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असम में भाजपा सरकार के निशाने पर हैं मुसलमान, AMJP ने की चीफ जस्टिस से हस्तक्षेप की मांग

दिसपुर: असम माइनॉरिटीज जातीय परिषद (एएमजेपी) का कहना है कि असम में भाजपा सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्यों में दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है. उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की मांग की है. एएमजेपी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बाढ़ और कटाव से हुई बर्बादी के बाद जो गरीब मुस्लिम सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, उन्हें वहां से हटाया जा रहा है.

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राइजिंग कश्मीर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व विधायक अब्दुल अजीज ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा इन लोगों को किसी उचित राहत और पुनर्वास के बिना ही भेदभावपूर्ण तरीके से सरकारी जमीन से हटाया जाना बिल्कुल गलत है. उन्होंने बताया कि सभी समुदाय के लोग सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, क्योंकि यह जमीन वर्तमान में सरकार द्वारा उपयोग में नहीं लाई जा रही है. लेकिन केवल मुस्लिम समुदाय के लोगों को ही अतिक्रमण हटाओ के नाम पर परेशान किया जा रहा है, जबकि अन्य समुदाय के लोगों को वहाँ रहने की अनुमति दी जा रही है. उन्होंने कहा कि हम ने इस मामले में न्याय के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष एक याचिका दायर की है.
अल्पसंख्यक संगठन का कहना है कि पिछले साल मई में जब से भाजपा सत्ता में आई है, तब से उसका एक ही उद्देश्य है अल्पसंख्यकों को परेशान करना. अल्पसंख्यक नेताओं ने कहा कि जिन लोगों के पास 25 मार्च 1971 तक के वैध दस्तावेज हैं, उन्हें अवैध बांग्लादेशी के नाम पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए. असम समझौते के संशोधन धारा 6 ए के तहत उन लोगों को परेशान किए बिना, उचित राहत और पुनर्वास कार्य किया जाना चाहिए.

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