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अख़लाक़ हसना ही से बेहतरीन सेहत-ओ-तरक़्क़ी ममिकन

कुरनूल। 02 नवंबर,( रास्त ) अख़लाक़ हसना ही से बेहतरीन सेहत-ओ-तरक़्क़ी मुम्किन ही, अख़लाक़ के बगै़र ज़िंदगी हैवानियत के मुमासिल ही।बेहतर अख़लाक़ आपसी भाई चारा-ओ-मुहब्बत केलिए मुमिद, अख़लाक़ ही से इस्लाम की इशाअत मुम्किन ही। इन बातों का इज़हार

कुरनूल। 02 नवंबर,( रास्त ) अख़लाक़ हसना ही से बेहतरीन सेहत-ओ-तरक़्क़ी मुम्किन ही, अख़लाक़ के बगै़र ज़िंदगी हैवानियत के मुमासिल ही।बेहतर अख़लाक़ आपसी भाई चारा-ओ-मुहब्बत केलिए मुमिद, अख़लाक़ ही से इस्लाम की इशाअत मुम्किन ही। इन बातों का इज़हार मौलाना सय्यद ज़ाकिर अहमद रशादी ने किया। सफ़ा बैत-उल-माल कुरनूल के ज़ेर-ए-एहतिमाम सफ़ा मोबाईल क्लीनिक के ज़रीया कुरनूल शहर के पसमांदा इलाक़ा मुज़फ़्फ़र नगर में वाक़्य मुदर्रिसा अनवार उल-उलूम के अहाता में मुफ़्त मैडीकल कैंप मुनाक़िद किया गया। इस मौक़ा पर सदर सफ़ा बैत-उल-माल कुरनूल मौलाना सय्यद ज़ाकिर अहमद रशादी ने कहा कि एक इंसान की बेहतर ज़िंदगी के लिए बेहतर सेहत निहायत ज़रूरी ही। बेहतर सेहत केलिए बेहतर अख़लाक़ लाज़िम हैं, बदअख़्लाकी से सैंकड़ों बुराईयों के इलावा सेहत पर भी बुरे असरात मुरत्तिब होते हैं। उन्हों ने मज़ीद बतायाकि इस माहौल में बदअख़्लाकी के शिकार कई नौजवान चंद लाइलाज बीमारीयों में मुबतला हैं, जिस से इस एन नौजवानों के इलावा पूरा ख़ानदान परेशान रहता ही। इस लिए ख़सूसन नौजवानों को चाहीए कि बुरी आदात-ओ-बरी सेहत से इजतिनाब करें क्योंकि बरी आदात, बुरी सोहबत ही से होती हैं। मौलाना ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि सफ़ाबीत उलमाल का मक़सद बलातफ़रीक़ मज़हब ग़रीब-ओ-बेबस अवाम तक ख़िदमात को पहुंचाना ही। इस मैडीकल कैंप के लिए डाक्टर इफ़्तिख़ार अहमद की ख़िदमात हासिल की गईं। दो सौ से ज़ाइद ग़रीब-ओ-मज़दूर पेशा मरीज़ों ने इस कैंप से इस्तिफ़ादा किया। तमाम मरीज़ों में तशख़ीस के साथ साथ मुफ़्त दवाएं भी तक़सीम की गईं। हाफ़िज़ सलीम और हाफ़िज़ नूर अहमद के इलावा तमाम अरकान-ओ-कारकुनान ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। मुआविन सफ़ा बैत-उल-माल जनाब चांद पाशाह के इलावा मुहतमिम मुदर्रिसा अनवार उल-उलूम हाफ़िज़ रहमत अल्लाह ने भी इस कैंप के इनइक़ाद में तआवुन किया.

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