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असम बोडो ने मुस्लिम प्रवासियों से बचाने के लिए रामदेव को दी 1,132 एकड़ भूमि

गुवाहाटी: असम में स्वायत्त आदिवासी परिषद ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के अतिक्रमण को रोकने के लिए अप्रयुक्त( इस्तेमाल में न आने वाली ) कृषि भूमि बाबा रामदेव के पतंजलि ट्रस्ट को दे दी है |
कई समूहों और संगठनो   के  विरोध के  बावुजूद इस साल चिरांग जिले में 1,132.5 एकड़ भूमि बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) को दे दी गयी थी|

ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) अध्यक्ष प्रमोद बोरो गुवाहाटी में रिपोर्टर्स से बात करते हुए कहा कि ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) ने गुरुवार को बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिलों (बीटीएडी) के चिरांग जिले में बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ (ट्रस्ट) के लिए कई हेक्टेयर भूमि के आवंटन का विरोध किया है । बीटीसी प्रशासन ने पिछले साल रामदेव के पतंजलि को ये जमीन सौंप दी थी और इस पर पहले से कुछ निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि ये ज़मीन पतंजलि को दी जाए |उन्होंने कहा कि बीटीएडी के लोग इस ज़मीन पर कोई  सरकारी संस्था बनवाना चाहते हैं जिससे स्थानीय निवासियों को कोई फ़ायदा हासिल हो |

बोरो ने आरोप लगाया कि जो ज़मीन ट्रस्ट को दी गयी इसमें कुछ क़ानूनी रूप से बोडो,राजबोंगशिस और कुछ मुसलमानों के स्वामित्व वाली है इसके अलावा सरकार के स्वामित्व वाले कुछ भूखंडों को भी ट्रस्ट को दिया गया है | इसके  लिए अभी जमीन के मालिकों को भुगतान नहीं किया गया है और न ही कोई मुआवज़ा दिया गया है | यहाँ तक की कई मालिकों को ये भी नहीं मालूम की उनकी ज़मीन किसी और को दी जा चुकी है |

छात्र नेता ने कहा कि असम में सबसे अधिक संघर्ष भूमि से संबंधित मुद्दों की वजह से हो रहे हैं इसलिए अधिकारियों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए । “बीटीसी प्रशासन कह रहा है क्षेत्र में अवैध आप्रवासियों द्वारा अतिक्रमण को रोकने के लिए जमीन पतंजलि को सौंप दी गयी है । ये क्या तर्क है ?असम में कई जगहों पर अतिक्रमण किया  गया है ऐसे क्या उन सब जगहों को पतंजलि को सौंप दिया जाएगा?

इस महीने असम विधानसभा में बजट सत्र के दौरान, राजस्व राज्य मंत्री पल्लब लोचन दास ने सदन को सूचित किया था कि बीटीसी प्राधिकरण ने  पतंजलि योगपीठ (ट्रस्ट) के लिए 484.93 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है ।

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