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अमेरिका का मुस्लिम देशों को ठेंगा, दस सालों में इजरायली मिलिटरी को 38 अरब डॉलर

वॉशिंगटन।अमेरिका अगले 10 सालों में इजरायली मिलिटरी को 38 अरब डॉलर मुहैया कराएगा। अमेरिका ने अब तक इससे बड़ी रकम किसी भी देश को मिलिटरी मदद के रूप में नहीं दी है। इसे लेकर महीनों से दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि दोनों देश 10 सालों के समझौते पर पहुंचने में कामयाब रहे। बुधवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर हो गया। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है इस अमेरिकी मदद से अरब वर्ल्ड की नींद उड़नी लाजिमी है। अमेरिका अरब के साथ तो रहना चाहता है लेकिन कमजोर इजरायल की कीमत पर नहीं। अमेरिका और इजरायल ने वास्तविक रकम का खुलासा नहीं किया है लेकिन इस समझौते से जुड़े करीबी अधिकारियों का कहना है कि एक साल में अमेरिका 3.8 बिलियन डॉलर देगा। इसके बाद वह प्रत्येक वर्ष 10 सालों तक 3.1 बिलियन डॉलर मुहैया कराएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नैशनल सिक्यॉरिटी अडवाइजर सुजन राइस ने इस समझौते में अहम भूमिका निभाई है। ओबामा प्रशासन ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में स्टेट डिपार्टमेंट के साथ सुजन राइस भी शामिल रहीं।

इजरायल के ऐक्टिंग नैशनल सिक्यॉरिटी अडवाइजर जैकब नाजेल भी इसे लेकर वॉशिंगटन पहुंचे हुए हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतयाहू ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर इस समझौते की पुष्टि की है। नेतनयाहू ने कहा कि दोनों देश समझौते पर पहुंच गए हैं। हालांकि उन्होंने इस मामले में और जानकारी नहीं दी। इस समझौते के तहत इजरायल फंड के कुछ हिस्से को मिलिटरी प्रॉडेक्ट्स पर खर्च करेगा। इजरायल अपनी मिलिटरी को नई तकनीक से जोड़ेगा। अंततः सारी रकम अमेरिकन मिलिटरी इंडस्ट्रीज पर खर्च होगा। फंड के कुछ हिस्से को इजरायल आंतरिक रूप से भी खर्च करेगा।

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