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आखिर कहां गए केदारघाटी से 20 हजार लोग?

देहरादून, 21 जून: शदीद तबाही के बाद जुमेरात को भी उत्तराखंड में मुतास्सिर इलाकों का नजारा बहुत ज्यादा नहीं बदला। राहत और बचाव में तेजी आई लेकिन अब भी करीब 25 हजार लोग फंसे हुए हैं।

देहरादून, 21 जून: शदीद तबाही के बाद जुमेरात को भी उत्तराखंड में मुतास्सिर इलाकों का नजारा बहुत ज्यादा नहीं बदला। राहत और बचाव में तेजी आई लेकिन अब भी करीब 25 हजार लोग फंसे हुए हैं।

फौज ने खाने के पैकेट गिराए और लोगों को निकाला। लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि आखिर केदारघाटी के 20 हजार लोग कहां हैं। तबाही वाली रात घाटी में करीब 30 हजार लोग थे।

इंतेज़ामिया का कहना है कि फंसे हुए ज्यादातर लोगों को बचाव दल ने निकाल लिया है। लेकिन आंकड़े इस दावे को गलत ठहरा रहे हैं।

मंगल के दिन से शुरू राहत व बचाव काम के बाद अब तक 10 हजार लोग ही निकाले गए हैं। बाकी के बीस हजार कहां गए, इसका जवाब हुकूमत और इंतेज़ामिया के पास नहीं है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक , गौरीकुंड से केदारनाथ धाम के 14 किमी के पैदल ट्रैक पर 4700 खच्चर चलते हैं। तबाही वाले दिन यह सभी बुक थे।

एक मुसाफिर और एक खच्चर वाले को जोड़ दिया जाए तो इनकी तादाद 9400 पर पहुंच जाती है। इसी तरह पैदल ट्रैक पर 700 डंडी चलती है। एक डंडी को ले जाने के लिए चार लोग लगते हैं।

पीक सीजन में सभी डंडी चल रही थीं। यानी डंडी ले जाने वाले 2800 लोग हुए और उनमें बैठे 700 लोगों को मिलाकर 3500 लोग हो जाते हैं। इसी तरह 500 कंडी संचालित होती है।

एक कंडी के साथ दो लोग होते हैं और एक मुसाफिर बैठा होता है। इस तरह 1500 लोग यह भी हो जाते हैं।
केदारनाथ से लेकर गौरीकुंड तक में 250 होटल हैं। एक होटल में कम से कम चार मुलाज़्मीन होते हैं। इस तरह 1000 तो होटल के मुलाज़्मीन हो जाते हैं।

केदारनाथ में मौजूद होटलों में 6000 मुसाफिरों के रुकने का इंतेज़ाम है। इसी तरह गौरीकुंड में वाकेए होटलों में 8000 मुसाफिर ठहर सकते हैं। पीक सीजन होने की वजह से सभी होटल फुल थे।

इसका मतलब यह हुआ कि दो जगहों पर 14,000 मुसाफिर ठहरे हुए थे। इस रूट पर 700 सरकारी मुलाज़्मीन भी हमेशा तैनात रहते हैं। मुकामीइ ताजिरों की तादाद भी 500 से ज़्यादा रहती है।

सुलभ इंटरनेशनल के 120 माल्ज़्मीन और 100 पुरोहित भी मौजूद थे। सभी को मिलाकर 30120 लोग तबाही वाली रात यहां थे। 10 हजार बचाए गए तो 20 हजार कहां गए-इसका जवाब कोई नहीं दे रहा है।

बहरहाल, 24,800 लोग अभी भी फंसे हुए हैं। जुमेरात को टिहरी से गुप्तकाशी तक केदारनाथ हाइवे खुल गया तो इस रास्ते से हजारों मुसाफिर ऋषिकेश पहुंचाए गए।

इंतेज़ामिया ने इस रास्ते से 10 हजार मुसाफिरों को निकालने का दावा किया है। इनमें से ज्यादातर वे मुसाफिर हैं, जो गुप्तकाशी और केदारघाटी के दूसरे हिस्सों में फंसे थे। फौज और एयरफोर्स फौज ने जुमेरात को तकरीबन 12 हजार मुसाफिरों को निकालने की बात कही है।

चमोली जिले से ही फौज ने बदरीनाथ, घांघरिया और गोविंदघाट में फंसे नौ हजार मुसाफिरों को सही सलामत निकाला है। ससबसे ज़्यादा मुतास्सिर केदारघाटी से हेलीकॉप्टर के जरिये 807 लोग निकाले गए।

जंगलचट्टी से भी तकरीबन 400 लोगों को गौरीकुंड लाया गया है। हेलीकॉप्टर से इन्हें गुप्तकाशी, फाटा और रुद्रप्रयाग लाया जाएगा।

इसके इलावा, देहरादून से खाने के 20 हजार पैकेट लेकर फौज का हेलीकॉप्टर गुप्तकाशी पहुंचा। यहां से छोटे हेलीकॉप्टरों के जरिए खाने पीने की चीजें मुतास्सिर इलाको में गिराई गई।

बुध की शाम 5000 से ज़्यादा लोग गौरीकुंड से निकलकर गौरी गांव में फंसे थे। ये लोग भूखे-प्यासे और बीमारी के शिकार थे। लेकिन इनका हालचाल लेने वाला कोई नहीं है।

इनमें से एक मुसाफिर ने फोन पर बताया कि पुलिस और जिला इंतेज़ामिया का रवैया बहुत रूखा है। राहत और बचाव का काम बेमानी साबित हो रहे हैं। लोगों में गुस्सा इतना ज्यादा है कि उत्तराखंड के वज़ीर-अफसर मुसीबतजदा के पास जाने से भी कतरा रहे हैं।

कांग्रेस सदर सोनिया गांधी और पीएम मनमोहन सिंह दिल्ली से आसमानी सफर पर आए और ऊपर से ही नजारा देखकर चले गए। यही हाल उत्तराखंड के वज़ीर ए आला विजय बहुगुणा का भी रहा।

बुध के दिन हेलीकाप्टर में बैठकर केदार घाटी में आई तबाही को देखा। नुकसान को भी कुबूल किया। लेकिन मुतास्सिरों का हालचाल नहीं जाना। लेकिन कहना होगा कि लोगों के दर्द को अगर जानना है तो ज़मीन पर उतरना पड़ेगा। फिलहाल उत्तराखंड के मंत्री-संतरी, नेता इस मामले में बहुत ही फिसड्डी साबित हुए।

–250 करोड़ का नुकसान: हिमालयन सुनामी में उत्तराखंड की 1076 सड़कें बर्बाद हो चुकी हैं। 94 पुल बह गए हैं, जिससे 250 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।

–90 धर्मशालाएं केदारनाथ में थे जो बाढ़ में बह गए , इन धर्मशालाओं में सैकड़ो लोग ठहरे थे ।

–400-500 लोगों को केदारघाटी से निकालने के लिए फौज आज ( जुमा) मुहिम शुरू करेगी ।

–22,392 लोगों को सही सलामत महफूज़ मुकामात पर पहुंचाया गया ।

–62122 लोग अब भी फंसे हैं ।

—–बशुक्रिया: अमर उजाला

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