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अरबों और मुसलमानों में इत्तिहाद और यकजहती वक़्त का तक़ाज़ा

ख़ादिमुल हरमैन अश्शरीफ़ैन और नए सऊदी फ़रमांरवा शाह सलमान बिन अबदुल अज़ीज़ ने क़ौम से अपने पहले नशरी ख़िताब में मुसलमानों और अरब अक़्वाम में इत्तिहाद और यकजहती पर ज़ोर देते हुए कहा हमारी अरब और इस्लामी उम्मा को आज ग़ैर मामूली हद तक इत्तिहा

ख़ादिमुल हरमैन अश्शरीफ़ैन और नए सऊदी फ़रमांरवा शाह सलमान बिन अबदुल अज़ीज़ ने क़ौम से अपने पहले नशरी ख़िताब में मुसलमानों और अरब अक़्वाम में इत्तिहाद और यकजहती पर ज़ोर देते हुए कहा हमारी अरब और इस्लामी उम्मा को आज ग़ैर मामूली हद तक इत्तिहाद और यकजहती की ज़रूरत है।

सऊदी अरब के सरकारी ख़बररसां इदारे सऊदी प्रैस एजेंसी के मुताबिक़ शाह सलमान ने अपने पहले नशरी ख़िताब में बानी ममलकत शाह अबदुल अज़ीज़ बिन सऊद के रास्ते पर रखने के अज़म का इज़हार भी किया।

शाह सलमान का कहना था हम अल्लाह की मदद से इसी सीधे रास्ते पर रहेंगे, जो ममलकत सऊदीया के क़ियाम से शाह अबदुल अज़ीज़ बिन सऊद और उन के बाद उन के साहबज़ादों ने अख़्तियार किए रखा है।

अल अर्बिया न्यूज़ चैनल के मुताबिक़ शाह सलमान ने अपने पहले ख़िताब में मज़ीद कहा अल्लाह ने हमें इस ममलकत को इस सरज़मीन पर क़ायम करने का मौक़ा दिया, जिसे अल्लाह रब्बुल इज़्जत ने ना सिर्फ़ अपने पैग़ाम के लिए मुंतख़ब किया बल्कि उसे मुसलमानाने आलम का क़िबला भी क़रार दिया।

उन्हों ने कहा हमारा इत्तिहाद के फ़रोग़ का सफ़र अपनी क़ौम के दिफ़ा के लिए है और यही इस्लाम की सच्ची तालीमात से मिलने वाली रहनुमाई है, अल्लाह ने हमारे लिए इस मज़हब को अमन, मेहरबानी और एतेदाल पसंदी के लिए पसंद किया है।

शाह सलमान ने कहा मैंने अल्लाह से रहनुमाई की दुआ की है कि वो मुझे अपनी महबूब अवाम की ख़िदमत करने और उन की तवक़्क़ुआत का इदराक करने की तौफ़ीक़ दे और हम अपने मुल्क और क़ौम की सालमीयत और इस्तेहकाम का तहफ़्फ़ुज़ कर सकें।

19 साल की उम्र में उन्हें अमीर रियाज़ मुक़र्रर किया गया और बादअज़ां वो पचास बरस तक रियाज़ के गवर्नर रहे। 2011 में शाह अबदुल्लाह ने उन्हें ममलकत का वज़ीरे दिफ़ा मुक़र्रर किया जब कि 2012 में वो ममलकत के वलीअहद क़रार पाए।

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