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अमरीका में मुक़ीम हिंदुस्तानी डॉक्टरों का ग़ैर मामूली जज़बा ख़िदमते ख़ल्क़

मेहनत और जुस्तजू के ज़रीए तालीम, दौलत, शोहरत, इज़्ज़त और ताक़त सब कुछ हासिल किया जा सकता है और ये तमाम चीज़ें हासिल होने के बाद अगर किसी फ़र्द में ख़िदमते ख़ल्क़, सिला रहमी मुहब्बतो मुरव्वत और इंसानियत का पाकीज़ा जज़बा ना हो तो मज़कूरा तमाम चीज़

मेहनत और जुस्तजू के ज़रीए तालीम, दौलत, शोहरत, इज़्ज़त और ताक़त सब कुछ हासिल किया जा सकता है और ये तमाम चीज़ें हासिल होने के बाद अगर किसी फ़र्द में ख़िदमते ख़ल्क़, सिला रहमी मुहब्बतो मुरव्वत और इंसानियत का पाकीज़ा जज़बा ना हो तो मज़कूरा तमाम चीज़ों की कोई अहमियत नहीं। यही वजह है कि हमें अपनी दौलत ऐसे इल्म ऐसी इज़्ज़त और शोहरत के लिए दुआ की हिदायत दी गई।

जिस में इंसानों की भलाई का राज़ पोशीदा हो। दीने इस्लाम में जज़बा ख़िदमते ख़ल्क़ को सबसे ज़्यादा अहमियत दी जाती है। इस्लाम ने ना सिर्फ़ इंसानों बल्कि हैवानों यहां तक कि पौदों दरख़्तों पर भी रहम करने का अपने मानने वालों को हुक्म दिया है। चुनांचे इस्लाम के इस मुक़द्दस प्याम को फैलाने में अमरीका में मुक़ीम हिंदुस्तानी मुसलमानों की फ़लाही तंज़ीम आई एम आर सी (इंडियन मुस्लिम रीलीफ़ एंड चैरीटीज़) 1982 से सरगर्म है।

ये तंज़ीम हर साल शहर हैदराबाद के इलावा उत्तर प्रदेश, आसाम, गुजरात, राजिस्थान और दीगर रियासतों में मेडिकल कैंप्स मुनाक़िद करते हुए बिला लिहाज़ मज़हबो मिल्लत मुख़्तलिफ़ बीमारियों ख़ासकर अमराज़ कुहना में मुबतला परेशान हाल मर्द और ख़्वातीन का मुफ़्त ईलाज और मुआलिजा कर रही है।

इस के लिए आई एम आर सी ने डॉक्टरों की एक टीम तशकील दी है जो हर साल अपने ख़र्च पर हिंदुस्तान का दौरा करते हुए मरीज़ों का ईलाज करने में कोई कसर बाक़ी नहीं रखते। जारीया साल आई एम आर सी के 8 डॉक्टरों की एक टीम ने हसन नगर, वट्टे पल्ली और शाहीन नगर में मुसलसल तीन दिन से मेडिकल कैंप्स का एहतेमाम करते हुए मुख़्तलिफ़ बीमारीयों में मुबतला 2121 मर्द और ख़्वातीन और बच्चों का ईलाज किया और उन में ज़ाइद अज़ 8-10 लाख रुपये की अदवियात की तक़सीम अमल में लाई।

कान में दर्द के मौक़ा पर एक ख़ातून अपने घरेलू नुस्ख़ों को आज़माती हैं नतीजा में बच्चे कान के इन्फ़ेक्शन से मुतास्सिर हो जाते हैं। डॉक्टर सबीहा के मुताबिक़ इन बच्चों का ईलाज नामुमकिन नहीं है ताहम इस ज़िमन में वालिदैन में शऊर बेदार करना ज़रूरी है। वाज़ेह रहे कि 28 जनवरी को हसन नगर में भी आई एम आर सी ने मुफ़्त मेडिकल कैंप मुनाक़िद किया था जिस में 720 और 27 जनवरी को वट्टे पल्ली में मुनाक़िदा कैंप में 681 मर्द और ख़्वातीन और बच्चों के मुआइने करते हुए उन्हें अदवियात फ़राहम की गईं।

राक़िमुल हुरूफ़ ने आई एम आर सी के सरब्राह जनाब मंज़ूर ग़ौरी से बात की। उन्हों ने बताया कि वो गुज़िश्ता 40 साल से ज़ाइद अर्सा से अमरीका में मुक़ीम हैं। 1982 में वो और उन के साथियों ने समाजी ख़िदमात के लिए IMRC के नाम से ख़िदमते ख़ल्क़ का काम शुरू किया। इस काम का मक़सद सिर्फ़ और सिर्फ़ बिला लिहाज़ मज़हबो मिल्लत इंसानों की ख़िदमत करते हुए अल्लाह अज़्ज़ो वजल की ख़ुशनुदी हासिल करना है। उन्हों ने मज़ीद कहा कि आई एम आर सी का सिर्फ़ 8 लोगों से आग़ाज़ हुआ था।

अब अमरीका में मुक़ीम हिंदुस्तानी मुसलमानों में से तक़रीबन 13000 मुस्लिम शख्सियतें इस तंज़ीम से जुड़े हुए हैं। जनाब मंज़ूर ग़ौरी के मुताबिक़ हैदराबाद में तीन मेडिकल कैंप्स के इलावा हर साल यू पी के ज़िला बारह बन्की, आसाम, गुजरात और राजिस्थान के कई मुक़ामात पर इस तरह के मेडिकल कैंप्स का एहतेमाम किया जाता है। जिन में 5000 ता 7000 मरीज़ों की मुकम्मल तौर पर मदद की जाती है। उन की तश्ख़ीस से लेकर अदवियात की फ़राहमी और सर्जरी के मरहलों तक मरीज़ों की मदद को यक़ीनी बनाया जाता है।

वाज़ेह रहे कि जनाब अनीस उद्दीन आई एम आर सी के चीफ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफीसर और सैयद अब्दुल नजीब प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं। शाहीन नगर में कैंप के इनेक़ाद में हबीब यहया, और मुहम्मद अब्दुर्रऊफ़ ने भी तआवुन किया जब कि शाहीन नगर जामा मस्जिद मर्कज़ में मुनाक़िदा इस अनोखे मेडिकल कैंप से इस्तिफ़ादा करने के लिए इलाक़ा की ज़ाइद अज़ 20 मसाजिद के लाउड स्पीकरों के ज़रीए एलान किया गया। बताया जाता है कि डॉक्टरों की ये टीम कल उत्तर प्रदेश के जहांगीराबाद इलाक़े के लिए रवाना हो रही है।

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