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अल्पसंख्यक आयोग ने बैंकों से पूछा, क्या हैदराबाद के पुराने शहर में नकदी डाली जा रही है

हैदराबाद: राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने बुधवार को कहा कि नोटबंदी के बाद हैदराबाद के पुराने शहर में नकदी भेजने को लेकर भेद-भाव की शिकायतें मिलने के बाद उसने भारतीय रिजर्व बैंक और विभिन्न बैंकों से इस संबंध में सूचना मांगी है। आयोग के अध्यक्ष आबिद रसूल खान ने पीटीआई को बताया कि उन्होंने चार सवाल तैयार किए हैं।

पहला तो यह किया गया है कि क्या शहर के पुराने और नए क्षेत्रों में स्थित बैंक शाखाओं में बराबर राशि भेजी जा रही है? दूसरा यह कि क्या एटीएम में नकदी समान अंतराल और समान मात्रा में डाली जा रही है? और तीसरा ये पूछा गया है कि पुराने शहर में कितने एटीएम काम कर रहे हैं और कितने नहीं और क्या नए नोटों के हिसाब से उन्हें तैयार किया गया है? और उनसे यह भी पूछा है कि क्या वे आरबीआई के सभी दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

आबिद रसूल ने कहा, “अभी तक छह बैंकों ने जवाब दिया है। उनका कहना है कि कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है और एटीएम में नकदी समान रूप से डाली जा रही है। बैंकों का कहना है कि उन्होंने पुराने शहर के निवासियों को नकदी देने के लिए अधिकारी तैनात किए हैं।”

उन्होंने बताया है कि आयोग ने बैंकों से कहा है कि वे पुराने शहर में धर्मिक भेदभाव किए बगैर लोगों का खास ख्याल रखें। क्योंकि वहां ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर हैं। आयोग ने बैंकों से मोबाइल शाखाएं लगाने को भी कहा गया है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया था कि हैदराबाद के पुराने शहर में जान-बूझकर पैसे नहीं डाले जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि चुंकि यह इन इलाकों में मुसलमान की संख्या अधिक है इस लिए यह भेदभाव किया जाता है।

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