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अमेरीकी सिफ़ारतख़ाना पर क़बज़ा की 33 वीं सालाना याद

तेहरान, ०३ नवंबर (ए एफ़ पी) तेहरान में अमेरीकी सिफ़ारतख़ाना पर क़बज़ा की 33 वीं सालाना याद के मौक़ा पर आज हज़ारों ईरानियों ने अमेरीका मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए अमेरीकी परचमों को नज़र-ए-आतिश किया ( जलाया) । ये वाक़िया एक ऐसे वक़्त पेश आया है

तेहरान, ०३ नवंबर (ए एफ़ पी) तेहरान में अमेरीकी सिफ़ारतख़ाना पर क़बज़ा की 33 वीं सालाना याद के मौक़ा पर आज हज़ारों ईरानियों ने अमेरीका मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए अमेरीकी परचमों को नज़र-ए-आतिश किया ( जलाया) । ये वाक़िया एक ऐसे वक़्त पेश आया है जबकि अमेरीका में चंद दिन बाद अमेरीका में सदारती इंतिख़ाबात (चुनाव) के लिए राय दही होगी।

ईरानी मुज़ाहिरीन ने अमेरीका के साबिक़ सिफ़ारतख़ाना के रूबरू एहतिजाज के दौरान अमेरीका के इलावा इसराईल और बर्तानिया के ख़िलाफ़ भी शदीद नारा बाज़ी की और इन तीनों ममालिक के परचमों (झंडो) को नज़र-ए-आतिश कर दिया गया।

ईरानी हुक्काम जिन्होंने इस सालाना यादगार का एहतिमाम किया था, अमेरीका के साबिक़ सिफ़ारतख़ाना को जासूसों का अड्डा क़रार दिया। ये भी एक इत्तिफ़ाक़ है कि इस साल ये सालाना एहतिजाज एक ऐसे वक़्त मुनाक़िद ( आयोजित) हुआ है जब अमेरीका में आइन्दा मंगल को सदारती इंतिख़ाबात ( चुनाव) मुनाक़िद ( आयोजित) होंगे जिस में सदर ओबामा और उन के रिपब्लिकन हरीफ़ मिट रोमनी के दरमयान सख़्त मुक़ाबला है, लेकिन दोनों क़ाइदीन ( लीडर) ने अपनी ख़ारिजा पालिसी बयान करते हुए ईरान के मुतनाज़ा ( विवादित) न्यूक्लीयर प्रोग्राम की सख़्त मुख़ालिफ़त ( विरोध) की है और कहा है कि ख़ारिजा पालिसी में ये मसला सर-ए-फ़हरिस्त (सूचीबद्व) रहेगा।

मौजूदा डेमोक्रेटिक सदर बारक ओबामा ने कहा था कि ईरानी न्यूक्लीयर प्रोग्राम दुनिया के लिए संगीन तरीन ख़तरा है, लेकिन ईरान ने अपने न्यूक्लीयर प्रोग्राम पर मग़रिबी ममालिक के शकूक-ओ-शुबहात को मुस्तर्द कर दिया है और कहा है कि इसका ये प्रोग्राम न्यूक्लीयर अस्लाह बनाने की कोशिश के लिए नहीं बल्कि सिर्फ़ तवानाई की पैदावार और तिब्बी मक़ासिद पर मबनी ( बनी / निर्धारित) है।

वाज़िह रहे कि 4 नवंबर 1979 को तेहरान में वाक़्य ( मौजूद) अमेरीकी सिफ़ारतख़ाना पर इस्लाम पसंद ईरानी तलबा ने क़बज़ा कर लिया था और इस में मौजूद 52 अमेरीकी सिफ़ारतकारों को 444 दिन तक अपना यरग़माल ( बंधक) बना लिया था।

आज के एहतिजाजी मुज़ाहरा ( प्रदर्शन) के ज़रीया ये सालाना याद मनाई गई जो फ़ारसी तक़वीम के एतबार से 2 नवंबर को मुक़र्रर थी।

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