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अहल देवबंद ने हमेशा दार-उल-उलूम की मुआवनत की है : मौलाना अरशद मदनी

देवबंद, १३ जनवरी (फैक्स) दार-उल-अक़ामा दार-उल-उलूम की जानिब से 11 जनवरी की शाम को जामि रशीद मैं मुहतमिम दार-उल-उलूम मुफ़्ती मौलाना अबु-अल-क़ासिम की सदारत में मुनाक़िदा एक इस्लाही जलसा में उस्ताद हदीस मौलाना सैयद अरशद मदनी ने गुज़शता रोज़ दे

देवबंद, १३ जनवरी (फैक्स) दार-उल-अक़ामा दार-उल-उलूम की जानिब से 11 जनवरी की शाम को जामि रशीद मैं मुहतमिम दार-उल-उलूम मुफ़्ती मौलाना अबु-अल-क़ासिम की सदारत में मुनाक़िदा एक इस्लाही जलसा में उस्ताद हदीस मौलाना सैयद अरशद मदनी ने गुज़शता रोज़ देवबंद के तालिब-ए-इल्म अबदुल हमीद का भूरा मिठाई की दुकान पर जो झगड़ा हुआ था, इस के हवाले से कहा कि दार-उल-उलूम के तलबा-ए-को अहल देवबंद के तईं संजीदा और बावक़ार तरीक़े से पेश आना चाहीए क्योंकि वो लोग हमेशा से दार-उल-उलूम के मुआविन रहे हैं और देवबंद के हर घर से तलबा-ए-को खाना फ़राहम किया गया।

आप ने फ़रमाया कि अहल शहर के हर तबक़े का ताल्लुक़ दार-उल-उलूम से है और मैंने इस सूरत-ए-हाल और इस दौर को बचशम ख़ुद देखा है। आप ने तलबा से कहा कि वो शराफ़त की हद पार ना करें। क़ुरआन-ए-करीम की तालीमात तोड़फोड़ की इजाज़त नहीं देती। तलबा में क़ुव्वत-ए-बरदाशत होनी चाहीए।

आप ने तलबा से कहा कि अगर उन के साथ ज़ुलम हो तो नाज़िम दार-उल-अक़ामा से कहें या मुहतमिम साहिब से कहें। लिहाज़ा तलबा को इंतिज़ाम हाथ में ना लेना चाहीए। बल्कि असातिज़ा के पास आकर मसला का हल तलाश करें। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि दार-उल-उलूम के हालात ये हैं कि पूरी दुनिया में ये तहरीक है कि ये चिराग़ गुल हो जाए, इस्लाम दुश्मन ताक़तें आज बहाने तलाश कर रही हैं, अगर ये ताक़तें कामयाब हो गईं तो इदारे को चलाना आसान ना होगा।

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