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अल्लाह हु अकबर में सारे वेदों का निचोड़ : शंकर आचार्य स्वामी लक्ष्मी

हैदराबाद। १५ मार्च (सियासत न्यूज़) स्वामी लक्ष्मी शंकर आचार्य बानी हिन्दू मुस्लिम एकता मंच ने आज कहा कि दुनिया का सब से अच्छा नारा अल्लाह अकबर है। इस एक नारा में सारे वेदों का निचोड़ है। ख़ातिम-उन-नबिय्यीन मुहम्मद सिल्ली अल्लाह अ

हैदराबाद। १५ मार्च (सियासत न्यूज़) स्वामी लक्ष्मी शंकर आचार्य बानी हिन्दू मुस्लिम एकता मंच ने आज कहा कि दुनिया का सब से अच्छा नारा अल्लाह अकबर है। इस एक नारा में सारे वेदों का निचोड़ है। ख़ातिम-उन-नबिय्यीन मुहम्मद सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम दुनिया के सब से अच्छे इंसान हैं। आप सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम जैसा इंसान कभी पैदा हुआ था और ना पैदा होगा। इस्लाम का दूसरा नाम इंसानियत ही, इसी लिए इंसानियतको बचाने की ज़िम्मेदारी सब से ज़्यादा मुस्लमानों पर ही आइद होती है। तौहीद इलहा में इस्लाम और सनातन वैदिक धर्म में जितनी यकसानियत है उतनी यकसानियत किसी और मज़ाहिब से नहीं हैं। हत्ता कि यहूदी और ईसाई मज़ाहिब से भी नहीं हैं।

ईसाईयों ने भी हज़रत ईसा अलैहि वसल्लम को अल्लाह का बेटा मान कर तौहीद की नफ़ी करदी ही। अमन का दरस देने वाले दीन इस्लाम को दहश्तगर्दी से जोड़ कर सब से बड़ी नाइंसाफ़ी की गई ही। स्वामी लक्ष्मी शंकर आचार्य आज यहां एक जल्सा-ए-आम हमारा समाज हमारी ज़िम्मेदारीयां से ख़िताब कररहे थे जिस का एहतिमाम तहरीक पयाम इंसानियत फ़ोर्म-ओ-चियार टेबल ट्रस्ट हैदराबाद ने किया। जलसा की सदारत मौलाना अबदुल्लाह हसनी नदवी ने की। स्वामी लक्ष्मी शंकर आचार्य ने कहा पहले मैं समझता था कि नारा तकबीर अल्लाह अकबर फ़साद झगड़े का नारा है।

मैंने मुस्लमानों को देख कर इस्लाम समझा था और जब दहश्त गिरदाना वाक़ियात रौनुमा-ए-हुए और मीडीया के ग़लत प्रोपगंडा से मुतास्सिर होकर ये समझ बैठा था कि इस्लाम ही सब से बड़ा ख़तरा है और एक किताब इस्लामी आंतकवाद की तारीख़ तसनीफ़ की मगर जब इस्लाम के बारे में सही जानकारी मिली तो मैंने इस किताब को सिफ़र कर डाला और फिर एक नई किताब इस्लाम: आंतक या आदर्श तहरीरकी। शंकर आचार्य ने कहा कि ख़ालिक़ ने इंसान को अशरफ़-उल-मख़लूक़ात बनाया और इस में अच्छे बुरे की तमीज़ करने और फ़ैसला करने की क़ुव्वत दी है जिसे वीवीक (मार्फ़त) कहते हैं। मार्फ़त का सही इस्तिमाल ही इंसानियत है मगर जब ये क़ुव्वत ख़तन होजाती है तो इंसान ज़ना, ग़ुस्सा, ग़रूर, हिर्स और तुम्ह का शिकार बन जाता ही। मार्फ़त को ख़तनकरनेवाली इन पाँच बुराईयों पर ख़शीयत इलहा से क़ाबू पाया जा सकता है और इंसान में अपने रब का ख़ौफ़ मज़हब से हासिल होता है जिस को आज इंसानियत का गला घोंटने इस्तिमाल किया जा रहा है।

सियासतदां इंसानियत को बांटने मज़हब का इस्तिहसाल करने लगे हैं और मज़हब को सियासत से दूर करने की कोशिश कररहे हैं जबकि हक़ीक़त ये है कि मज़हब से पाक सियासत की मिसाल एक आज़ाद सांड की तरह है। उन्हों ने कहा कि मलिक के वज़ीर-ए-आज़म डाक्टर मनमोहन सिंह ने हाल में ब्यान दिया था कि मज़हबीबुनियाद परस्ती से मलिक को ख़तरा ही। स्वामी जी ने कहा कि उन्हें ताज्जुब है कि इतना बड़ा नेता इतनी बड़ी ग़लती कैसे क र सकता है। मज़हबी बुनियाद परस्त से किसी को ख़तरा नहीं हो सकता है बल्कि एक मज़हबी बुनियाद परस्त एक अच्छा इंसान साबित होता है।इंसानियत का पहला सबक़ अदम तशद्दुद है कि नीयत ज़बान और अमल से किसी कोतकलीफ़ ना पहुंचाई जाई। उन्हों ने बताया कि सनातन वैदिक धर्म में अपने रब से ताल्लुक़ पैदा करने के 8 मदारिज हैं। इस का पहला दर्जा ीइम है जिस के 10 हिस्से हैं।

पहला उसूल अदम तशद्दुद है और दूसरा उसूल हक़ ही। हक़ के मानी सिर्फ सच्चाई के नहीं हैं बल्कि ख़ालिक़ कायनात की वहदानीयत को तस्लीम करने के हैं। उन्हों ने वेदों को अश्लोक पेश करते हुए बताया कि वेदों में इश्वर फ़रमाता है कि ए इनसानो इबादत के लायक़ कोई और रब नहीं है सिवाए उस की इस जैसा कोई है और ना ही उस की कोई मूर्त या शक्ल ही। ख़ालिक़ कायनात वो है जिसे कोई आँख नहीं देख सकती बल्कि उस की मदद से आँखों की बसारत ही। उन्हों ने कहा कि ऐसे रब के लिए इस्लाम ने अल्लाह अकबर कहा ही। अल्लाह अकबर रब कायनात की सब से बेहतरीन तारीफ़ है जिस में तमाम वेदों का निचोड़ ही। उन्हों ने कहा कि वेदों में है कि वो परमेश्वर इतना बड़ा है कि इस की हद नहीं है। उन्हों ने बताया कि ओम और अल्लाह में बहुत ज़्यादा मुशाबहत पाई जाती ही। उन्हों ने कहा कि रब कायनात को छोड़कर दूसरे रब की इबादत करना सब से बड़ा आसतीह है। उन्हों ने कहा कि मार्फ़त को पाने हिर्स-ओ-तुम्ह, बदनिगाही और बिसयारख़ोरी से बचना, अफ़व दरगुज़र और सब्र को इख़तियार करना होगा। उन्हों ने क़ुरआन मजीद की मुख़्तलिफ़ आयात का हवाला देते हुए बताया कि इंसानियत का सब से बड़ा दरस क़ुरआन मजीद में है।

उन्हों ने कहा कि क़ुरआन मजीद में अल्लाह ताला फ़रमाता है कि ये आख़िरत का घर हम उन्ही को देते हैं जो मुल्क में ज़ुलम-ओ-फ़साद का इरादा नहीं रखते और नेक अंजाम तो परहेज़गारों का ही ही। (28:83)। इसी तरह एक और जगह अल्लाह ताला भलाई और बुराई की तमीज़ करवाते हुए फ़रमाता है और नेकी और बदी बराबर नहीं होती (बुराई का) दफ़ीअह इस बात से कीजिए जो अच्छी हो और फिर नागहां वो शख़्स तेरे और इस के दरमयान दुश्मनी थी ऐसा होगा गोया मुख़लिस दोस्त थी।

(41: 34)। स्वामी ने कहा कि एक जगह क़ुरआन मजीद में अल्लाह ताला फ़रमाता है जिस का ये मफ़हूम है कि जिस ने किसी बेक़सूर को क़तल किया गोया इस ने इंसानियत का क़तल किया और जिस ने किसी को ज़िंदगी बख़शी इस ने गोया तमाम इंसानों को ज़िंदगी बख़शी। (5:32)। इंसानियत का ऐसा दरस देने वाले इस्लाम को दहश्तगर्दी से जोड़ दिया गया है जो सब से बड़ी नाइंसाफ़ीही। उन्हों ने कहा कि अफ़व-ओ-दरगुज़र करने की तालीम देते हुए रब कायनात फ़रमाता है ए पैग़ंबर दरगुज़र कीजिए और नेकी का हुक्म दीजिए और जाहिलों से अलग राय। (7:199)। उन्हों ने कहा कि नबी आखिरुज़्ज़मां सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम हमेशादरगुज़र करते रहे हैं।

फ़तह मक्का के मौक़ा पर आप सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम ने इस्लाम के सब से बड़े दुश्मन मुख़ालिफ़ीन के सरदार अब्बू सफ़यानओ को माफ़ करने का ऐलान किया। जब आप सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम फ़ातिह बन कर मक्का मुकर्रमा मेंदाख़िल होरहे थे तो वो क़ुरैश जिन्हों ने आप को मक्का मुकर्रमा में ही नहीं बल्कि मदीना मुनव्वरा में भी तंग किया करते रहे थे अपनी जान बचाने घरों और मस्जिदों में पनाह ले रहे थी। नबी रहमत सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम ने फ़ातिह मक्का बन कर लोगों को माफ़ करने के बहाने ढूंढ रहे थी, इसी लिए आप सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम ने ये ऐलान किया कि आज ना सिर्फ अब्बू सफ़यानओ को माफ़ी है बल्कि अब्बू सफ़यानओ के घर में पनाह लेने वालों के लिए भी माफ़ी ही, माफ़ी उन लोगों के लिए भी है जो अपने अपने घरों में ख़ुद को बंद कर रखा है और उन्हें भी माफ़ी है जो मस्जिदों (इबादत ख़ानों) में पनाह ले रहे हैं।

यही वजह है कि रब कायनात ने क़ुरआन मजीद ने हज़रत मुहम्मद सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम को रहमता अललालमीन के लक़ब से मुलक़्क़ब किया है नबी रहमत सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम ने अल्लाह के इस हुक्म को अपने दिल में उतार लिया और इस का रहमत का पैकर बन गए और अपने सहाबा किराम (रिज़वान अल्लाह ताली अलैहिम अजामीन) को इसी का दरस दिया जिन के अमल को देख कर लोग इस्लाम में दाख़िल होते चले गई। स्वामी ने नबी रहमत सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम केउस्वा हसना की कई मिसालें पेश करते हुए बताया कि एक मर्तबा नबी करीम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम के घर एक ग़ैर मुस्लिम मेहमान आया था। हाज़मा की ख़राबी केबाइस बिस्तर पर ही वो पाएखाना कर डालता और ख़जालत के बाइस अली उल-सुबह बगै़र बताए ही वहां से निकल पड़ा था मगर कुछ दूर जाने के बाद उसे ख़्याल आया कि वो अपनी तलवार भूल आया है जिसे वापिस लेने जब वो नबी करीम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम के मकान पहुंचता है तो क्या देखता है कि पैग़ंबर इस्लाम ख़ुद वो बिस्तर धोरहे थे और एक सहाबी आप सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम से आजिज़ी कररहे थे कि ये काम उन्हें करने दिया जाय मगर नबी करीम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम ने उन्हें ये फ़रमाते हुए मना करदिया कि वो मेरा मेहमान था इस लिए ये काम वही करेंगी।

ये ग़ैर मुस्लिम जब ये मंज़र देखता है तो रोने लगता है और आप से इल्तिजा करता है कि उसे माफ़ करदिया जाय और वो फ़ौरी इस्लाम क़बूल कर लेता ही। उन्हों ने कहा कि जिस उम्मत के नबी कचहरा डालने वाली बढ़िया की तीमारदारी करते हैं ।

उन्हों ने इस्तिफ़सार किया कि ऐसे अहकाम को मानने वाले केस दहश्तगर्द होसकते हैं। इस्लाम नबी करीम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम और आप सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम के उम्मतीयों के अख़लाक़ हसनासे फैला तलवार से नहीं। नबी करीम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम ऐसे अख़लाक़ हमीदाके हामिल थे कि आप के दुश्मन भी क़ाइल थी। उन्हों ने जिहाद की ग़लत तस्वीर पेश किए जाने की भी मुज़म्मत की। मौलाना अबदुल्लाह हसनी नदवी ने अपनी सदारती तक़रीर में कहा कि अल्लाह की जो मदद करेगा अल्लाह उस की मदद करेगा।

आज ज़रूरत है कि हम ग़ैर मुस्लिमों तक सही इस्लाम पहुंचाएं जो क़ुरआन मजीद अहादीस मुबारका और उस्वाहसना का इस्लाम हैं । मुस्लमानों को एहसान से काम लेना होगा। उन्हों ने कहा कि ज़ईफ़ों और कमज़ोरों के साथ सिला रहमी करने का हमें दरस दिया गया है मगर आज हम हैं कि अपने ज़ईफ़ वालदैन की क़दर नहीं करते जबकि हमें ये हुक्म दिया गया है कि उन्हें उफ़तक ना कहो। जब हम ही अपने वालदैन को ओलड एज्ज होम्स में रखने लगें तो दूसरों को क्या दरस देंगी। जलसा से प्रोफ़ैसर कांचा ईलिया और मौलाना प्रोफ़ैसर मुहसिन उसमानी भी ख़िताब किया। मौलाना फ़सीह उद्दीन नदवी ने ख़ौरमक़दम किया और निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दी । इस मौके पर मौलाना डाक्टर शाहिद अली अब्बासी मौलाना ग़ियास उद्दीनरहमानी और मौलाना अबदालमलक मज़ाहरी भी मौजूद थी।

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