Friday , August 18 2017
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अरुणाचल प्रदेश के सियासी चाल में कांग्रेस बीजेपी पर भारी

नई दिल्ली कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में हार के करीब पहुंचकर बाजी पलट दी। बीजेपी की बात करें तो वह कलिखो पुल और उनके समर्थक विधायकों को लेकर बहुत ज्यादा भरोसे में थी, लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इस खेमे में सेंध लगा दी। कलिखो पुल के जरिए बीजेपी सीमावर्ती अरुणाचल प्रदेश में स्थापित होने की कोशिश में थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नबाम तुकी सरकार को दोबारा सत्ता सौंपे जाने के फैसले के बाद कांग्रेस और उसके बागी विधायकों में बात होनी शुरू हुई थी।

फाइव स्टार होटल में विधायकों को ठहराना और कैमरों के सामने परेड कराना बीजेपी को अपने पक्ष में लग रहा था। लेकिन कमरों के अंदर कुछ अलग ही माहौल था, कांग्रेस के बागी भी गुटों में बंटे हुए थे और कांग्रेस के मध्यस्थों के फोन कॉल्स पर बिजी थे। कांग्रेस के प्रस्ताव पर कभी हां और कभी न कर रहे थे। कलिखो पुल की नाक के नीचे बी कई दिनों तक यह चलता रहा। इस पूरे ऑपरेशन की अगुवाई तुकी ही कर रहे थे, वहीं गुवाहाटी से भी कुछ कांग्रेस नेता सक्रिय थे। तुकी द्वारा इस बात का पता लगा लेना कि बागी विधायक पुल के कामकाज से खुश नहीं हैं, कांग्रेस के पक्ष में गया। इसके अलावा बीजेपी के ‘अहंकारी’ रवैये से भी ये लोग आहत थे। इन स्थितियों का आकलन करने के बाद ही तुकी ने अपना ऑपरेशन शुरू किया।

एक सप्ताह तक भगवा दल की मेहमाननवाजी का फायदा उठाने वाले विधायक शुक्रवार की शाम को गुवाहाटी से रवाना हुए थे। तब माना जा रहा था कि ये विधायक तुकी को विश्वासमत में मात देने के लिए पहुंचे हैं। बीजेपी के रणनीतिकारों ने पूरे भरोसे के साथ उन्हें भेजा था। लेकिन विधायकों के काफिले के इटानगर पहुंचने के बाद वह भगवा रडार की पहुंच से बाहर हो गए। इसके बाद गुवाहाटी से आने वाले फोन कॉल्स को नजरअंदाज किया जाने लगा। इन विधायकों ने समीकरणों पर चर्चा की और कुछ कारें तुकी के आवास पर जा पहुंचीं।

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