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अल्लाह के हुक्म पर अमल करने की तलक़ीन

जामा मस्जिद कोरटला में बरोज़ हफ़्ता बाद नमाज़ मग़रिब अमीर मुक़ामी जमात-ए-इस्लामी हिंद शाख़ कोरटला

जामा मस्जिद कोरटला में बरोज़ हफ़्ता बाद नमाज़ मग़रिब अमीर मुक़ामी जमात-ए-इस्लामी हिंद शाख़ कोरटला
मुहम्मद नईम उद्दीन की ज़ेर-ए-निगरानी एस आई ओ शाख़ कोरटला के ज़ेर-ए-एहतिमाम मुनाक़िदा जलसे से मुख़ातब करते हुए हामिद मुहम्मद ख़ां सदर एम पी जे आंध्र प्रदेश-ओ-उडीशा ने हज़रत इबराहीम(AS) की हालात-ए ज़िंदगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि हज़रत इबराहीम(AS) का तआरुफ़ पेश करते हुए क़ुरआन हकीम ने जो अंदाज़ इख़तियार क्या, वो अंदाज़ बहुत ही अनोखा है जिस में कहा गया है कि हम ने इबराहीम (AS) को चंद कलिमात में आज़माया और इबराहीम(AS) उन पर खरे उतरे।

अगर हम इबराहीम (AS) कि ज़िंदगी का जायज़ा लें तो क़ुरआन मुक़द्दस में हज़रत मूसा (AS) के बाद किसी पैग़ंबर का ज़्यादा ज़िक्र आया है तो हज़रत इबराहीम (AS)का ज़िक्र है।

हज़रत इबराहीम (AS) का तआरुफ़ क़ुरआन मजीद ने मुख़्तलिफ़ अंदाज़ में पेश किया है। जब इबराहीम (AS) को आग में डाला जारहाथा तो आग की फ़ित्रत को देखिए, अल्लाह पर तवक्कल तो देखिए, हज़रत इबराहीम (AS) का दिल अल्लाह ताआला के हुज़ूर में हाज़िर था।

हम अपने दिल को झुका हुआ क़लब बनाईं, क़लब सलीम रखें, क़लब हलीम रखें। जब अल्लाह ताआला का हुक्म आजाए तो हम अपने आप को अल्लाह ताआला के हुक्म के आगे झुका दीं।

उन्होंने कहा कि हज़रत इबराहीम(AS) कई बार आज़माऐ गए। उन्होंने कहा कि क़ुर्बानी दरअसल सुन्नते इबराहीमी(AS) है। अल्लाह ताआला ने उसे रेहती दुनिया तक के लिए ज़िंदा रखा है।

उन्होंने कहा कि क़ुर्बानी किया है , अपनी ख़ाहिशात, अपने जज़बात और अपनी अनानीयत को क़ुर्बान किया जाये। क़ुर्बानी सिर्फ़ जानवर के गले पर छुरी फेरने का नाम नहीं है।

उन्होंने कहा कि आज हम गाय बकरों के गले पर तू छुरी फेर रहे हैं, लेकिन जब तक हमारे ग़ैर इस्लामी फ़िक्र-ओ-अमल जारी हैं तो फिर हमें क़ुर्बानी का मक़सद कैसे हासिल होसकता है!

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