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अक़िल्लीयतों के हुक़ूक़ का एहतेराम लाज़िमी : सदर जम्हूरिया

कोलकता: सदर जम्हूरीया हिंद प्रणब मुख़‌र्जी ने आज कहा कि हुक़ूक़ और हसासीयत अक़िल्लीयतों के बारे में काबिल-ए‍-एहतेराम है। उन्होंने कहा कि इस पर लफ़ज़न वो मानन अमल किया जाना चाहिए ताकि इस बात को यक़ीनी बनायाजा सके कि हर अक़िल्लीयत क़ौमी मंज़र का एक हिस्सा बन जाये।

प्रणब मुख़‌र्जी ने मज़हबी अदम रो अदाती के पस-ए-मंज़र में तबसेरा करते हुए कहा कि मुमलिकत को हर शहरी को मुसावी सुलूक और बेहतरीन सुलूक को यक़ीनी बनाने के लिए जद्द-ओ-जहद करनी चाहिए। उन्होंने अवाम से अपील की कि वो ज़ात पात और मज़हबी वफ़ादारियों से बालातर होजाएं।

उन्होंने कहा कि हमें वसी पैमाने पर इन्सानी नुक़्ता-ए-नज़र की हौसला-अफ़ज़ाई करनी चाहिए। हर शहरी को तालीम दी जानी चाहिए कि वो ज़ात पात और फ़िर्कावाराना वफ़ादारियों से बालातर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हमें हुक़ूक़ और अक़िल्लीयतों के बारे में हसासीयत का एहतेराम सीखना चाहिए और लफ़ज़न विमानन इस पर अमल करना चाहिए।

वो इंदिरा गांधी यादगारी लकचर एशियाटिक सोसाइटी कोलकता में दे रहे थे। उन्होंने कहा कि मियार-ए-ज़िंदगी में इज़ाफ़ा और इक़्तेदार में मौजूदा अदम तवाज़ुन को दूर करने पर तवज्जे मर्कूज़ की जानी चाहिए। दौलत आमदनी इस्तेमाल और समाजी ख़िदमात से इस्तिफ़ादा जैसे तालीमात और सेहत पर तवज्जे दी जानी चाहिए।

सदर जम्हूरिया ने कहा कि मुमलिकत को अपनी बेहतरीन कोशिश करनी चाहिए कि इलाक़ाई अदम तवाज़ुन दूर किया जाये और एक जायज़ मुंसिफ़ाना और अच्छा इंतेज़ामिया फ़राहम किया जाये जो हर फ़र्द से बलालिहाज़ ज़ात पात मज़हब नसल रंग सिनफ़ या मुक़ामे पैदाइश मुसावियाना और मुंसिफ़ाना सुलूक करे।

सदर जम्हूरिया ने कहा कि बाज़-औक़ात ऐसा नहीं होता। इलाक़ाई मुफ़ादात क़ौमी मुफ़ादात से वाबस्तगी पर ग़ालिब आजाते हैं। इस रुजहान को तर्क करना ज़रूरी है और हमें इस बारे में ख़बरदार रहना चाहिए। सदर जम्हूरिया ने कहा कि हमें एक सैकूलर और जम्हूरी नुक़्ता-ए-नज़र परवान चढ़ाना चाहिए।

ऐसा तर्ज़ हयात इख़तेयार करना चाहिए जो सबको साथ लेकर चलने वाला हो और हमारे शहरी फ़राइज़ और हुक़ूक़ के अलावा ज़िम्मेदारीयों में भी दख़ल अंदाज़ी ना करे। उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल बरक़रार रखना चाहिए जिसमें हर फ़िर्क़ा ख़ुद को क़ौमी मंज़र का एक हिस्सा तसव्वुर करे। प्रण‌ब मुख़‌र्जी ने कहा कि क़ौमी यकजहती का तक़ाज़ा है कि हर शहरी क़ौमी मुफ़ादात को इजतिमाई या इन्फ़िरादी मुफ़ादात पर तर्जीह दे।

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