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आईना ख़ुद को निखारने की लगन का बाइस(सबब)

आईना ख़ुद को निखारने की लगन का बाइस(सबब) बर्तानवी माहिरीन के मुताबिक़ आईने को ज़्यादा देखने से इंसान के अंदर अपने आप को ज़्यादा निखारने केलिए मज़ीद(ज्यादा) मुहतात(फिकरमंद) होने की लगन पैदा होती है। इस बात की तसदीक़ उन्हों ने हालिया तहक़ी

आईना ख़ुद को निखारने की लगन का बाइस(सबब) बर्तानवी माहिरीन के मुताबिक़ आईने को ज़्यादा देखने से इंसान के अंदर अपने आप को ज़्यादा निखारने केलिए मज़ीद(ज्यादा) मुहतात(फिकरमंद) होने की लगन पैदा होती है। इस बात की तसदीक़ उन्हों ने हालिया तहक़ीक़ में की है।

माहिरीन ने बताया के आम अफ़राद( लोग) में अगर कोई 10 मिनट तक आईने के सामने खड़ा रहता है और अपने चेहरे की तरफ़ ग़ौर से देखता है तो वो अपने चेहरे के बारे में परेशानी में मुबतला होगा और उसे मज़ीद(ज्यादा) बेहतर से बेहतर बनाने के लिए मुहतात हो कर मुख़्तलिफ़ (अलग) इक़दामात केलिए तैय्यार हो जाएगा।

माहिरीन के मुताबिक़ बर्तानिया में तक़रीबन 6,00,000 के लग भग अफ़राद(लोग)अपने आप को इस हालत में देखते हैं क्योंकि उन की इस परेशानी की वजह इन का अपने आप को आईने में ज़्यादा देर तक देखना है जो के उन्हें उन के जिस्म के किसी एक या एक से ज़ाइद हिस्से के बारे में ज़्यादा मुहतात(फिकरमंद) हो कर उस की निगहदाशत करने केलिए तैय्यार करता है और वो तब तक इस जिस्म के हिस्से को निखारने केलिए कोशिश करते हैं जब तक के वो मुकम्मल(पूरा) एतिमाद(भरोसा)के साथ उसे बेहतर ना कर लें।

लोगों के अंदर इस परेशानी के बाइस(सबब) वो अपने चेहरे को बेहतर देखने की ख़ातिर गहरे मेकअप्प वग़ैरा का इस्तिमाल भी करते हैं ता के नज़र आने वाली कमी को दूर कर सकें।

माहिरीन के मुताबिक़ जो लोग अपने चेहरे का ज़्यादा देर तक आईने में देखते हैं वो कम आईना देखने वालों की निसबत अपने चेहरे का ज़्यादा ख़्याल रखते हैं और उन की निसबत ज़्यादा ख़ूबसूरत नज़र आते हैं।

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