Friday , October 20 2017
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आइन्दा तालीमी साल से ख़ान्गी स्कूलों में पचास फ़ीसद फ़ीस इज़ाफ़ा का मंसूबा

ख़ान्गी स्कूलों में फ़ीस की अदायगी के मसाइल और स्कूल इंतेज़ामीया की जानिब से फ़ीस में किए जाने वाले बतदरीज इज़ाफ़ा से औलियाए तलबा की परेशानीयों में इज़ाफ़ा होता जा रहा है।

ख़ान्गी स्कूलों में फ़ीस की अदायगी के मसाइल और स्कूल इंतेज़ामीया की जानिब से फ़ीस में किए जाने वाले बतदरीज इज़ाफ़ा से औलियाए तलबा की परेशानीयों में इज़ाफ़ा होता जा रहा है।

हुकूमत ने साबिक़ में ख़ान्गी स्कूलों में फ़ीस के ताऐयुन के सिलसिले में एक कमेटी का क़ियाम अमल में लाया था जिस ने ख़ान्गी स्कूलों की फ़ीस का ताऐयुन करते हुए हद मुक़र्रर की थी लेकिन गुज़िश्ता चंद बरसों से इस कमेटी की जानिब से अख़्तियार कर्दा ख़ामूशी के सबब ख़ान्गी स्कूलों बिलख़ुसूस नामवर कॉरपोरेट स्कूलों की फ़ीस में बेतहाशा इज़ाफ़ा किए जाने का ख़द्शा है।

बताया जाता है कि ख़ान्गी स्कूलों की जानिब से आइन्दा तालीमी साल के आग़ाज़ पर सालाना फ़ीस में 50% तक का इज़ाफ़ा करने की मंसूबाबंदी की जा रही है। इस सिलसिले में औलियाए तलबा की तशवीश में इज़ाफ़ा होता जा रहा है लेकिन ज़िला कलेक्टर की निगरानी में क़ायम की गई कमेटी की जानिब से ताहाल कोई रद्दे अमल ज़ाहिर नहीं किया जा रहा है।

ख़ान्गी स्कूलों की बड़ी तादाद की जानिब से हुकूमते हिन्द की जानिब से मंज़ूरा क़ानून हक़ तालीम पर अमल आवरी को यक़ीनी बनाने के सिलसिले में तो कोई इक़दामात नहीं किए जा रहे हैं जिस से ग़रीब तलबा का फ़ायदा हो लेकिन इस के साथ फ़ीस में किए जाने वाले बेतहाशा इज़ाफ़ा के सबब मिडिल तबक़ा से ताल्लुक़ रखने वाले तलबा की तालीम का सिलसिला भी दुशवार कुन मराहिल से गुज़र रहा है।

शहर के बाअज़ मख़सूस स्कूल और तालीमी इदारे एक मख़सूस तबक़ा की हद तक महदूद हो चुके हैं। जब तालीमी इदारों से ही तबक़ाती निज़ाम पनपने लगे और ग़रीब और अमीर का फ़र्क़ किया जाने लगे तो फिर समाज से इस बुराई को कैसे दूर किया जा सकता है। इस का किसी के पास जवाब नहीं है।

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