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अमरीका-रूस फ़ौजी तसादुम दानिशमंदी नहीं

वाशिंगटन हिंद-अमरीका ताल्लुक़ात चीन केलिए ख़तरा नहीं, अमरीकी मईशत को बचाने पर फ़ख़र, ओबामा का सी एन एन को इंटरव्यू

वाशिंगटन

हिंद-अमरीका ताल्लुक़ात चीन केलिए ख़तरा नहीं, अमरीकी मईशत को बचाने पर फ़ख़र, ओबामा का सी एन एन को इंटरव्यू

रूस के साथ फ़ौजी तसादुम में मुलव्विस होना दानिशमंदी नहीं होगी, सदर अमरीका बारक ओबामा ने रूस के साथ बढ़ती हुई कशीदगी के पस-ए-मंज़र में सी एन एन को इतवार के टॉक शो केलिए इंटरव्यू देते हुए फ़रीद ज़करिया से कहा कि अमरीकी पालिसी रूस को सख़्त तहदीदात आइद करने की है क्योंकि रूस ने यूक्रेन में जो कार्यवाहीयां की हैं इस से रूस की मईशत बुरी तरह मुतास्सिर हुई है।

उन्होंने कहा कि उन के ख़्याल में तहदीदात बिलकुल मुंसिफ़ाना हैं , वो समझते हैं कि ये उन बुरे फ़ैसलों का नतीजा है जो पोटन ने अपने मुल्क की नुमाइंदगी करते हुए किए हैं । उन्होंने कहा कि ये कहना बिलकुल इंसाफ़ होगा कि रूस की पालिसी रूसी मईशत पर कोई हक़ीक़ी बुरा असर मुरत्तिब नहीं कररही है।

ये काफ़ी मूसिर है इस से सदर रूस व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में अदम इस्तेहकाम पैदा करने से रुक गए हैं । उन्होंने कहा कि क्रीमिया और यूक्रेन के बारे में पुतिन के फ़ैसले के बाद उनकी ये कोई शानदार हिक्मत-ए-अमली नहीं थी बल्कि लाज़िमी तौर पर उन्हें मैदान में एहतेजाजी मुज़ाहिरों और या नौ को विच के मुल्क से फ़रार होने के दरमियान जब कि यूक्रेन में इक़्तेदार की उबूरी मुंतक़ली केलिए एक मुआहिदे केलिए सा लस्सी की गई थी , तवाज़ुन बरक़रार रखना था।

उन्होंने कहा कि वो दिन गुज़र गए जब कि अज़ीम क़ौम का मौक़िफ़ हासिल करने केलिए सरज़मीनों पर क़बज़ा करने का फार्मूला इस्तेमाल किया जाता था , आजकल ममालिक की ताक़त का पैमाना उनका इल्म , महारतें और अशीया ईजाद कर के बैरून-ए-मुल्क बरामद करने की सलाहियत और ख़िदमात-ओ-असर -ओ-रसूख़ बरामद करने सलाहियत है।

वो सी एन एन के टॉक शो केलिए फ़रीद ज़करिया को इंटरव्यू दे रहे थे जो कल नशर किया गया। सदर ओबामा ने कहा कि अमरीका और हिन्दुस्तान के अच्छे ताल्लुक़ात से रूस को ख़तरा महसूस नहीं करना चाहिए। उन्होंने ख़बरदार किया कि देवक़ामत कम्यूनिस्ट मुल्क को छोटे ममालिक जैसे वियतनाम या फिलिपीन्स को बहरी मसाइल पर धमकाना तर्क कर देना चाहिए।

ओबामा ने नवंबर में अपने दौरा चीन का हवाला देते हुए कहा कि सदर चीन झ़ी जिनपिंग से उनकी मुलाक़ातें बहुत कामयाब रही। ओबामा के दौरा हिंद पर तबसरा करते हुए चीन के सरकारी ज़राए इबलाग़ ने कहा था कि हिन्दुस्तान को मग़रिब के क़ियाम किए हुए रक़ाबत के फंदे में नहीं फंसना चाहिए।

इस साज़िश को अमरीका की ताईद हासिल है और उसकी एशीया केलिए हिक्मत-ए-अमली की बुनियाद है और ये हिक्मत-ए-अमली सिर्फ़ कम्यूनिस्ट मुल्क के रूस की वजह से तैयार की गई है । ओबामा ने यक़ीन ज़ाहिर किया कि तारीख़ के इस लम्हे में सब के लिए कामयाबी का मौक़ा फ़राहम नहीं किया जा सकता।

ऐसा कोई फार्मूला नहीं है जिस पर अमल करते हुए क़वाइद और मियारों का एक मुशतर्का मजमूआ तैयार किया जा सके । उन्होंने कहा कि अमरीका की तवज्जे अपने अवाम की ख़ुशहाली और उन के हालात की बेहतरी पर है लेकिन ऐसा दूसरों की क़ीमत पर नहीं किया जाएगा बल्कि बाहमी शराकतदारी और जद्द-ओ-जहद के नतीजे में ये मक़सद हासिल किया जाएगा।

उन्हों ने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी से बातचीत का मर्कज़ी नुक्ता यही था। उन्होंने कहा कि एक कामयाब चीन का पुरअमन उरूज ख़ुद अमरीका के मुफ़ाद में है । इस का अदम इस्तिहकाम , ग़ुर्बत और इंतेशार अमरीका केलिए ख़तरनाक होगा। इन का इंटरव्यू सी एन एन केलिए फ़रीद ज़करिया ने नई दिल्ली में रिकार्ड किया था।

सदर अमरीका ने कहा कि इस बात में कोई शक नहीं कि ऐसे पहलू भी हैं जिन से हिन्दुस्तान और अमरीका के दरमियान क़ुरबत पैदा होती है , खासतौर पर जम्हूरीयत एक मुशतर्का क़दर है जिस से दोनों ममालिक के अवाम की इक़दार और उमंगें झलकती है । इस के अलावा हमारा मुल्क एक ऐसे तरीक़े पर अमल कररहा है जिस पर चीन अमल नहीं करसकता, इस लिए वो समझते हैं कि अमरीकी अवाम भी हिन्दुस्तानी अवाम से क़ुरबत महसूस करते हैं।

बारक ओबामा ने कहा कि उन्हें अमरीकी मईशत को बचाने पर फ़ख़र है क्योंकि वो अपने मुल्क को ज़्यादा ताक़तवर और ज़्यादा ख़ुशहाल बनाना चाहते हैं और इस केलिए उन्हें अभी बहुत कुछ करना बाक़ी है ।

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