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आईएसआई को राज़ की फ़राहमी का केस मुल्ज़िम फ़रीद ख़ान को ज़मानत नहीं

नई दिल्ली: दिल्ली हाइकोर्ट ने पाकिस्तान के आईएसआई कारिंदों को हस्सास नौईयत की दस्तावेज़ात मुबय्यना तौर पर सरबराह करने की पादाश में गिरफ़्तार पाँच मुल्ज़िमीन में से एक को ज़मानत अता करने से इनकार करते हुए कहा कि इस के ख़िलाफ़ इल्ज़ामात निहायत संगीन नौईयत के हैं।

जस्टिस पीएस तेजी ने मुल्ज़िम फ़रीद ख़ान को जो फ़ौजी हवालदार है, इस मरहले पर राहत देने से इनकार किया। समझा जाता है कि फ़रीद ख़ान ने खु़फ़ीया नौईयत की मालूमात का दीगर शरीक मुल्ज़िमीन के साथ तबादला किया जो माली फ़वाइद के लिए पाकिस्तान में मौजूद इन्टेलिजेंस‌ कारिंदों को ये मालूमात फ़राहम किया करते थे।

अदालत ने कहा कि हक़ायक़ और हालात की रोशनी में ये अदालत की राय है कि दरख़ास्त गुज़ार के ख़िलाफ़ इल्ज़ामात निहायत संगीन नौईयत के हैं, वो दीगर शरीक मुल्ज़िमीन के साथ पाकिस्तानी इन्टेलिजेंस एजेन्सी आईएसआई को हिन्दुस्तानी क़ौमी सलामती से मुताल्लिक़ मालूमात बहम पहुंचाने में शामिल‌ है।

इस किस्म के माम‌लों में जहां दरख़ास्त गुज़ार के रोल का असल मुल्ज़िम या मुल्ज़िमीन इन्किशाफ़ करते हैं और दरख़ास्त गुज़ार के क़बज़े से दस्तावेज़ात दरआमद होते हैं, अदालत उसे राहत नहीं दे सकती क्योंकि ज़मानत मिलने के बाद आज़ादी का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है और सबूत मिटाने की कोशिश की जा सकती है।

मुख़ालिफ़ क़ौम दुश्मन सरगर्मीयों में शामिल‌ होने पर मुल्ज़िम को राहत की उम्मीद‌ नहीं रखना चाहिए। अदालत ने केस की मुहतात तन्क़ीह और अर्ज़ी और एफ़आई आर के मशतमलात का जायज़ा लेने के बाद कहा कि दरख़ास्त गुज़ार का नाम असल मुल्ज़िम कैफ़ीयतुल्लाह ख़ान ने बताया है, जो आईऐसआई एजेंट है।

पाकिस्तान की एंटर सर्विसेस इन्टेलिजेंस‌ (आईएसआई के कारिंदे को खु़फ़ीया हिन्दुस्तानी दस्तावेज़ात की मुबय्यना सरबराही के सिलसिले में तमाम 5 मुल्ज़िमीन गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। कैफ़ीयतुल्लाह गिरफ़्तार किये जाने वाला पहला शख़्स रहा जिसे गुज़िशता साल 26 नवंबर को यहां से हिरासत में लिया गया जबकि वो भोपाल जाने की कोशिश कर रहा था ताकि वहां मज़हबी इजतिमा में शिरकत करते हुए मज़ीद जुसूसों की मुबय्यना तौर पर भर्ती करसके।

इस कार्य‌रवाई के बाद उस वक़्त के बरसर ख़िदमत बी एस एफ़ हैडकांस्टेबल अबदुर्रशीद, साबिक़ फ़ौजी हवालदार मुनव्वर अहमद मीर और सरकारी स्कूल टीचर साबिर को गिरफ़्तार किया गया जो तमाम मौजूदा तौर पर अदालती तहवील में हैं। इन सारों को क़ानून सरकारी राज़ के तहत मुल्ज़िम बनाया गया है।

अदालत में बेहस के दौरान फ़रीद ने दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर हुकूमत में क्राईम ब्रांच के हुक्काम को दानिस्ता हिदायत दी कि उसे ज़द-ओ-कूब किया जाये और ये इल्ज़ाम भी लगाया कि पुलिस ने इस के घर से बरामद अश्याय के ताल्लुक़ से झूट कहा है|

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