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आंखों की रोशनी गंवा चुके कश्मीरियों के लिये जाना जायेगा साल 2016

कश्मीर। हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूख ने 2016 का साल कश्मीर के लिये सबसे दर्दनाक साल करार दिया। 2016 की ह्यूमन राइट रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा  कि 2015 की तुलना में 2016 में ज्यादा लोग मारे गए। ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 का गर्मी का महीना घाटी के लिए ‘मरी हुई आंखों की महामारी’ के लिए जाना जाएगा। रिपोर्ट में इस बात का साफ-साफ जिक्र किया गया है कि 8 जुलाई को मिलिटेंट कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद जिस कदर दक्षिणी कश्मीर में कहर बरपा उसमें सैकड़ों लोगों ने अपने आंखों की रोशनी गंवा दी।

रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में कुल 389 लोगों की मौत हुई। इनमें से 151 आमलोग, 80 सुरक्षाबल और 158 मिलिटेंट थे। जम्मू कश्मीर में जुलाई महीने में कुल 62, अगस्त में 25, सितंबर में 20, अक्टूबर में 8, नवंबर में 17 और दिसंबर में 3 आम नागरिकों की मौत हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल लगभग 16000 लोग घायल हुए। इनमें से 70 फीसदी पैलेट गन के शिकार हुए। जबकि 3300 सुरक्षाबल तो केवल पत्थरबाजी की घटना में घायल हो गए। 8 जुलाई के बाद अशांत घाटी में करीब 13000 लोगों को डिटेन किया गया। 8 जुलाई के बाद घाटी करीब 153 दिनों तक बंद रहा। ये साल कश्मीर के सारे लोकतंत्र की आवाज पर भी पांबदी लगा दिया। कश्मीर के संघर्ष के दौरान मीडिया पर भी लगाम लगा दी गई। इस दौरान मोबाइल, इंटरनेट, न्यूजपेपर सबकुछ पर पाबंदी रही। कम्युनिकेशन के सारे मोड बंद कर दिए गए थे।

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