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आइन्दा बजट में फ़ुज़ूल मसारिफ़ मे कमी का इशारा

शरह निम्मो को बहाल करने केलिए मुख़्तलिफ़ इस्लाहात के नफ़ाज़ के बाद मर्कज़ी वज़ीर फैनानस पी चिदम़्बरम ने आज इशारा दिया कि साल 2013-14के बजट में बेजा मसारिफ़ को कम करने और सरमाया कारी के फ़रोग़ पर तवज्जु मर्कूज़ की जाएगी। मिस्टर चिदम़्बरम ने पि

शरह निम्मो को बहाल करने केलिए मुख़्तलिफ़ इस्लाहात के नफ़ाज़ के बाद मर्कज़ी वज़ीर फैनानस पी चिदम़्बरम ने आज इशारा दिया कि साल 2013-14के बजट में बेजा मसारिफ़ को कम करने और सरमाया कारी के फ़रोग़ पर तवज्जु मर्कूज़ की जाएगी। मिस्टर चिदम़्बरम ने पिछ्ले रोज़ अमरीकी ब्लूमबर्ग टेलीविज़न चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा कि हमें एक ऐसा बजट होना चाहीए जिस से मालीयाती इस्तिहकाम , बचतों पर तरग़ीबात, फ़ुज़ूल मसारिफ़ में कमी और सरमाया कारी को फ़रोग़ हासिल होसके, ताहम उन्हों ने कहा कि इन इस्लाहात के बावजूद हुकूमत के कलीदी फ़लाही प्रोग्राम्स मुकम्मल तौर पर महफ़ूज़ रहेंगे।

मिस्टर चिदम़्बरम और रिज़र्व बैंक औफ़ इंडिया के गवर्नर डी सुबह राव‌, आई ऐम एफ़, वर्ल्ड बैंक मिटींग‌ में शिरकत केलिए टोकीयो पहूंचे हैं। ग़िज़ा, खाद और ईंधन पर बढ़ती हुई सब्सीडी की सूरत में मालीयाती ख़सारा को रोकना हुकूमत के लिए एक अहम चैलेंज साबित होगा। अगरचे 2012-13-ए-के बजट में मालीयाती ख़सारा, मजमूई घरेलू पैदावार के 5.1 फ़ीसद हिस्सा के मुसावी होने का तख़मीना किया गया था लेकिन अब माहिरीन मआशियात का ख़्याल है कि इस तख़मीना की पाबंदी करना हुकूमत केलिए दुशवार होगा।

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