Saturday , October 21 2017
Home / Khaas Khabar / अशिया की मुफ़्त फ़राहमी के वादों से इंतिख़ाबी अमल मुतास्सिर: सुप्रीम कोर्ट

अशिया की मुफ़्त फ़राहमी के वादों से इंतिख़ाबी अमल मुतास्सिर: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली 6 जुलाई (पी टी आई) इलेक्शन कमीशन मुख़्तलिफ़ सयासी जमातों के इंतिख़ाबी मंशूर(घोषणापत्र) के मवाद को बाक़ायदा बनाने के लिए रहनुमा ख़ुतूत मुरत्तिब करने की हिदायत देते हुए इस तास्सुर का इज़हार किया कि सियासी जमातों की तरफ़ से वो

नई दिल्ली 6 जुलाई (पी टी आई) इलेक्शन कमीशन मुख़्तलिफ़ सयासी जमातों के इंतिख़ाबी मंशूर(घोषणापत्र) के मवाद को बाक़ायदा बनाने के लिए रहनुमा ख़ुतूत मुरत्तिब करने की हिदायत देते हुए इस तास्सुर का इज़हार किया कि सियासी जमातों की तरफ़ से वोटरों को राग़िब करने की ग़रज़ से मुताल्लिक़ा इंतिख़ाबी मंशूर में मुख़्तलिफ़ अशिया की मुफ़्त फ़राहमी के वादों से आज़ाद और मुंसिफ़ाना इंतिख़ाबात की जड़ें दहल जाती हैं।

अदालत-ए-उज़्मा(उच्च न्यानालय) ने कहा कि मौजूदा क़वानीन के तहत सियासी जमातों की तरफ़ से किए जानेवाले ऐसे वादे बदउनवानीयों, रिश्वत और लालच नहीं कहिलाय जाने लेकिन सयासी जमातों की तरफ़ से जारी किए जाने वाले इंतिख़ाबी मंशूर में भी ज़ाबता अख़लाक़ शामिल किया जाना चाहिए। जस्टिस पी सदाशिवम और जस्टिस रंजन गोगोई पर मुश्तमिल बेंच ने कहा कि अगरचे इस ज़िमन में क़ानून अवामी नुमाइंदगी की दफ़ा 123 में वाज़िह है कि इंतिख़ाबी मंशूरों में किए जाने वाले वादों की राय दहिंदों को लालच या रिश्वत देने की तशरीह नहीं होती, लेकिन इस हक़ीक़त को भी ख़ारिज अज़ बहस क़रार नहीं दिया जा सकता कि मुख़्तलिफ़ अशिया की मुफ़्त तक़सीम बिलाशुबा सारे अवाम पर असरअंदाज़ होती है। इस से आज़ाद ग़ैर जांबदार और मुंसिफ़ाना इंतिख़ाबात की जड़ें बड़ी हदतक दहल जाती हैं।

बेंच ने कहा कि इस बात को मल्हूज़ रखते हुए कि इंतिख़ाबी मंशूरों के बनाने के बारे में कोई क़ानून नहीं है, चुनांचे इलेक्शन कमीशन को हिदायत की जाती है कि वो तमाम मुसल्लेमा सियासी जमातों से मुशावरत के बाद इस ज़िमन में रहनुमा ख़ुतूत मुरत्तिब करे। सियासी जमातों और उम्मीदवारों की रहनुमाई एक ज़ाबता अख़लाक़ मुरत्तिब करने (नियम बनाने ) के साथ तमाम सियासी जमातों की तरफ़ से जारी किए जाने वाले इंतिख़ाबी मंशूर के लिए रहनुमा ख़ुतूत बनाने के लिए एक अलहदा शोबा क़ायम किया जाये।

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद मुख़्तलिफ़ सियासी जमातों के इंतिख़ाबी मंशूर भी इलेक्शन कमीशन की तन्क़ीह के दायरा कार में शामिल हो जाएंगे। इस फ़ैसले के दूररस असरात से इन सियासी जमातों की हौसलाशिकनी होगी जो मुफ़्त लैप टॉप्स, टेलीविज़न, ग्रैंड रस, मेक्सरस, बर्क़ी पंखे, चार ग्राम सोने के मंगल सूत्र, देने के वादे करते हुए राय दहिंदों को लुभाने की कोशिश किया करती हैं। सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि अगरचे इंतिख़ाबी ज़ाबता अख़लाक़ नाफ़िज़ होने से क़ब्ल ही इंतिख़ाबी मंशूर शाये कर दिया जाता है, लेकिन इलेक्शन अपने ज़ाबता अख़लाक़ के तहत उस की तन्क़ीह कर सकता है।

TOPPOPULARRECENT