इन ख़्यालात का अज़हार पालमीर यूनीवर्सिटी के प्रोफ़ैसर कैरोप्रक्टिक मुईन अंसारी ने किया ।

उन्हों ने कहा कि कैरोप्रक्टिक 115 साला क़दीम ईलाज है ओर ये 1894 में अमरीका के डीनो इन पोट में इस का क़ियाम अमल में आया और आहिस्ता आहिस्ता ये 4 मुल्कों और सारी दुनिया में फैलता जा रहा है ।

उन्हों ने कहा कि कैरोप्रक्टिक ईलाज के ज़रीये पुरानी बीमारीयां का ईलाज किया जा सकता है मसलन कमर का दर्द, गर्दन का दर्द, जोड़ों का दर्द के अलावा आइसटीडी और दीगर बीमारीयां 50 ता 60 फ़ीसद फ़ायदा हासिल होगा।

कैरोप्रक्टिक के ज़रीये ईलाज कराने के बाद इन बीमारीयों में मुबतला अफ़राद चलना शुरू कररहे हैं और आराम के साथ सौ रहे हैं। 16 साल के दौरान देढ़ लाख अफ़राद का कैरोप्रक्टिक के ज़रीये ईलाज किया गया मग़रिबी ममालिक के बाद एशीया में कैरोप्रक्टिक को अभी अभी शौहरत हासिल होरही है और हिन्दुस्तान में कैरोप्रक्टिक यूनीवर्सिटी के क़ियाम के लिए कोशिश की जा रही है अब तक हैदराबाद के अलावा दिल्ली, पहुँचीं और केरला में कैंपस किए गए और इसी साल निज़ामबाद में दूसरी मर्तबा जून में कैरोप्रक्टिक कैंप मुनाक़िद किया जा रहा है ।

पिछ्ले दो दिनों से 600 अफ़राद का ईलाज किया गयाऔर कल भी इस कैंप में मरीज़ों का ईलाज किया जाएगा। उन्हों ने कहा कि अवाम में शऊर बेदार होने की सूरत में उस की मांग में इज़ाफ़ा होता जा रहा है क्योंके मरीज़ इस के बारे में अपने दोस्त अहबाब को वाक़िफ़ करवाते जा रहे हैं और आहिस्ता आहिस्ता हिन्दुस्तान में भी ये फैल जाएगा।

दो दिन से जारी कैंप को अवाम की ज़बरदस्त ताईद हासिल होरही है अवाम को इस बारे में इतेला मिलने पर तशख़ीस के लिए अवाम का तांता बांधा हुआ है लेकिन इबतिदाई में रजिस्ट्रेशन करने की वजह से नए मरीज़ों को देखना मुश्किल होरहा है जिस की वजह से अवाम तशख़ीस के लिए बेचैन नज़र आरहे हैं।

प्रोफ़ैसर मुईन अंसारी का ताल्लुक़ हैदराबाद से है और ये अमरीका में पिछ्ले 40 साल से पालमीर यूनीवर्सिटी में प्रोफ़ैसर की हैसियत से ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं और ये पिछ्ले साल वज़ीफ़ा पर सबकदोश होने के बावजूद भी पालमीर यूनीवर्सिटी उन की ख़िदमात को हासिल कररही है और उन की निगरानी में कामयाब तालीम हासिल करने वाले डॉक्टर्स की टीम यहां पर मरीज़ों का मुआइना कररही है और निज़ामबाद में भी 19 डॉक्टर्स पिछ्ले दो दिनों से अवाम का ईलाज कररहे हैं ।

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