Wednesday , October 18 2017
Home / Islami Duniya / अख़लाक़-ओ-इक़दार से आरी दुनिया को बिहार इस्लाम से हम आहंग किया जाये

अख़लाक़-ओ-इक़दार से आरी दुनिया को बिहार इस्लाम से हम आहंग किया जाये

हैदराबाद।12 जनवरी: अमीर जमात-ए-इस्लामी हिंद मौलाना जलाल उद्दीन अंसर उमरी ने आज यहां सहि रोज़ा बिहार इस्लाम कांफ्रेंस का इफ़्तेताह करते हुए कहा कि गोके आज दुनिया के बेशतर लोग इस्लाम से बुदकते@ हैं मगर इस्लाम ही है जो सिसकती इंसानियत क

हैदराबाद।12 जनवरी: अमीर जमात-ए-इस्लामी हिंद मौलाना जलाल उद्दीन अंसर उमरी ने आज यहां सहि रोज़ा बिहार इस्लाम कांफ्रेंस का इफ़्तेताह करते हुए कहा कि गोके आज दुनिया के बेशतर लोग इस्लाम से बुदकते@ हैं मगर इस्लाम ही है जो सिसकती इंसानियत को दोनों जहानों की कामयाबी-ओ-कामरानी का रास्ता दिखाता है और जिन के तसव्वुर से आज दुनिया का एक गोशा घबरा जाता है वही इंसानों के हुक़ूक़ की पासदारी और अदल के क़ियाम के लिए कोशां रहते हैं और अहकाम करानी की तामील में निगरानी करते हैं कि इंसानी जज़बा कोई ग़लत रुख़ इख़तियार ना कर जाये कि दूसरों के हुक़ूक़ की तलफ़ी हो।

मौलाना जलाल उद्दीन अंसर उमरी ने कहा कि यों तो हर दौर में मज़ाहिब-ओ-नज़रियात रहे हैं और मज़ाहिब-ओ-रब कायनात के मुनकिर भी रहे हैं मगर अल्लाह ताअल ने क़ुरआन मजीद में एलान किया कि इस का पसंदीदा दीन इस्लाम है।

उन्हों ने कहा कि क़ुरआन मजीद में रब कायनात ने ये ऐलान करते हुए बनीनौ इंसानी को ये जतलादया कि इस्लाम के सिवा-ए-कोई दूसरा रास्ता इख़तियार करोगे तो वो उसे ललहा सनद क़बूलियत हासिल नहीं होगी।

इस से इंसानों को ये भी हिदायत मिलती है कि सारे नज़रियात-ओ-उद्यान से कट कर अल्लाह के दीन के लिए यकसू होजाए और इस्लाम को ही दीनी ए हक़ समझ कर इस के अहकामात पर अमल पैरा हो। उन्हों ने कहा कि क़ुरआन मजीद ने ये भी साबित करदिया कि इसी से दुनिया-ओ-आख़िरत की कामयाबी है।

मौलाना जलाल उद्दीन अंसर उमरी ने कहा कि बिअसत नबवी(pbuh) के बाद दुनिया ने देखा कि एक नई दुनिया तामीर हुई है, नए अख़लाक़ीयात, नई तहज़ीब, नई मुआशरत, मईशत के नए उसूल, सियासत का नया ढंग वजूद में आया है, जिस की वजह से दुनिया में अक़ीदा-ओ-फ़िक्र, अख़लाक़ वतहज़ेब, मुआशरत की बिहार आई है जिस को दुनिया की तारीख फ़रामोश नहीं करसकती।

क़ुरआन मजीद में रब कायनात ने अपने हबीब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (pbuh) से मुख़ातिब करते हुए इरशाद फ़रमाया कि ए पैग़म्बर ये किताब हम ने आप को दी है ताके आप दुनिया को ज़ुलमतों से निकाल कर रोशनी की तरफ़ ले आएं। उन्हों ने कहा कि इस बिहार को देखने के बाद हर फ़ित्री तौर पर इंसान के दिल में ये ख़ाहिश उभरती है कि काश आज की ख़िज़ां रसीदा दुनिया में ये बिहार फिर से आजाए और जो इंसान एसा नहीं चाहता है तो वो इंसान नहीं जानवर है और इस के सेना में दिल नहीं पत्थर है।

जो ये सोच रहा है कि आज के दौर में ये बिहार नहीं आसकती और ज़िंदगी की गाड़ी जिस तरह रवां दवां है उसे उल्टी सिम्त में गर्दिश नहीं दिया जा सकता तो एसे इस्लाम का सहीह तरीका से मुताला करना चाहीए।

उन्हों ने कहा कि फ़िक्र-ओ-नज़र की आज़ादी का इस से बड़ा तसव्वुर क्या होगा कि क़ुरआन मजीद में ख़ालिक़ कायनात की तरफ़ से ये एलान किया गया कि कह दो कि ये हक़ है तुम्हारे रब की तरफ़ से जिस का जी चाहे मान ले जिस का जी चाहे इनकार करदे।

इसी तरह क़ुरआन मजीद में है कि हम ने सीधा रास्ता दिखाई दिया, आदमी चाहे तो इस रास्ते को इख़तियार करके शुक्र अदा करे यह चाहे तो इनकार करदे, किसी के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है।

TOPPOPULARRECENT