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अमेरिकी संसद में H-1B वीजा बिल पेश, भारतीय IT कंपनियों का शेयर गिरा

नई दिल्ली।  ऐसा पहली बार हो रहा है अमेरिका के राष्ट्रपति की नीतियों की असर  भारतीय शेयर बाजार में पड़ रहा है।  अमेरिकी संसद में H-1B वीजा बिल पेश किया गया है। अमेरिकी संसद में पेश इस बिल से अमेरिकी कंपनियों में विदेशी मूल के कर्मचारियों की रोजगार मिलना मुश्किल हो जाएगा। ट्रंप सरकार के इस फैसले से भारतीय कंपनियों के शेयर भी मंगलवार को धड़ाम से गिर गए।

टेक महिंद्रा के शेयर में 9.68 फीसदी, एचसीएल टेक्नोलॉजी में 6.25 फीसदी, टीसीएस में 5.46 प्रतिशत और इंफोसिस के शेयर में 4.57 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

H1-B वीजा के आधार पर हजारों भारतीय अमेरिका में गूगल व माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक कंपनियों में काम करते हैं। कयास ये लगाया जा रहा है इस नए बिल से भारत की इंफोसिस और विप्रो जैसी आईटी कंपनियां प्रभावित होंगी। साथ ही इनसे माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और एपल जैसी कंपनियों की भारतीयों की नियुक्ति पर भी रोक लग जाएगी।  आप को बता दे भारतीय आईटी कंपनियों का आधे से अधिक रेवेन्यू अमेरिका से ही आता है।

क्या है H-1B वीजा

एच1बी वीजा ऐसे विदेशी पेशेवरों के लिए जारी किया जाता है जो ऐसे ‘खास’ कार्य में कुशल होते हैं। इसके लिए आम तौर उच्च शिक्षा की जरूरत होती है। अमेरिकी सिटीजनशिप और इमिग्रेशन सर्विसेज के अनुसार, इन ‘खास’ कार्यों में वैज्ञानिक, इंजीनियर और कंप्यूटर प्रोग्रामर शामिल हैं। हर साल करीब 65000 ऐसे वीजा जारी किए जाते हैं।

अमेरिकी कंपनियां इन वीजा का इस्तेमाल उच्च स्तर पर बेहतरीन कुशल पेशेवरों की नियुक्ति के लिए करते हैं. हालांकि अधिकतर वीजा आउटसोर्सिंग फर्म को जारी किए जाते हैं। यह आरोप लगता रहा है कि ऐसी फर्में इन वीजा का इस्तेमाल निचले स्तर की टेक्नोलॉजी नौकरियां भरने के लिए करते हैं। इसके अलावा इसमें लॉटरी सिस्टम से ऐसी आउटसोर्सिंग फर्म को फायदा होता है जो बड़ी संख्या में आवेदन करते हैं।

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