Thursday , October 19 2017
Home / Khaas Khabar / अयोध्या में मंदिर के साथ मस्जिद बनाने का फॉर्म्युला

अयोध्या में मंदिर के साथ मस्जिद बनाने का फॉर्म्युला

अयोध्या में मुतनाज़ा बाबरी मस्जिद ज़मीन के आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट के लिए उम्मीद की एक नई रौशनी नजर आई है। 65 साल से मुतनाज़ा इस मसले के हल के लिए दोनों फरीक एक फॉर्म्युले के साथ आए हैं, जिसके मुतबैक 70 एकड़ के इस मुतनाज़ा ज़मीन में मंदिर और म

अयोध्या में मुतनाज़ा बाबरी मस्जिद ज़मीन के आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट के लिए उम्मीद की एक नई रौशनी नजर आई है। 65 साल से मुतनाज़ा इस मसले के हल के लिए दोनों फरीक एक फॉर्म्युले के साथ आए हैं, जिसके मुतबैक 70 एकड़ के इस मुतनाज़ा ज़मीन में मंदिर और मस्जिद दोनों बनाए जाएं और उन्हें एक 100 फीट उंची दीवार से बांट दिया जाए।

इस मामले में मुसलमानों की तरफ से सबसे बुजुर्ग वादी हाशिम अंसारी और अखाड़ा परिषद के सरबराह हंत ज्ञान दास ने पीर के रोज़ इस तजवीज पर बहस करने के लिए हनुमान गढ़ी में मुलाकात की।

इस केस में हिंदुओं का मुकदमेबाज़ निर्मोही अखाड़ा है, जो कि अखाड़ा परिषद के तहत ही आता है। अंसारी और दास ने कहा कि इस पूरी बातचीत में विश्व हिंदू परिषद को शामिल नहीं किया जाएगा।

महंत ज्ञान दास ने कहा, ‘हमने अपनी तजवीज को लेकर तकरीबन सारे हिंदू इदारों और अहम रुहानी गुरूओं से चर्चा की है। इस फॉर्म्युले पर सभी सहमत दिख रहे हैं। जल्द ही हम पीएम नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और अपना प्रपोजल उनके सामने रखेंगे। हम इस तनाज़े को पुर अमन तरीके के हल करने के लिए उनकी मदद चाहते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘वीएचपी इस अमल का हिस्सा नहीं है, क्योंकि इसके लीडर कभी भी राम मंदिर बनाना ही नहीं चाहते थे, उनका मकसद सिर्फ फिर्कावाराना तनाव पैदा करना है।’

दास ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि मतनाज़े ज़मीन पर राम मंदिर और मस्जिद दोनों बनें लेकिन बाद में कोई मतनाज़ा न हो इसलिए दोनों के बीच एक 100 फीट से उंची दीवार बनाई जाए। हम बातचीत के आखिरी दौर में हैं और जैसे ही फाइनल ड्राफ्ट तैयार हो जाता है हम इसे सुप्रीम कोर्ट के समने पेश करेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘हम ऐसे किसी भी काम के हक में नहीं है जिससे हमारे मुस्लिम भाइयों को लगे कि वे हारे हुए हैं। इसलिए हम वीएचपी और बीजेपी के इस रुख की कड़ी मज़म्मत करते हैं कि मस्जिद को अयोध्या की पंचकोशी परिक्रमा की सरहद के बाहर बनाया जाए। हमें मुट्ठी भर वीएचपी लीडरों की कोई परवाह नहीं है। हम सिर्फ हिंदुस्तान के शहरियों की परवाह करते हैं।’

ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी के कन्वेनर जफरयाब जिलानी ने कहा कि उन्हें अंसारी और अदालत में उनके रुख को लेकर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, ‘उनके और हमारे बीच जो बहस हुई है उसकी बुनियाद पर मैं यह कह सकता हूं कि जो अंसारी का रुख है वही हिंदुस्तान के सारे मुसलमानों का भी है। यह यकीन करने का कोई वजह् ही नहीं है कि वह अपने रुख से पलट जाएंगे।’

हालांकि यह केस अभी सुप्रीम कोर्ट में है, लेकिन इस केस से जुड़ी मुख्तलिफ पार्टियां आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट के रास्ते भी तलाश रही हैं। अयोध्या मुतनाज़ा 1950 से ही जारी है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मसले पर 30 सितंबर 2010 को अपना फैसला सुनाया था। अपने फैसले में कोर्ट ने मतनाज़ा ज़मीन को भगवान राम का पैदाइशी मुकाम बताया था और मतनाज़ा अहाते का दो-तिहाई हिस्सा हिंदू पार्टी को देकर बाकी का एक-तिहाई हिस्सा मुस्लिम पार्टी को दे दिया था।

TOPPOPULARRECENT