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अयोध्या मामले में सुलह नहीं चाहती थी विहिप: निर्मोही अखाड़ा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के अहम मुद्दई हाशिम अंसारी के बयान के बाद अब इस मामले से जुड़े एक दिगर मुद्दई निर्मोही अखाड़ा भी इस बात से सहमत है कि इस मुद्दे पर हमेशा से सियासतबाज़ी होती आई है और सुलह क

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के अहम मुद्दई हाशिम अंसारी के बयान के बाद अब इस मामले से जुड़े एक दिगर मुद्दई निर्मोही अखाड़ा भी इस बात से सहमत है कि इस मुद्दे पर हमेशा से सियासतबाज़ी होती आई है और सुलह के बजाय कुछ लोगों ने ज़ाती मुफादात के लिए राम मंदिर के नाम पर हिंदुओं व मुसलमानों को लड़वाया।

निर्मोही अखाड़े के महंत रामदास ने कहा कि एक बार सुलह की कोशिश की गयी थी , लेकिन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कुछ लीडरों के अड़ंगे की वजह से ही हाशिम अंसारी और अखाड़ा परिषद के बीच सुलह नहीं हो पाई।

महंत ने कहा कि हनुमानगढ़ी के पास मुतनाज़ा जमीन को लेकर अखाड़ा कौंसिल और हाशिम अंसारी के बीच सुलह तकरीबन हो गई थी और बकायदा इसका मसौदा भी तैयार कर लिया गया था, लेकिन विहिप के कुछ लीडरों ने अडंगा लगा दिया। उन्होंने कहा कि विहिप वालों को लगा कि आगर अखाड़ा कौंसिल और हाशिम अंसारी के बीच सुलह हो गई तो उनके किए कराए पर पानी फिर जाएगा और इसका पूरा फायदा अखाड़े को मिल जाएगा।

इसी खदशे से विहिप के कुछ लीडरों ने जानबूझकर अडंगा लगा दिया।

महंत ने कहा कि 64 सालों से यह मामला लटका हुआ है, लेकिन जब इस मामले का एक अहम मुद्दई यह कहने को तैयार है कि रामलला अब तिरपाल में नहीं रहेंगे, तो उनके दर्द को भी समझा जा सकता है। सियासतबाज़ी से वे भी मजरूह हैं और हम भी। उन्होंने कहा कि अयोध्या के हिंदू और मुसलमान आपसी हमआहंगी और भाईचारे के साथ रहने को तैयार हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसा नहीं चाहते।

आज हालात यह है कि बाहर से टूरिस्ट यहां आने को तैयार नहीं हैं। बाहर से लोग आएंगे नहीं तो सरमायाकारी कौन करेगा और यहां की हालत कैसे सुधरेगी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर तनाज़े की वजह से लोग यहां रामलला के दीदार करने आने से कतराते हैं। लोगों को हमेशा ही दंगे और दहशतगर्दाना वाकिया होने का डर सताता रहता है।

महंत रामदास ने कहा कि यह कितनी मायूसी की बात है कि अकींदतमंद बनारस, मथुरा और लुंबिनी तो दीदार के लिए तो जाते हैं, लेकिन रामलला का दीदार करने अयोध्या लोग आना नहीं चाहते। अकीदतमंदो के न आने की वजह लीडरों की सियासतबाज़ी ही तो है। राम की नगरी अयोध्या की तरक्की न होने की टीस महंत रामदास के मन भी दिखाई दी। उन्होंने कहा कि आज यहां आने वाले टूरिस्टों के लिए किसी तरह की सहूलियात नही दी गई हैं।

सेक्युरिटी का हाल बुरा है। सड़कें खराब हैं। अकीदतमंदों के ठहरने का कोई इंतज़ाम नहीं है। इंटरनैशनल सतह का हवाईअड्डा नहीं है, ताकि लोगों से इस मज़हबी मुकाम का सीधा जुड़ाव हो सके।

महंत रामदास ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी से भी अखाड़े को काफी उम्मीदें हैं। अब मरकज़ में मुकम्मल अक्सरियत के साथ उनकी सरकार बनी है तो हममें भी जल्द से जल्द मंदिर तामीर की आस जगी है। महंत ने कहा कि हम तो चाहते हैं कि मोदी इस पर गौर करें और एक काबिल कुबूल रास्ता निकालकर मंदिर की तामीर का रास्ता साफ करें।

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