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आखिर क्यों न बन सके वज़ीर राजा भैया और बुखारी के दामाद!

लखनऊ, 18 जुलाई: अखिलेश यादव ने अपने इक्तेदार के दौरान काबीने ( Council of Ministers) का तीसरा बदलाव पूरा कर लिया है। कई मेम्बर असेम्बली और रियासत के वज़ीर दारुल हुकूमत से मायूस लौटने की तैयारी कर रहे हैं।

लखनऊ, 18 जुलाई: अखिलेश यादव ने अपने इक्तेदार के दौरान काबीने ( Council of Ministers) का तीसरा बदलाव पूरा कर लिया है। कई मेम्बर असेम्बली और रियासत के वज़ीर दारुल हुकूमत से मायूस लौटने की तैयारी कर रहे हैं।

यह बहस भी जोरों पर है कि आखिर राजा भैया और शाही इमाम अहमद बुखारी के दामाद को क्यों शामिल नहीं किया गया…

सियासतदां के मुताबिक, राजा भैया को लेकर समाजवादी पार्टी हाईकमान ‌रिस्क नहीं लेना चाहता था।हाईकमान ने नहीं लिया रिस्क
कुंडा केस में राजा भैया के हालात अभी पूरी तरह साफ नहीं है और पार्टी इस वक्त राजा को लेकर तनाजे में नहीं फंसना चाहती।

हालां‌कि, पार्टी के अदरूनी ज़राए बता रहे हैं कि लोकसभा इलेक्शन से ठीक पहले एक बार फिर हुकूमत में फेरबदल होगा और उस वक्त राजा भैया को कैबिनेट में जगह मिल जाएगी।

उनको उम्मीद है कि तब तक राजा भैया पर चल रहा केस भी शायद रफा-दफा हो जाएगा।

शाही इमाम के भारी दबाव के बावजूद उनके दामाद उमर अली खान काबीने में जगह नहीं बना पाए। ज़राए की मानें तो इसके पीछे कोई और नहीं ‌बल्कि आजम खां का पुरजोर मुखालिफत है।

आजम कतई उमर को काबीने में नहीं देखना चाहते थे। हालांकि, मुलायम व पार्टी के कुछ दिग्गज आजम को मनाने में लगे हुए हैं। मुलायम किसी भी हाल में लोकसभा इंतेखाबात से पहले बुखारी को अपने पाले में करना चाहेंगे।

पार्टी के कुछ करीबी लोगों के मुताबिक, बुखारी पार्टी के लिए आइंदा इंतेखाबात में दिक्कत खड़ी कर सकते हैं। इसलिए, लोकसभा इंतेखाबात से पहले मुम्किना काबीने के फेरबदल में उमर भी वज़ीर बन सकते हैं।

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