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आई पी एल से खिलाड़ियों की फ़िटनेस बेहतर हुई : गोलेस्टर

आई पी एल तनाज़आत की वजह से हिंदुस्तान में भले ही क्रिकेट बदनाम हुई है लेकिन मशहूर फिज्योथ्रोपिस्ट जान गोलेस्टर का मानना है कि हिंदुस्तानी खिलाड़ियों के फ़िटनेस मेयार को बुलंद करने में आई पी एल का इंतिहाई अहम रोल रहा है।

आई पी एल तनाज़आत की वजह से हिंदुस्तान में भले ही क्रिकेट बदनाम हुई है लेकिन मशहूर फिज्योथ्रोपिस्ट जान गोलेस्टर का मानना है कि हिंदुस्तानी खिलाड़ियों के फ़िटनेस मेयार को बुलंद करने में आई पी एल का इंतिहाई अहम रोल रहा है।

ख़बररसां एजंसी पी टी आई से इज़हार ख़्याल करते हुए गोलेस्टर ने कहा कि इस में कोई शक नहीं कि आई पी एल की वजह से हिंदुस्तानी खिलाड़ियों की फ़िटनेस का मेयार काफ़ी बुलंद हुआ है। गोलेस्टर जिन्होंने 2008 में हिंदुस्तानी क्रिकेट टीम के फ़िज़ियो के ओहदा से दस्तबरदारी इख़तियार की थी वो फ़िलहाल आई पी एल की टीम राजिस्थान रॉयल्स केलिए अपनी ख़िदमात फ़राहम कररहे हैं।

राजिस्थान रॉयल्स के मुताल्लिक़ इज़हार ख़्याल करते हुए गोलेस्टर ने कहा कि रॉयल्स वो वाहिद टीम है जिसके साथ फ़िज़ियो की मुस्तक़िल ख़िदमात वाबस्ता हैं जिसकी वजह से खिलाड़ियों को काफ़ी फ़ायदा हुआ है। उन्होंने मज़ीद कहा कि वो राजिस्थान रॉयल्स टीम के खिलाड़ियों केलिए मर्कज़ी हैसियत रखते हैं और अपनी हर वक़त दस्तयाबी को यक़ीनी बनाते हैं।

खिलाड़ियों के ज़ख्मी होने और फ़िज़ियो से राबिता करने के बारे में उन्होंने राजिस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों का हवाला देते हुए कहा कि खिलाड़ियों के लिए ज़रूरी है कि वो अपने ज़ख्मों को लेकर फ़िज़ियो से राबिता करें। चूँकि क्रिकेट में ज़ख़मी होना खेल का लाज़िमी हिस्सा है लेकिन खिलाड़ियों को चाहिए कि अपने ज़ख़मों की पर्दापोशी ना करें बल्कि दियानतदारी के साथ ज़ख़मों से सेहतयाबी के लिए फ़िज़ियो से राबिता करें जिस से ना सिर्फ़ ज़ख़मों से छुटकारा पाया जा सकता है बल्कि संजीदा और मुसलसल नौइयत‌ के ज़ख़मों को भी ख़त्म किया जा सकता है।

गोलेस्टर ने ज़ख़मों के मुताल्लिक़ इन ख़्यालात का भी इज़हार किया कि जिस्मानी ज़ख़मों से बा आसानी सेहत हासिल की जा सकती है लेकिन अगर कोई जेहनी तौर पर मज़बूत ना हो तो उसका ईलाज करना काफ़ी मुश्किल होजाता है। गोलेस्टर के मुताबिक‌ जिस्मानी नौइय‌त के ज़ख़म संजीदा नहीं होते जबकि अगर कोई खिलाड़ी जेहनी तौर पर मज़बूत नहीं है तो उसके लिए काफ़ी मेहनत की ज़रूरत है।

सचिन तेंदुलकर और राहुल दडविड के तवील क्रिकेट के मुताल्लिक़ इस्तिफ़सार पर कोलेस्टर का कहना है कि मज़कूरा खिलाड़ियों के तवील अर्सा तक क्रिकेट खेलने का एक अहम राज़ उनके अतराफ़ मुसबत माहौल का दस्तयाब होना है। फ़िज़ियो के मुताबिक‌ खिलाड़ियों के बेहतर मुज़ाहरा में मुसबत माहौल कलीदी रोल अदा करता है।

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